रविवार

नरेंद्र मोदी : एक दमदार नेतृत्व की झलक

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नरेंद्र मोदी
नरेंद्र मोदी
इन दिनों नरेंद्र मोदी चाहे जो करें या कहें, वही चर्चा के केंद्र में आ जाता है। इससे यह तो साफ है कि आप मोदी का या तो समर्थन करेंगे या विरोध, लेकिन उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते।

ऐसा लगता है कि विवादों और नरेंद्र मोदी का चोली-दामन का साथ है. हैदराबाद की रैली को लेकर विवाद निपटा नहीं था कि लालकिले से प्रधानमंत्री के भाषण के जवाब में भुज के लालन कालेज में भाषण देकर मोदी ने एक नया विवाद मोल ले लिया।

हालांकि मोदी ने बिगड़ते हालात, राष्ट्रीय सुरक्षा, भ्रष्टाचार, महंगाई जैसे मुद्दों से प्रधानमंत्री के किनारा कर लेने
पर ही चोट की है। फिर भी मोदी स्वतंत्रता दिवस जैसे मौके पर प्रधानमंत्री और अपने भाषण को आमने-सामने की बहस का रूप देने से बचते तो अच्छा होता।

यद्यपि भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी तक ने प्रकारांतर से इसकी आलोचना की है, पर मोदी ने व्यक्तिगत नहीं, व्यवस्था पर ही टिप्पणी की है. इसके लिए कांग्रेस ने मोदी को ‘खलनायक’ के तमगे से नवाजा है, पर ऐसी आलोचनाओं से घबरा जाएं तो मोदी ही क्या! कांग्रेस तो उन्हें ‘मौत का सौदागर’ व ‘यमराज’ तक कह चुकी है।

पिछले दिनों हैदराबाद में हुई रैली में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की शैली में मोदी का उछाला नारा ‘यस, वी कैन’ और ‘यस, वी विल डू’ मोदी के आलोचकों को उनकी निंदा करने का एक मौका दे गया। मानो यह ओबामा का पेटेंट था और मोदी ने ऐसा बोल कर कोई अपराध कर दिया हो। जबकि आलोचकों को पता होना चाहिए कि यह उद्घोष मूलत: स्वामी विवेकानंद का है, जिसे उन्होंने शिकागो की विश्व धर्म संसद में अपने उद्बोधनों में बोला था।

यह विडंबना ही है कि हिंदुत्व को सांप्रदायिक कह कर कोसने वाले सेकुलर अपने ही संत की वाणी भूल गये और ओबामा ने उसे याद रखा। मोदी खुद ओबामा से पहले ही बोल चुके हैं- ‘गुजरात कैन, गुजरात विल डू.’ दरअसल मोदी के खिलाफ दुष्प्रचार उनके विरोधियों का शगल बन चुका है. वह चाहे जो करें या कहें, वही चर्चा के केंद्र में आ जाता है। इससे यह तो साफ है कि आप मोदी का या तो समर्थन करेंगे या विरोध, लेकिन उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते।

हैदराबाद की नवभारत युवाभेरी रैली को ही लें, इसके लिए पांच रुपये का टिकट रखने की योजना की विरोधियों ने खूब आलोचना की और रैली की सफलता पर संदेह जताया। टिकट की खिल्ली उड़ाते हुए कहा गया कि यह रैली मोदी की लोकप्रियता की हवा निकाल देगी। लेकिन हुआ उलटा, रैली में एक लाख तक लोगों के पहुंचने की खबरों से मीडिया अटा पड़ा है।

लेकिन वह मोदी ही क्या, जिन पर वार करने का एक भी मौका उनके विरोधी चूक जाएं! यह विरोध और आलोचना ही मानो मोदी की ताकत बन गयी है, जो उन्हें लगातार चर्चा में रख कर उनकी लोकप्रियता को संजीवनी देती है। मानो मोदी एक ऐसी गेंद है जो जितनी ताकत से जमीन पर पटकी जायेगी, उतनी ही तेजी से ज्यादा ऊंचाई की ओर उछलेगी। मोदी के प्रति इतनी बड़ी संख्या में जनता, विशेषकर युवाओं, का आकर्षण है, वह भी कांग्रेस के गढ़ माने जानेवाले आंध्र प्रदेश में, कि टिकट लेकर भी रैली में भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

गत आम चुनाव में कांग्रेस आंध्र से ही सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें जीत कर आयी थी। आगामी आम चुनाव में उस जीत को दोहराने में जगनमोहन रेड्डी की बगावत ने बाधा खड़ी कर दी है। कांग्रेस की इन चिंताओं में से ही तेलंगाना राज्य का शिगूफा निकला, ताकि वोट बटोरे जा सकें।

जनभावनाओं के अनुरूप वहां मोदी की सेंध उसे विचलित कर रही है। इसलिए कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, जो आंध्र प्रदेश के प्रभारी भी हैं, रैली में टिकटों का फर्जीवाड़ा बता रहे हैं। यानी भाजपा ने पांच रुपये के टिकट का झूठा प्रचार कर खुद रैली के लिए रजिस्ट्रेशन का पैसा जमा कर दिया और इसे मोदी की लोकप्रियता से जोड़ कर दिखाया जा रहा है कि टिकट खरीद कर भी इतने लोग रैली में शामिल हुए! लेकिन इस सच्चाई को आप कैसे झुठलाएंगे कि जब नेताओं के प्रति आम लोगों का भरोसा उठ रहा हो, तब टिकट खरीद कर भी मोदी की सभा में लोग उमड़े।

ऐसे समय में जब रैलियों में भीड़ जुटाने को राजनीतिक दल बड़े पैमाने पर बसों से लेकर खाने-पीने तक की दूसरी कई तरह की सुविधाएं मुहैया कराते हों, टिकट खरीद कर किसी सभा में करीब एक लाख की भीड़ जुटना बड़ी बात है। देश के मौजूदा हालात से निराश-हताश जनता के मन में आशा और विश्वास जगाना मोदी की यूएसपी है। उनका यह कहना कि लोग युवाओं को देश का भविष्य बताते हैं, लेकिन मुझे तो युवाओं के भविष्य की चिंता है, नौजवानों को उनका दीवाना बना देता है।

आज राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर आंतरिक अमन-चैन और जनता की खुशहाली तक सब पर ग्रहण लगा है। पाकिस्तान और चीन आये दिन भारत की संप्रभुता को चुनौती देते हुए हमारी सीमा में घुस कर मनमानी करते हैं, जबकि हमारी सरकार ‘सब ठीक है’ कह कर वार्ता से मसलों को निपटाने की खुशफहमी में जीती है।

सीमा पर हमारे पांच बहादुर जवान पाकिस्तानी हमले में शहीद हो जाते हैं और प्रधानमंत्री के मुखारबिंद से एक शब्द भी नहीं झरता। देश की जनता पहली बार ऐसा कमजोर और मजबूर नेतृत्व देख रही है, जो भारत के विरुद्ध लगातार षड्यंत्र रचनेवाले पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री को शांतिपुरुष की संज्ञा से नवाजे। पाकिस्तानी खाद-पानी से भारत में फलता-फूलता आतंकवाद देश की एकता-अखंडता और आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है, पर जनता सिर्फ अपनों की लाशें गिनने को मजबूर है। उस आतंकवाद से कड़ाई से निपटने में वोट का गणित आड़े आता है, इसलिए सत्तारूढ़ नेता आतंकवादियों की पैरवी करते देखे जाते हैं।

इन्हें आतंकवादियों को दबाने के लिए की गयी मुठभेड़ फर्जी नजर आती है, इनमें प्राण गंवानेवाले जांबाज जवानों की शहादत पर उंगली उठाने में जरा भी संकोच नहीं होता। इन सबके बीच भ्रष्टाचार का ऐसा अजगर खड़ा कर दिया गया है जो देश के विकास और लोक कल्याण की संकल्पनाओं को लील रहा है। महंगाई और अभावों से त्राहि-त्राहि कर रही जनता का मजाक उड़ाने के लिए गरीबी के नित नये मानदंड सामने लाये जाते हैं, ताकि कहा जा सके कि देखो हमने गरीबी कितनी कम कर दी। आर्थिक विशेषज्ञों की सरकार न तो देश की अर्थव्यवस्था बचा पा रही है और न ही देश की मुद्रा का सम्मान।

मोदी ने हैदराबाद रैली में ये सारे मुद्दे उठा कर न केवल जनता को झकझोरा, बल्कि जनता को उनमें एक मजबूत नेतृत्व की झलक भी दिखाई दे रही है। ‘यस वी विल डू’ कहने पर भले ही उन पर ओबामा की नकल करने की तोहमत लगायी जा रही हो, लेकिन उन्होंने जनता में यह भरोसा जगाया है कि वे देश के हालात बदल सकते हैं। यह भरोसा अब भाजपा को भी मोदी में जताना होगा।

अब समय आ गया है कि भाजपा सारे किंतु-परंतु और अंतर्द्वद्वों से ऊपर उठ कर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करे, ताकि देश की जनता मोदी में राष्ट्रीय नेतृत्व की जिन संभावनाओं को देख रही है, उन्हें साकार होने का अवसर मिल सके।

 manoj jaiswal

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28 टिप्‍पणियां

  1. उत्तर
    1. पोस्ट पर कमेन्ट के लिए आभार ।

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  2. Mujhe to dikh raha hai ki modi ka bukhar tum par bhi chadh gaya hai bade taareef kar rahe ho ya to tumne modi se paisa liya hai ya phir tum RSS aur VHP Terrorist group se mile hue ho.

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    1. अपने विचार रखना या लिखना मेरा अधिकार है, आप इससे असहमत हो सकते है या सहमत यह आपका अधिकार है। आपने जो लिखा वह आपके अपने विचार हैं। मैं चाहता तो आपकी टिप्पणी प्रकाशित ही नहीं करता। आपने जल्दबाजी में एकाउंट बना कर टिप्पणी की है, जो क़ि आपकी मंशा को स्पस्ट करता है।

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  3. सत्य वचन -मानो मोदी एक ऐसी गेंद है जो जितनी ताकत से जमीन पर पटकी जायेगी, उतनी ही तेजी से ज्यादा ऊंचाई की ओर उछलेगी।
    आप के लेख में देश की आवाज साफ़ नजर आ रही है .

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    1. परितोष त्रिवेदी जी,सही कहा आपने अब अपने ही देश में अपने विचार रखना भी अपराध है क्या ? पोस्ट पर कमेन्ट के लिए आभार।

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  4. सही बात है आज की राजनीती में उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते.

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    1. अर्चना अग्रवाल जी,सही कहा आपने पोस्ट पर कमेन्ट के लिए आभार।

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  5. सत्य वचन आप के लेख में देश की आवाज साफ़ नजर आ रही है.

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    1. Subhash Gupta जी,सही कहा आपने पोस्ट पर कमेन्ट के लिए आभार।

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  6. नतीजा चाहे जो निकले, फ़िलहाल तो एक अकेले मोदी ने सबकी हालत खराब कर रखी है। आपने अच्छा विश्लेषण किया है।

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    1. संजय अनेजा जी,सही कहा आपने पोस्ट पर कमेन्ट के लिए आभार।

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  7. एक अकेले मोदी ने सबकी हालत खराब कर रखी है,आज की राजनीती में उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते.

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    1. Chintu Raj जी,सही कहा आपने पोस्ट पर कमेन्ट के लिए आभार।

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  8. कुछ मुल्ले और क्षद्म-निरपेक्ष मौकापरस्त यह बात समझें तब न ! inhen तो bas अपने वोट और धरम नजर आता है देश नहीं ! आज मुख्य मुदा यह है की चोर और भरष्ट कौंग्रेस से कैसे छुटकारा पायें बिना मुलायम और मायावती को सत्ता सौंपकर नहीं तो वे देश को भी uttarpradesh बना denge !

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    1. पी.सी.गोदियाल जी,देश में चन्द लोग ही ऐसे है। मेरा यह पोस्ट लिखने का मकसद किसी भी तरह देश उन्नति करे था। पोस्ट पर कमेन्ट के लिए आभार।

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  9. सार्थक विश्लेषण!! आभार।।

    एक बार अवश्य पढ़े : एक रहस्य का जिंदा हो जाना - शीतला सिंह

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    1. हर्षवर्धन जी, पोस्ट पर कमेन्ट के लिए आभार।

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  10. आज की राजनीती में उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते,बहुत ही सार्थक विश्लेषण, आभार।

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    1. राजेंद्र जी, पोस्ट पर कमेन्ट के लिए आभार।

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  11. आज मुख्य मुदा यह है कौंग्रेस से कैसे छुटकारा पायें.

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    1. देवेन्द्र सिंह जी, पोस्ट पर कमेन्ट के लिए आभार।

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  12. अच्छा आर्टिकल लिखा आपने, कौंग्रेस से कैसे छुटकारा पायें.

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    1. हरीश बिष्ट जी, पोस्ट पर कमेन्ट के लिए आभार।

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  13. दमदार नेता हैं मोदी .... उनको नज़र अंदाज़ करना मुश्किल होगा आज की राजनीती में ...

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  14. दमदार नेता हैं मोदी

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