शुक्रवार

इस ग़रीब प्रदेश मे क्या यह जायज है ?

at 23:48
मनोज जैसवाल : आप सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार मेरी पिछिली पोस्ट टेम्पलेट में बदलाव किये बगैर twitter- उडती हुई चिड़िया का "फालो मी" बटन लगाये को अत्यधिक पसंद करने के लिए आप सभी का हार्दिक आभार। इस ग़रीब  प्रदेश मे क्या यह जायज़ है ?
अगर यॆ लॊकतन्त्र है तॊ फिर तानाशाही किसॆ कहतॆ है ? 700 करोड़ में 1000 बिस्तर का अस्पताल बनता और बचे हुए पैसे के ब्याज से गरीबो का सदा के लिए मुफ्त इलाज होता.700 करोड़ में 700000 एकड़ भूमि पर सिंचाई कि व्यवस्था की  जाती, जिस से लाखो गरीब,दलित एवं पिछड़े परिवार आजीवन लाभान्वित होते। इस ग़रीब प्रदेश में जहाँ लाखों लोगो को  दो बख्त का खाना नसीब नहीं होता वहा इस फ़िजूलखर्ची का क्या मतलब ? एक तरफ मायावती जी हमेशा छोटे छोटे खर्चो के लिए राज कोष में पैसा ना होने की बातें अक्सर करती रहती है। वहाँ इस तरह की फ़िजूल खर्ची का क्या मतलब ? आप इसे क्या कहेंगे ?
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मैं मायावती जी से नोयडा आगमन व् पार्क उद्घाटन पर यह जानना चाहता हूँ की अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आवंटित विशेष घटक योजना का पैसा पार्कों के निर्माण में क्यों लगाया गया ?छात्रव्रतियो  के लिए आवंटित पैसा पार्कों में क्यों लगाया गया ?पार्कों में पत्थर लगाने का भाव 400 /- प्रति वर्ग फिट  के स्थान पर 4000 /- प्रति वर्ग फिट  क्यों दिया गया ?भट्टा परसोल व् आसपास के भूमि अधिग्रहण के मामले में जमींदार किसान से जमीन लेकर थोडा बहुत मुआवजा दे दिया परन्तु जो परिवार उन खेतों से जुड़े सभी कार्य करके अपने परिवारों का भरण पोषण करते थे जिनमें अधिकांश दलित वर्ग से थे। उनके बारे में सूबे की दलित मुखिया नें क्यों आंखे मूँद ली ? शराब की खुदरा खरीद पर प्रति बोतल अंकित मूल्य से 30 रूपए से 40 रूपए अधिक क्यों वसूला जाता है ?बुंदेलखंड में रेती के ट्रक से 5100 रूपए वसूल कर 2100 रूपए की रसीद क्यों दी जाती है ?नरेगा योजना हेतु केंद्र से 6401 करोड़ रूपए आवंटित हुए जिसमें 10 प्रतिशत राशि प्रदेश सरकार नें मिलाकर योजना को पूर्ण करना था परन्तु अपना पैसा मिलाना तो दूर 2070 करोड़ रूपए का खर्चा अन्य मदों में खर्च क्यों कर दिया ?नेशनल क्राइम रिकोर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक दलित उत्पीडन की देश में औसतन 30 हज़ार घटनाएँ हर साल होती हैं जिसमें उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है।  उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के अनुसार वर्ष 2007 में 6768 ,2008 में 8074 ,2009 में 7541 और 2010 में 7062 मामले दलित उत्पीडन के और 2007 में 319 ,2008 में 255 ,2009 में 265 और 2010 में 235 हत्या के मामले दर्ज हुए, दलित मुखिया के होने के बावजूद ऐसा क्यों हुआ ?सरकारी विद्यालय जिनमें अधिकांश दलित छात्र पढते हैं में पांच पंखे व् पांच टियूब लाइट लगाने हेतु पैसा आवंटन के बावजूद क्यों नहीं लगाये गए ?असंगठित मजदूर सामाजिक सुरक्षा अधिनियम , 2008 के अंतर्गत पंजीकरण की प्रक्रिया क्यों नहीं शुरू की गई ?अगर इन कार्यों पर मुख्यमंत्री जी ध्यान दे दिया होता तो आपकी मूर्ति  पार्कों में नहीं लोगों के ह्रदय में वास करती ! बिडम्बना देखए मुख्यमंत्री जी जहाँ का दौरा करती है वहाँ बिजली देने के लिए पूरे प्रदेश में बिजली काट दी जाती है। पाँच साल शासन करने के बाद जब चुनाबो के चंद महीने रह जाते है तो अब चुनावी वादों का सिलसिला शुरू हो जाता है। सच्चाई तो कड़वी होती है वह तो मैने लिख दी अब चुनाव आने बाले है ही झूठे या सच्चे सरकार के लोग अपनी उपलब्धिया गा गा कर आपको बताएँगे इंतजार कीजिएगा ? 


मायावती ने किया करोड़ों के प्रोजेक्ट का लोकार्पण, देखिए तस्‍वीरें

 manojjaiswalpbt


7 टिप्‍पणियां

  1. बेहद जज्बात भरा लेख.धन्यबाद मनोज जी

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  2. शानदार ब्यंग आप इसी प्रकार का लेख लिखे सुन्दर लेख

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  3. हा हा हा .. बिलकुल ठीक लिखा आपने

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  4. आपका आई-पी लगाने वाला विजेट काम नहीं कर रहा

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  5. आइ पी बिजेट के लिए आपका आभार मैने इसे लगा भी लिया है. धन्यबाद.

    http://k-shanu.blogspot.com/

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