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मंगलवार

मसूड़ों की सूजन ( एक गंभीर समस्या )

at 13:34
मसूड़ों की सूजन एक बहुत ही आम सी समस्या है। इस का सब से आम कारण है ---मसूड़ों की सूजन । इस मसूड़ों की सूजन का सब से आम कारण है –दांतों पर टारटर का जम जाना ---जिसे अंग्रेज़ी में हम लोग डैंटल कैलकुलस कह देते हैं।

इस तस्वीर में आप देख रहे हैं कि इस लगभग 50 वर्ष की महिला में कितनी बुरी तरह से नीचे के आगे वाले दांतों को मसूड़े ने छोड़ दिया है  और यह सब हुआ इस टारटर ( दांत पर जमा मैल का पत्थर ) की वजह से ---जैसे जैसे यह बढ़ता वैसे वैसे यह मसूड़े में सूजन के साथ साथ उसे दांत से अलग भी करता है है गया।अब इस का इलाज क्या है ? यह तो तय है कि इस सारी प्रक्रिया में दांत की नीवं कमज़ोर पड़ जाती है और अकसर यह हिलना भी शुरू कर देता है। इस का इलाज इस बात पर निर्भर है कि दांत से मसूड़ा किस कद्र अलग हो चुका है ---हां, दांतों से मसूड़े के अलग होने की अवस्था को मैडीकल भाषा में कहते हैं ----जिंजिवल रिशैशन ( gingival recession).

वैसे छोटी उम्र में अगर किसी एक-दो दांतों में ही यह समस्या है तो इस टारटर को हटाने के साथ साथ एक सर्जरी जिसे जिंजिवल ग्राफ्टिंग ( gingival graft) कहते हैं इस से इस समस्या का हल निकाला जाता है। लेकिन इस तरह के इलाज को केवल प्रशिक्षित पैरियोडोंटिस्ट ( मसूड़ों के रोग के विशेषज्ञ ---जिन्होंने इस विषय में एमडीएस की होती है) से ही करवाना बेहतर होता है।

कुछ और भी कारण हैं जिस की वजह से मसूड़े दांत से पीछे हट जाते हैं –इन में से एक दो की और चर्चा करते हैं। एक और महत्वपूर्ण कारण है ---- दांतों पर गलत तरीके से ब्रुश अथवा दातुन का इस्तेमाल करना ----और इस साफ़-सफाई को इतने जोशो-खरोश से करते रहना कि आस पास का मसूड़े दांत से पीछे हट जाने में ही अपनी सलामती समझने लगते हैं।
 manoj jaiswal

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रविवार

लाय डिटेक्टर और नार्को एनालिसिस कितनी जायज और नैतिक?

at 23:56
View Image in New Window झूठ पकड़ने की मशीन यानी लाय डिटेक्टर और नार्को एनालिसिस पिछले वर्षों में काफी चर्चित रहे हैं। ये दोनों शत-प्रतिशत भरोसेमंद नहीं हैं और नार्को एनालिसिस तो कई वजहों से विवादास्पद भी है। किसी इंसान को उसकी इच्छा के खिलाफ कुछ नशीली दवाएं देकर उससे सच उगलवाने की कोशिश कितनी जायज और नैतिक है, इस पर काफी बहस हुई है। अब इस्टोनिया के दो वैज्ञानिकों ने एक दिलचस्प प्रयोग के नतीजे प्रकाशित किए हैं। उनके मुताबिक, दिमाग के अगले हिस्से के कुछ विशेष क्षेत्रों में चुंबकीय उद्दीपन से किसी इंसान की सच या झूठ बोलने की प्रवृत्ति को नियंत्रित किया जा सकता है। अगर दाहिनी तरफ चुंबकीय क्षेत्र का प्रयोग किया जाए, तो इंसान की झूठ बोलने की प्रवृत्ति कम हो जाती है, बाईं ओर चुंबक लगाएं, तो उसके झूठ बोलने की आशंका बढ़ जाती है। प्रयोगकर्ता प्रोफेसर टैलिस बाखमैन के अनुसार, इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि अगर दिमाग के कुछ हिस्सों को नष्ट कर दिया जाए, तो वह व्यक्ति झूठ नहीं बोल पाएगा। कुछ बरस पहले बनी हॉलीवुड की फिल्म ‘लायर लायर’ में वकील बने जिम कैरी का बेटा पिता की झूठ बोलने की आदत से तंग आकर ईश्वर से प्रार्थना करता है- कम से कम एक दिन के लिए उसके पिता झूठ न बोलें। भगवान उसकी इच्छा पूरी कर देते हैं और एक दिन सिर्फ सच बोलने की वजह से उस वकील के लिए क्या-क्या मुसीबतें होती हैं, इसकी दिलचस्प दास्तान फिल्म में थी। जाहिर है कि झूठ बोलने की क्षमता ही खत्म हो जाए, तो कई लागों के लिए तो रोजी-रोटी छिनने की समस्या पैदा हो जाएगी। वैसे भी झूठ बोले बिना शायद ही किसी का दुनिया में काम चलता हो। जो व्यक्ति यह कहता है कि वह कभी झूठ नहीं बोलता, ज्यादा आशंका यही है कि वह झूठ बोल
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