सोमवार

नौकरी नहीं तो क्या प्रधानी तो है!

at 22:11

प्रकाशित किया मनोज जैसवाल 
 
नौकरी नहीं तो क्या प्रधानी तो है!
ठ्ठ नदीम, लखनऊ डिग्री हासिल करने के बाद नौकरी की तलाश। नौकरी नहीं मिली तो निराशा? नहीं..। गांवों का रुख करें तो दिखती है एक नई तस्वीर। नौजवान नौकरी न मिलने पर निराश होने के बजाय नेतृत्व संभालने की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यूपी के पिछले पंचायत चुनावों (वर्ष 2005) पर गौर करें तो 52 हजार ग्राम प्रधानों में 6 हजार ग्राम प्रधान ऐसे हैं जो स्नातक या उससे ऊपर की शैक्षिक योग्यता रखते हैं। ग्राम पंचायत सदस्यों में तो लगभग 40 हजार सदस्य ऐसे हैं जिनकी शैक्षिक योग्यता स्नातक या उससे अधिक है। यह संख्या वर्ष 1995 के चुनावों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। वर्ष 2010 के चुनावों के लिए जो नामांकन दाखिल हुए, उनके सैंपल सर्वे बताते हैं कि पढ़े-लिखे उम्मीदवारों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री रह चुके और अपनी राजनीति के शुरुआती दिनों में क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत सदस्य रहे हृदय नारायण दीक्षित स्वीकारते हैं कि एक समय वो था जब गांव का लड़का किसी यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने के बाद गांव की पालिटिक्स में नहीं पड़ना चाहता था, भले ही उसे नौकरी न मिले लेकिन अब परिदृश्य में बदलाव आया है। डिग्री के बाद नौकरी मिल गई तो ठीक वरना गांव की राजनीति में उतरने से नौजवानों को परहेज नहीं रहा। परिदृश्य में बदलाव का ही नतीजा है कि 821 ब्लाक प्रमुखों में 305 ब्लाक प्रमुख स्नातक और परास्नातक डिग्री धारक हैं। 250 से ज्यादा ज्येष्ठ उप ब्लाक प्रमुख और 170 से ज्यादा कनिष्ठ उप ब्लाक प्रमुख स्नातक/परास्नातक डिग्री रखते हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्यों में 6 हजार से ज्यादा सदस्य स्नातक/परास्नातक डिग्री वाले हैं। जिला पंचायत सदस्यों में भी 8 सौ सदस्य स्नातक या इससे अधिक शैक्षिक योग्यता रखते हैं। 70 जिला पंचायत अध्यक्षों में 26 स्नातक/परास्नातक हैं। इंटर शैक्षिक योग्यता रखने वाले पंचायत प्रतिनिधियों की संख्या भी खासी है। मौजूदा ग्राम प्रधानों में लगभग 7000 ग्राम प्रधान इंटर तक की शैक्षिक योग्यता रखने वाले हैं, जबकि 53 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायत सदस्य इंटरमीडिएट पास हैं। लगभग 9 हजार क्षेत्र पंचायत सदस्य, 400 से ज्यादा जिला पंचायत सदस्य, 136 ब्लाक प्रमुख, 164 ज्येष्ठ उप ब्लाक प्रमुख, 144 कनिष्ठ उप ब्लाक प्रमुख, 20 जिला पंचायत अध्यक्ष इंटरमीडिएट शैक्षिक योग्यता रखने वाले हैं।
मनोज जैसवाल ईमेल manojjaiswalpbt@gmailcom

2 टिप्‍पणियां

  1. लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

    जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

    मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

    भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

    अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

    थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

    http://umraquaidi.blogspot.com/

    उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
    “उम्र कैदी”

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