मंगलवार

कितनी है महंगाई.?

at 04:24


मनोज जैसवाल-मीडिया में, संसद में, और सड़कों पर – जब चहुँओर महंगाई-महंगाई का रोना रोया जाने लगा तो मैंने सोचा कि चलो महंगाई की पड़ताल कर ही लिया जाए कि किधर है महंगाई और कितनी है महंगाई.
सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक की दुकान पर पहुंचा. सोचा आजकल तो हर चीज हाईटेक हो गई है. महंगाई भी हाईटेक हो गयी होगी और उसका पता यहाँ आसानी से मिल जाएगा.
कम्प्यूटर सेक्शन में एक बढ़िया, ब्रांड न्यू, लेटेस्ट कॉन्फ़िगरेशन वाले कंप्यूटर के प्राइस टैग पर 30 हजार रुपये को काट कर 24 हजार रुपए लिखा गया था. साथ में 3 हजार मूल्य के अन्य उपहार फ्री. इससे रद्दी किस्म का कंप्यूटर दो साल पहले मैंने तो चालीस हजार रुपए में लिया था, और उपहार की बात तो छोड़ ही दें, पायरेटेड सॉफ़्टवेयर इंस्टाल करवाने के अतिरिक्त 5 सौ रुपए अलग से झाड़ लिए गए थे. कमोबेश यही हाल कलर टेलिविजन सेटों, माइक्रोवेव ओवनों, फ्रिज, एयर-कंडीशनरों इत्यादि-इत्यादि में भी था. यहाँ तो महंगाई देवी नजर नहीं आई, और बदले में सस्ती महारानी पैर जमाए मिली.
मुझे लगा कि हो न हो महंगाई डेली नीड्स और खानपान की दुकानों पर मौजूद हो सकती है. नए नए खुले पित्जा झोंपड़ी नामक दुकान पर पहुँचा. वहाँ पर नॉन फ़ेस्टिव सीजन के तहत प्राइज में 10 प्रतिशत छूट थी, फेमिली साइज पित्जा पर कोक की बोतल मुफ़्त तथा कुछ विशेष किस्म के पित्जाओं पर कई-कई माउथ वाटरिंग टॉपिंग बिलकुल फ्री मिल रही थी. लोग लाइन लगाए खड़े थे. टेबलों पर भीड़ जमा थी. काउंटर पर पैक करवाने वालों की मारामारी चल रही थी. महंगाई का तो जनाब, लगता है यहाँ कोई लेना देना ही नहीं था! मुझे बड़ी निराशा हाथ लगी.
कपड़ों, जूतों की दुकानों पर तो मामला और गड़बड़ था. कहीँ 70 प्रतिशत छूट मिल रही थी तो कहीं स्टाक क्लीयरेंस सेल में एक पर 4 फ्री. जूते चप्पलों में 80 प्रतिशत छूट. और तो और सरकारी खादी भंडार की दुकानों में भी कीमतें कम थीं 30 प्रतिशत छूट के साथ!
निराशा और मुर्दनी भरा चेहरा लिए मैं महंगाई को बड़ी बेताबी से ढूंढ रहा था तो अचानक मुंगेरीलाल दिख गया. वो अपने स्मार्ट मोबाइल फ़ोन से चिपका हुआ किसी से बात कर रहा था. वह मुझे देख कर मुस्कुराया, हाथ हिलाया मगर उसका ध्यान पूरी तरह फोन पर बात करने में ही था. मुझे लगा कि मुंगेरी से महंगाई के बारे में कुछ सुराग मिल सकता है. मैंने इंतजार करना उचित समझा कि कब उसकी बात खत्म हो तो मैं उससे महंगाई के बारे में पूछूं. पूरे आधे घंटे और उनचास सेकंड के बाद उसने फोन बंद किया और मुझसे छूटते ही सफाई देते हुए बोला – वो क्या है न फ्री टॉकटाइम वाला प्लान ले रखा है. तो फियांसे से बात कर रहा था. फिर जैसे अचानक उसे याद आया – उसने मेरे सामने अपना नया फुल, मल्टीटच स्क्रीन युक्त स्मार्टफ़ोन लहराया – ये भी अभी हाल ही लिया है. जब यह रिलीज हुआ था तो डबल कीमत थी. अभी सस्ता हुआ और ऑफर आया तो सोचा कि ले ही लें. है न बढ़िया? ऐं...? फ्री प्लान और सस्ता मोबाइल...? और महंगाई – वो किधर है मुंगेरी?
कुछ समय पहले लोग महंगे प्याज के बारे में खूब हल्ला मचा रहे थे. सोचा, चलो सब्जी बाजार चला जाए. वहाँ तो महंगाई हर हाल में दिख ही जाएगी. सब्जी बाजार के मुहाने पर ही प्याज से भरे बोरों के ढेर के ढेर लग रहे थे. मेरा मन उछल पड़ा. हो न हो यहाँ तो महंगाई होगी ही. प्याज और महंगाई का तो पैंट-पतलून (चोली-दामन लिखने से स्त्रीवादी नाराज हो सकते हैं) का रिश्ता है. पर यहाँ भी महंगाई न मिली. पता चला कि किसान प्याज बेचने बाजार आए थे, मगर पैदावार और फसल ज्यादा होने से खरीदार नहीं मिले और उनके पास माल की वापस ढुलाई के पैसे नहीं थे तो वे अपने प्याज वहीं फेंक कर चले गए. मुई महंगाई प्याज को भी छोड़कर चली गई थी तो वो मुझे कहाँ से मिलती.
आखिर में महंगाई को ढूंढते-ढूंढते मैं किराना शॉप में पहुँचा. आजकल दुकानें शॉप में बदल गई हैं. मुझे देखते ही शॉपदार बोला – आइए, साहब क्या लेंगे – साबुन और सर्फ के दाम घट गए हैं. समर स्पेशल साबुन में तो एक पर एक फ्री है. टूथपेस्ट में उसी दाम पर 20 प्रतिशत एक्स्ट्रा मिल रहा है. चिप्स के 2 पैकेट खरीदने पर नूडल्स का एक पैकेट फ्री है. शेविंग क्रीम पर शेविंग ब्लेड के साथ साथ ऑफ़्टर शेव भी मुफ़्त है...
मैं ठगा सा खड़ा रह गया
manojjaiswalpbt@gmail.com.
मूल पोस्ट Raviratlami 

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