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बुधवार

आइये जानते है कम कीमत वाले 7 टचस्क्रीन लैपटॉप के बारेमें

at 03:55
आइये जानते है कम कीमत वाले 7 टचस्क्रीन लैपटॉप के बारेमेंयह जमाना टचस्क्रीन का है, चाहे वह मोबाइल हो या लैपटॉप। थोड़ी महंगी कीमत के बावजूद इन दिनों टचस्क्रीन लैपटॉप की बिक्री खूब हो रही है। क्या आप भी टचस्क्रीन लैपटॉप लेना चाहते हैं, लेकिन कीमत की वजह से हाथ पीछे खींच रहे हैं? हम आपको बता रहे हैं टचस्क्रीन वाले 7 ऐसे लैपटॉप, जिनकी कीमत कम है, लेकिन परफॉर्मेंस में दम है...
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मंगलवार

आइये जानते है नोकिया के कुछ नए स्मार्टफोन्स और टैबलट के बारे में

at 19:48
आइये जानते है नोकिया के कुछ नए स्मार्टफोन्स और टैबलट के बारे मेंसभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। अपने दिए गए वादे के अनुसार इस ब्लॉग पर पोस्टों का क्रम जारी रखते हुए आज की पोस्ट में मैं आपको जानकारी दे रहा हूँ। 'आइये जानते है नोकिया के कुछ नए स्मार्टफोन्स और टैबलट के बारे में''नोकिया ने दुबई के एक इवेंट में कई प्रॉडक्ट्स पेश किए। इनमें नोकिया लूमिया 2520 टैबलट, 6 इंच डिस्प्ले वाले लूमिया 1520लूमिया 1320 स्मार्टफोन और नोकिया आशा 500, 502 और 3G 503 शामिल हैं।


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बुधवार

आइये जानते है दुनिया की कुछ शीर्ष इंटरनेट कंपनियों के बारे में

at 14:34
आइये जानते है दुनिया की कुछ शीर्ष इंटरनेट कंपनियों के बारे मेंसभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार।
 तकनीक की आंधी में व्यापार की दुनिया भी आज इस तरह से बदल गयी है, जिसका अंदाजा शायद कुछ दशक पहले तक किसी ने नहीं लगाया होगा। पहले किसी भी तरह के नये कारोबार को शुरू करने के लिए जमीन से लेकर उसे बुनियादी ढांचे के निर्माण में बड़ी रकम खर्च करने के अलावा कई सरकारी एजेंसियों से एनओसी (नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) हासिल करना पड़ता था। ऐसे उद्यम या व्यवसाय की स्थापना के साथ ही उसकी संचालन लागत भी बहुत ज्यादा होती है। कारोबारी एक-एक पैसा जोड़ कर अपना कारोबार जमाते हैं, तब जाकर कई वर्षो के बाद उसे एक बड़े बिजनेस के रूप में सेट कर पाते हैं। लेकिन अब नये जमाने में यदि आपके पास बहुत पूंजी नहीं है, लेकिन आप आइडिया के धनी हैं, तो फिर महज कुछ वर्षो में ही अपना कारोबार बहुत ही बड़ा बना सकते हैं। खासकर सेवा क्षेत्र में तो कई कंपनियों ने अच्छा खासा नाम कमाया है। कंप्यूटर और इंटरनेट के कारोबार से जुड़ी कंपनियों ने तो दिन-दोगुना रात-चौगुना वाली वृद्धि दर को हासिल करते हुए दुनिया को चौंका दिया है।
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रविवार

आइये जानते है गूगल के महत्वपूर्ण बदलाव 'शेयर्ड एन्डोर्समेंट्स' के बारे में

at 00:49
आइये जानते है गूगल के महत्वपूर्ण बदलाव 'शेयर्ड एन्डोर्समेंट्स' के बारे में
सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। आज अपने इस ब्लॉग पर लगभग दो महीने के बाद पोस्ट लिख रहा हूँ। इस लम्बे इंतजार के लिए अपने इस ब्लॉग के पाठको से माफ़ी चाहता हूँ। एंव आप सभी को भरोसा देता हूँ, कि इस ब्लॉग पर मेरा लेखन नियमित रहेगा। अब बात करते हैं आज की पोस्ट के बारें में। विश्वस्त सूत्रों से यह खबर आप को दे रहा हूँ। कि अब गूगल अपनी सेवा की शर्तें बदलने वाला है। गूगल अपने सर्विस टर्म्स में बदलाव 11 नवंबर से करने वाला है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि वह आपके फोटो और नाम का इस्तेमाल विज्ञापनों में करना चाहता है। इसके लिए वह आपसे अनुरोध कर रहा है।

चलिए उसके बदलाव को विस्तृत रूप में हम बताते हैं। इसके बाद गूगल प्ले स्टोर से ली गई किसी चीज पर आपका रिव्यू विज्ञापनों में दिख सकता है। यह खासकर तब दिखेगा, जब आपके दोस्तों-परिचितों में से कोई गूगल पर सर्च करेगा। गूगल ने इसे 'शेयर्ड एन्डोर्समेंट्स' का नाम दिया है। 
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सोमवार

आइये जानते है विंडोज़ XP के कुछ विकल्प

at 22:51
आइये जानते है  विंडोज़ XP के कुछ विकल्प अप्रैल 2014 के बाद से माइक्रोसॉफ्ट अपने सफल ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज़ XP को अलविदा कह देगा। बेहतर होगा कि आप एक्सपी के विकल्पों के बारे में सोचें। 

ऑप्शन से पहले तय करें यूज़
ऐसे में आपके पास सिर्फ दो विकल्प हैं। या तो विंडोज़ एक्सपी पर काम करते रहें और अपनी सिक्यूरिटी किस्मत के भरोसे छोड़ दें या फिर किसी बेहतर ऑपरेटिंग सिस्टम को अपना लें। नए ऑपरेटिंग सिस्टम का चुनाव कई बातों पर निर्भर करेगा। सबसे अहम होगा आपका बजट और कामकाज का मौजूदा तौर-तरीका।

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रविवार

आइये जानते है पुराने स्मार्टफोन-टैबलेट को अपग्रेड करने के कुछ टिप्स

at 20:30
कुछ समय पहले खरीदा गया स्मार्टफोन या टैबलेट क्या चंद फीचर्स नहीं होने के कारण पुराना लगने लगा है? नए के लिए दोबारा से 10 से 30 हजार रुपये खर्च न करने के कारण क्या आप पुराने फीचर्स ही इस्तेमाल करने को विवश हैं? यदि आप यह जवाब हां में सोचते हैं, तो कैसे अपने पुराने गैजेट को नया बना सकते हैं, डिजिटल गैजेट्स इस्तेमाल करने वाले लोगों की अक्सर यह शिकायत होती है कि उनके स्मार्टफोन या टैबलेट में फलां फीचर मौजूद नहीं है। मिसाल के तौर पर आज भी बहुत सारे लोग अपने गैजेट में हिंदी (देवनागरी) टाइप करने की सुविधा मौजूद न होने से परेशान हैं। हालांकि उसी गैजेट के नए संस्करण में हिंदी यूनिकोड समर्थन मौजूद है। ऐसे लोगों को नया स्मार्टफोन या टैबलेट खरीदने की सलाह नहीं दी जा सकती, क्योंकि वे पिछले गैजेट की खरीद पर 10 से 30 हजार रुपए तक खर्च कर चुके होते हैं। सिर्फ कुछेक नई सुविधाओं के लिए ऐसा भारी-भरकम खर्च कोई क्यों करना चाहेगा? तो क्या ऐसे लोग पुराने संस्करण की सीमाओं में बंधे रहने के लिए हमेशा के लिए विवश हैं? आप जानते हैं कि किसी भी गैजेट को चलाने वाले सॉफ्टवेयर को ऑपरेटिंग सिस्टम कहते हैं। वह जितना सक्षम होगा, गैजेट उतना ही शक्तिशाली और उपयोगी होगा। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि उनके पुराने गैजेट में ही नया ऑपरेटिंग सिस्टम इन्स्टॉल हो जाए, अपनी सभी सुविधाओं, फीचर्स, चेहरे मोहरे और क्षमताओं के साथ? यानी पुराना फोन बन जाए नया और ट्रेंडी? बिना कुछ खर्च किए! पुराने एंड्रॉयड फोन (एंड्रोयड 2.2 फ्रोयो और उससे पहले) में हिंदी का समर्थन मौजूद नहीं था। क्या उस फोन में एंड्रॉयड का ताजातरीन संस्करण (4. 2 जेली बीन) इन्स्टॉल नहीं हो सकता, जिसमें हिंदी बड़े आराम से काम करती है? ऐसा हो तो हिंदी ही क्यों, बेचारे उपयोक्ता दर्जनों नए फीचर्स इस्तेमाल कर सकेंगे। सौभाग्य से हैंडहेल्ड गैजेट्स को संचालित करने वाले गूगल एंड्रॉयड व एपल आईओएस ऑपरेटिंग सिस्टमों को अपग्रेड करना संभव है।

एंड्रॉयड (टैबलेट, स्मार्टफोन के लिए)

अगर आपके स्मार्टफोन या टैबलेट में मौजूद एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम ‘ओवर द एयर’ अपग्रेड सुविधा  से  अपग्रेड नहीं हो रहा, तो उसे मैनुअली अपग्रेड कर सकते हैं।  सबसे नया एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम 4. 2 (जेली बीन) है। अपग्रेडेशन से पहले गैजेट में मौजूद सभी जरूरी डाटा का बैकअप ले लेना चाहिए। हालांकि अपग्रेड में आपका डाटा डिलीट नहीं होता, पर सावधानी बरतने में बुराई नहीं है।
1. यह देख लें कि गैजेट इंटरनेट से कनेक्टेड है।
2. ‘सेटिंग्स’ आइकन/मेन्यू पर क्लिक करें।
3. खुलने वाले मेन्यू में  ‘अबाउट  फोन’ या ‘अबाउट टैबलेट’ पर क्लिक करें।
4. यहां ‘सॉफ्टवेयर अपडेट’ या  ‘सिस्टम अपडेट’ पर क्लिक करें।
5. आपका गैजेट इंटरनेट पर मौजूद अपडेट की खोज शुरू कर देगा। अगर अपग्रेड की पुष्टि के बारे में पूछा जाए तो कर दें।
6. अपग्रेड उपलब्ध होने पर ऑपरेटिंग सिस्टम का नया संस्करण इन्स्टॉल करने के लिए आपकी मंजूरी ली जाएगी।
7. आपके हां कहने पर नया वर्जन डाउनलोड और इन्स्टॉल हो जाएगा। गैजेट बंद होकर नए रंग-रूप और ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ चालू होगा।

आई-ओएस (आई-पैड, आई-फोन के लिए)

आई-पैड और आई-फोन को एपल का आई-ओएस (ड्रर) नामक ऑपरेटिंग सिस्टम संचालित करता है। आई-ओएस 5 और उसके बाद के संस्करणों को इंटरनेट की मदद से ताजा ऑपरेटिंग सिस्टम में अपग्रेड करना संभव है। आई-ओएस का ताजातरीन संस्करण 6.1 है। अपने एपल गैजेट को नए ऑपरेटिंग सिस्टम से लैस करने के लिए यह प्रक्रिया आजमाएं।
1. सेटिंग्स पर क्लिक करें और उसके बाद ‘जनरल’ पर।
2. अब सॉफ्टवेयर अपडेट पर क्लिक करें, जिसके बाद सिस्टम आपके लिए उपलब्ध अपग्रेड की तलाश शुरू कर देगा।
3. अगर अपग्रेड उपलब्ध है तो आपको बताया जाएगा।
4. ‘डाउनलोड’ बटन दबाने पर नया संस्करण डाउनलोड होने लगेगा।
5. डाउनलोड  के बाद दिखने वाले बॉक्स में ‘इन्स्टॉल’ बटन दबाएं।
6. इन्स्टॉलेशन पूरा होने के बाद सिस्टम रीस्टार्ट होगा और लौटेगा एकदम नई-नवेली स्क्रीन के साथ।
एहतियात: बेहतर होगा कि अपने गैजेट को अपग्रेड करने की प्रक्रिया के दौरान वाई-फाई इंटरनेट कनेक्टिविटी का इस्तेमाल करें। इससे आपकी डाटा सर्विस का बिल सीमित रहेगा।

ब्लैकबेरी (स्मार्टफोन)

ब्लैकबेरी गैजेट को नए ब्लैकबेरी ऑपरेटिंग सिस्टम में अपग्रेड करने के लिए कंप्यूटर की मदद लेना बेहतर है। हालांकि आप चाहें तो स्मार्टफोन की अपनी Over The Air अपडेट सुविधा का भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए Home स्क्रीन पर  Options पर क्लिक करने के बाद Device और फिर   Software Updates विकल्प का प्रयोग करें। इसके लिए स्मार्टफोन में इंटरनेट कनेक्टिविटी मौजूद होनी चाहिए।
कंप्यूटर के जरिए अपग्रेड करने की प्रक्रिया इस तरह है-
1. पहले  कंप्यूटर में रिसर्च इन मोशन (ब्लैकबेरी का विकास करने वाली कंपनी) की वेबसाइट  us.blackberry.com पर जाकर नए ब्लैकबेरी ऑपरेटिंग सिस्टम की फाइल डाउनलोड करें।
2. साइट के होमपेज पर  ऊपर नेवीगेशन मेन्यू में सॉफ्टवेयर  लिंक पर क्लिक करें। खुलने वाले मेन्यू बॉक्स में Smartphone Software के नीचे नए ब्लैकबेरी ऑपरेटिंग सिस्टम की सूची दिखाई देगी। यहां पसंद के सॉफ्टवेयर पर क्लिक करें। याद रखें, Blackberry 7 या उससे नीचे के सॉफ्टवेयर वाले स्मार्टफोन में Blackberry 10 OS इन्स्टॉल नहीं होता है। दोनों पूरी तरह अलग हैं।
3.  पसंदीदा ब्लैकबेरी ऑपरेटिंग सिस्टम पर क्लिक करने के बाद जो पेज खुलेगा, उसमें Update your Blackberry Software दिखाई देगा। इसे क्लिक करें। खुलने वाले पेज में आपके मौजूदा स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम का पता लगाने की भी सुविधा है। इसी पेज पर Update on the Web नामक खंड में जाकर Check For Updates बटन दबाएं।
4. आपके स्मार्टफोन को जांचने और उसके अनुकूल एडवांस्ड ब्लैकबेरी सॉफ्टवेयर मौजूद होने पर डाउनलोड होना शुरू हो जाएगा।
5. यदि नया ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध है तो वह डाउनलोड होने लगेगा और ब्लैकबेरी स्मार्टफोन के अपग्रेड होने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस प्रक्रिया के दौरान स्मार्टफोन रीस्टार्ट हो सकता है।
6. प्रक्रिया खत्म होने पर आपके ब्लैकबेरी स्मार्टफोन का ऑपरेटिंग सिस्टम बदल जाएगा। हाजिर है एकदम नया और अपडेटेड संस्करण। स्मार्टफोन के किसी फीचर में आई समस्या दूर करने के लिए भी अपग्रेड सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है।

 मनोज जैसवाल

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गुरुवार

अब पाइये गूगल स्मार्टफोन 2700 रुपये में

at 18:14
सबसे बड़ा सर्च इंजन गूगल जल्द ही अपना स्मार्टफोन पेश करने वाला है। इस बारे में गूगल के एक्जक्यूटिव चेयरमैन ने बताया कि गूगल फोन सस्ता और कई आकर्षक फीचर्स वाला होगा।

गूगल के एक्जक्यूटिव चेयरमैन एरिक श्मिट ने बताया कि गूगल ने स्मार्टफोन 'एक्स फोन' को मोटोरोला के साथ मिलकर तैयार किया है। एक्स फोन देखने में आकर्षक और कई फीचर्स वाला है।

पिछले कुछ महीनों से गूगल फोन के बारे में तेजी से चर्चा चल रही है, मोबाइल कांफ्रेंस में दिए अपने इस बयान के बाद श्मिट ने अटकलों से विराम लगा दिया है।

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मंगलवार

वाकई काम की है फ्लिपबोर्ड एप्लीकेशन

at 10:20
गूगल प्ले पर यूं तो एप्लीकेशंस की भरमार है, लेकिन ऐसा कम ही होता है कि आपको उपयोगी एप्लीकेशन आसानी से मिल जाए। अगर आपको अपने इस्तेमाल की एप्लीकेशन चाहिए तो फिर पैसे चुकाने पड़ते हैं। यह भी जरूरी नहीं कि पेड एप्लीकेशन आपके वाकई काम की हो। लेकिन आईओएस की पॉपुलर एप्लीकेशन फ्लिपबोर्ड को एंड्रॉयड ओएस यूजर के लिए गूगल प्ले पर पेश किया गया है। यह मुफ्त होने के साथ-साथ आपके काम की भी हो सकती है। फ्लिपबोर्ड ऐसा बोर्ड है, जिस पर आप अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार ऑनलाइन चीजों को मैगजीन के रूप में पढ़ सकते हैं। अगर आपकी दिलचस्पी तकनीकी, ज्ञान-विज्ञान, खाने-पीने, घूमने-फिरने में है तो फ्लिपबोर्ड आपको इन विषयों पर ढेर सारी अपडेट देने का काम करता है। देश-विदेश में होने वाली हलचल की जानकारी भी मिलती है। इस एप्लीकेशन के जरिए आपको यह भी पता चलता है कि प्रतिष्ठित लोग सोशल नेटवर्किंग साइट पर क्या कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, किसी खास फीचर के बारे में लोगों की क्या राय है, यह भी आप जान सकते हैं। इसके अलावा किसी भी चीज को पढ़ने के बाद आप उसको फेसबुक, ट्विटर, लिंक्ड इन और यू ट्यूब पर शेयर भी कर सकते हैं।
खास बात यह है कि यदि आपके पास किसी लेख को पढ़ने का समय नहीं है तो उसको इंस्टापेपर, पॉकेट और रीडएबिलिटी में जाकर सुरक्षित कर सकते हैं और जब चाहें तब खोलकर पढ़ सकते हैं। इस एप्स की कमी यह है कि यह एप्लीकेशन मोबाइल फोन को सपोर्ट करती है। टैबलेट पीसी के लिए यह अभी तैयार नहीं है। किसी भी चीज को पढ़ने के लिए आपका ऑनलाइन रहना जरूरी है। फ्लिपबोर्ड को आप गूगल प्ले से फ्री डाउनलोड कर सकते हैं।

  Manoj jaiswal

मेरे तकनीकी लेख यहाँ हैं.
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शुक्रवार

गूगल ब्लॉगर पर नयी सुविधा शुरू,अब आप किसी टिप्पणी पर अपनी राय विकल्प पर क्लिक कर दे सकते हैं

at 21:19
मनोज जैसवाल : गूगल ब्लॉगर पर नयी सुविधा शुरू  टिप्पणियों को जवाब देने की सुविधा जो वर्डप्रेस में थी अब ब्लॉगर  पर भी उपलब्ध है यानि अब आप किसी टिप्पणी पर अपनी राय Reply विकल्प पर क्लिक कर दे सकते हैं।


अगर आप ब्लॉगर  का मूल टेम्पलेट उपयोग कर रहे हैं तो संभव है ये सुविधा पहले से आपके ब्लॉग में शुरू हो गयी हो अगर नहीं तो इस सुविधा के लिए आपके ब्लॉग पर दो सेटिंग का होना जरुरी है ।
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सोमवार

कुछ सावधानी : अपने कंप्यूटर को धीमा पड़ने से बचाएं !

at 14:44
मनोज जैसवाल : कितना भी नया, आधुनिक, ब्रैंडेड और महंगा हो, कंप्यूटर कुछ महीनों बाद धीमा हो ही जाता है। आप उसकी हार्ड डिस्क दोबारा फॉरमैट करके देखते हैं, विंडोज को दोबारा इंस्टॉल करते हैं और वह फिर से रफ्तार पकड़ने लगता है। मगर दो-तीन महीने गुजरे नहीं कि फिर वही कहानी। लेकिन कुछ सावधानी बरतकर आप अपने कंप्यूटर की रफ्तार बरकरार रख सकते हैं।आम राय यह है कि कंप्यूटर तो धीमा पड़ेगा ही पड़ेगा क्योंकि कंपनियां उन्हें बनाती ही इस तरह हैं कि वे धीमे पड़ जाएं। ऐसा न हो तो लोग नए कंप्यूटर कैसे खरीदेंगे? इस बात में सचाई नहीं है। आम तौर पर कोई कंप्यूटर कंपनी अपने उत्पादों की कार्यक्षमता नहीं घटा सकती। तकनीकी आधार पर भी और कारोबारी कारणों से भी (गारंटी के दौरान उन्हें बदलना ज्यादा महंगा पड़ेगा)। यूं तो उम्र बीतने के साथ-साथ मशीनों की कपैसिटी में भी थोड़ी कमी आती है लेकिन अगर खरीदने के छह महीने के भीतर ही कंप्यूटर धीमा पड़ जाए तो गलती कहीं-न-कहीं यूजर्स की भी है।

कंप्यूटरों के धीमा पड़ने के आम कारणों में बहुत ज्यादा सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना और बड़ी संख्या में टेंपरेरी फाइलों या सिस्टम फाइलों का हार्ड डिस्क में जमा हो जाना है। ये फाइलें सॉफ्टवेयरों के इन्स्टॉलेशन या इस्तेमाल के साथ-साथ इंटरनेट सर्फिंग के कारण भी बन जाती हैं। वायरसों, स्पाईवेयर, एडवेयर जैसे घातक ऐप्लिकेशंस और मैलवेयर भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। सासर जैसे वायरस तो उन्हें इतना धीमा कर सकते हैं कि आप माउस तक न हिला पाएं। हार्ड डिस्क संबधी गड़बडि़यां भी काम की स्पीड घटा देती हैं। अगर आप अपने कंप्यूटर को बरसों बरस तेज बनाए रखना चाहते हैं तो आपको इन बातों का खास खयाल रखना चाहिए :

1. अपने आप बनने वाली टेंपररी फाइलों (टेम्प) को पूरे कंप्यूटर में सर्च कर डिलीट कर दें। इसके लिए आप आगे बताए गए स्टेप्स को फॉलो करें :
Internet explorer-Tools-Brousing history-Delete .

2. अगर रिसाइकिल बिन भरा पड़ा है तो उसे खाली कर लें।

3. नॉर्टन, मैकेफी, कैस्परस्की, एवीजी (मुफ्त भी उपलब्ध), ट्रेंड माइक्रो जैसा कोई अच्छा ऐंटि- वायरस सॉफ्टवेयर इन्स्टॉल करें और अपने कंप्यूटर को वायरसों से मुक्त रखें। इसी तरह स्पाईवेयर हटाने के लिए 'स्पाईवेयर सर्च ऐंड डिस्ट्रॉय' सॉफ्टवेयर का प्रयोग करें।

4. हार्ड डिस्क में मौजूद डेटा को सिलसिलेवार ढंग से जमा करने (डीफ्रैगमेन्ट) के लिए आप इन स्टेप्स को फॉलो करें :
My computer-Local disk-Right click-Properties-Tools-Defragment now.

5. हार्ड डिस्क बहुत भर गई है तो गैरजरूरी फाइलों को हटाकर उसमें कम-से-कम एक चौथाई जगह खाली रखें।

6. कंट्रोल पैनल में जाकर Add-remove programs सुविधा के जरिए ऐसे सभी सॉफ्टवेयरों को हटा दें जिनकी जरूरत अब नहीं है। बहुत ही कम इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर को भी हटा सकते हैं और जब जरूरत हो दोबारा इन्स्टॉल कर सकते हैं।

7. कंप्यूटर में सभी सॉफ्टवेयरों से संबंधित सूचना एक जगह पर दर्ज होता है, जिसे रजिस्ट्री कहते हैं। रजिस्ट्री को साफ करने के लिए किसी फ्रीवेयर रजिस्ट्री क्लीनर का प्रयोग करें ताकि वहां हटाए गए सॉफ्टवेयरों का गैरजरूरी डेटा न पड़ा रहे।

8. अगर कंप्यूटर में रैम कम है तो उसे बढ़वा लें। एक जीबी रैम अच्छी मानी जाती है, लेकिन अगर आप ज्यादा संसाधनों का प्रयोग करने वाले सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करते हैं तो इसे दो जीबी करवा लें।

9. अपने कंप्यूटर में वर्चुअल मेमरी की सेटिंग देखें। इसके लिए कंट्रोल पैनल में System–advanced–performance–settings–virtual memory पर जाएं। चेंज बटन दबाकर वर्चुअल मेमरी का आकार बढ़ा दें। वर्चुअल मेमरी का प्रयोग रैम के पूरी तरह इस्तेमाल हो जाने पर विकल्प के रूप में किया जाता है।

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1 0 . फॉन्ट्स की संख्या सीमित रखें। कई सौ फॉन्ट रखने से सिस्टम का धीमा पड़ना तय है।

12. स्टार्ट अप श्रेणी में बाय डिफॉल्ट शुरू होने वाले सॉफ्टवेयरों की संख्या बहुत सीमित कर दें। इसके लिए कंट्रोल पैनल, टास्कबार ऐंड स्टार्ट मेन्यू कस्टमाइज विकल्पों का प्रयोग करें।

13. अगर आपकी विंडोज की ग्राफिक्स सेटिंग बहुत जयादा है तो उसे थोड़ा कम करके देखें। कंप्यूटर के डेस्कटॉप पर माउस का राइट क्लिक करने पर डिस्प्ले प्रॉपटीर्ज दिखाई देती हैं। इसमें सेटिंग्स टैब पर जाएं और कलर क्वॉलिटी थोड़ी कम (32 बिट से घटाकर 16 बिट) करके देखें।

14. हो सकता है कि आपके कंप्यूटर में इन्स्टाल किए गए डिवाइस ड्राइवर (हर हार्डवेयर के संचालन के लिए कंप्यूटर में उससे जुड़े एक सॉफ्टवेयर को इन्स्टाल करना पड़ता है जिसे डिवाइस ड्राइवर कहते हैं) विंडोज के वर्जन के अनुकूल न हों। यदि आपको किसी हार्डवेयर के बारे में ऐसा शक है तो उसे बनाने वाली कंपनी की वेबसाइट पर जाकर ताजा डिवाइस ड्राइवर डाउनलोड कर इन्स्टॉल कर लें।

कंप्यूटर के धीमे पड़ने की ज्यादातर समस्याएं इन तरीकों से हल हो जानी चाहिए। अगर आपका कंप्यूटर फिर भी धीमा ही रहता है तो आपको किसी विशेषज्ञ की सीधी मदद लेने की जरूरत है।


 manojjaiswalpbt
 
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बुधवार

साढ़े छह टन का एक सैटलाइट इसी हफ्ते धरती से टकरा सकता है !!!!

at 22:37
View Image in New Window मनोज जैसवाल : अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने चेतावनी दी है कि साढ़े छह टन का एक सैटलाइट इसी हफ्ते धरती से टकरा सकता है। पिछले 20 सालों से धरती का चक्कर लगा रहा यह सैटलाइट अब बेकार हो चुका है और धरती की तरफ बढ़ रहा है।


बस जितना बड़ा है सैटलाइट
इस सैटलाइट का नाम अपर एटमॉसफियर रिसर्च सैटलाइट (यूएआरएस) है। 35 फुट लंबा और 15 फुट चौड़ा यह सैटलाइट किसी बस जितना बड़ा है। वैसे तो अंतरिक्ष से अक्सर बाहरी चीजें धरती की तरफ आती रहती हैं लेकिन पृथ्वी के वातावरण में घर्षण से जलकर नष्ट हो जाती हैं। लेकिन यह सैटलाइट काफी बड़ा है इसलिए इसके पृथ्वी से टकराने की आशंका है। फिर भी यह किसी व्यक्ति को नुकसान पहुचाएंगा, इसकी आशंका 3200 में से सिर्फ एक ही है।


26 टुकड़े गिरेंगे धरती पर
इस सैटलाइट के करीब 26 बड़े टुकड़े धरती के वायुमंडल को चीरकर सतह तक पहुंच सकते हैं। यह कब गिरेगा, इसका सही अनुमान अभी नहीं लग पाया है। लेकिन नासा के साइंटिस्टों का कहना है कि यह इसी शुक्रवार को या उसके एक-दो दिन आगे-पीछे पृथ्वी पर गिर सकता है। सही वक्त का अंदाजा इसके धरती के वायुमंडल में घुसने से करीब दो घंटे पहले लग सकेगा।

भारत भी निशाने पर
अभी यह पता नहीं चला है कि ये टुकडे़ कहां गिर सकते हैं। लेकिन नासा ने ,,,
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शुक्रवार

हिंदी इंपुट 2 - विंडोज़ 7 हिंदी उपकरण : हिंदी लिखना सरल

at 18:30


यदि आप अभी तक विंडोज़ एक्स.पी. (Windows XP) पर काम कर रहे हैं तो आप कैफ़े हिंदी (Cafe Hindi) या आइ.एम.ई. (IME) का प्रयोग कर रहे होंगे। कैफ़े हिंदी (Cafe Hindi) और आइ.एम.ई. (IME) दोनों ही विंडोज़ 7 (WINDOWS 7) पर काम नहीं करते हैं। इससे बहुत से पाठक आनलाइन हिंदी लिखने की सुविधाओं का प्रयोग कर रहे हैं और जब आफ़लाइन लिखना हो तो उन्हें बहुत कठिनाई होती है। इसी को देखते हुए भाषा माइक्रोसाफ़्ट ने हिंदी इंपुट 2 (HINDI INPUT 2) का विकास किया है और यह विंडोज़ 7 32-बिट (x86) और 64-बिट (x64) दोनों के लिए उपलब्ध है।

यह किस प्रकार आपके कम्प्यूटर पर दिखेगा। एक स्क्रीन शाट:
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इसे आप निम्न दिये गये लिंक से सरलता से डाउनलोड कर सकते हैं। यह अन्य भारतीय भाषाओं (असमी, बंगाली, गुजराती, कन्नड, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, तमिल, तेलगु, पंजाबी) के लिए भी उपलब्ध है।

अभी तुरंत डाउनलोड करें:
http://bhashaindia.com/Downloads/Pages/home.aspx


मनोज जैसवाल [ manojjaiswalpbt ] 
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अब गूगल ने नए बदलाब शुरू किये हिंदी ब्लॉगगर परेशान

at 18:24
मनोज जैसवाल
आज शाम जब मैने अपना ब्लॉग खोला तो सारा नज़ारा ही बदला हुआ था.क्या हिंदी ब्लॉग हो या अंग्रेजी ब्लॉग सारा सेटअप ही दूसरा नजर आया ऐसा लगा ब्लॉगर पर नही वर्डप्रेस पर हुं.

गूगल ब्लॉगर का बदला हुआ रंग

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गूगल ब्लॉगर के गूगल+ में शामिल होने व उसके नाम में परिवर्तन की अफ़वाहों के बीच एक बड़ा परिवर्तन आज नुमाया   हुआ..
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इसका साफ़ सुथरा रूप सचमुच अच्छा लगा और इस्तेमाल में आसान और तेज है. इसका नया ऑनलाइन एडिटर भी बढ़िया है.
हो सकता है कि नए री डिजाइन ब्लॉग में अतिरिक्त सुविधाएँ भी मिलें. एक बड़ी सुविधा की मांग बहुत समय से है - डिस्कशन स्टाइल में कमेंटिंग सिस्टम. देखते हैं यह कब मिलता है.
बस, एक समस्या है. सेटिंग में हिंदी रखे रहने के बावजूद अभी हिंदी यू आई ग़ायब है और उसे वापस लाने के लिए जुगाड़ नहीं दिख रहा. शायद कुछ दिनों में यह भी आए फ़िलहाल हिंदी में लिखने का दूसरा जुगाड़ लगा ले.


इंटर फ़ेस के कुछ लिंक काम नहीं कर रहे, व कुछ लिंक गलत प्वाइंट कर रहे हैं.
लगता है कुछ दिन समस्या बनी रहेगी.कुल मिला कर हम ब्लॉग स्पाट वालो के लिए अच्छी खबर है.
manojjaiswalpbt@GMail.com

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गुरुवार

अब फेसबुक ने गूगल को टक्‍कर देने के लिये शुरु की वीडियो चैटिंग

at 17:32
मनोज जैसवाल  :अपनी पिछली पोस्ट में बताया था वीडियो चैट शुरू करेगी फेसबुक, स्काईपे अब फेसबुक ने गूगल को टक्‍कर देने के लिये वीडियो चैटिंग की सुबिधा शुरु कर दी है। जी हां अब आप अपने दोस्‍तों से फैसबुक पर चैटिंग के दौरान उन्‍हें देख भी पाएगें। कुछ समय पूर्व ही गूगल ने सोशल नेटवर्क वेबसाइट फेसबुक को चुनौती देने के लिये गूगल प्‍लस नामक वेबसाइट लॉन्‍च करने की घोषणा की थी। बस इस चुनौती को स्‍वीकार करते हुए फेसबुक ने गूगल को टक्‍कर देने के लिये वीडियो चैटिंग की सुबिधा शुरु कर दी है। जी हां अब आप अपने दोस्‍तों से फैसबुक पर चैटिंग के दौरान उन्‍हें देख भी पाएगें। मालूम हो कि फेसबुक के 75 करोड यूजर है और वह अब वीडियो कॉल कर सकेंगे। अपने यूजर्स को यह सुबिधा देने के लिए फेसबुक ने स्‍काइप से समझौता किया है।

मालूम हो कि फेसबुक को टक्‍कर देने के लिए दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट की तरह ही गूगल भी 'गूगल प्‍लस' नाम से सोशल नेटवर्किंग साइट शुरू करेगा। इसकी जानकारी देते हुए गूगल इंजीनियरिंग के उपाध्‍यक्ष विक गुंदोतरा ने बताया था कि साइट को लेकर काम शुरू हो चुका है। जल्‍द ही इसको लांच करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

गूगल अधिकारियों का कहना है कि इस साइट में ऐसी बा‍रीकियों पर विशेष गौर किया जाएगा जिसमें लोगों की प्राइवेट कमेंट और फोटो को कोई दूसरा न देख सके। इसमें छोटे समूहों के बारे में भी गौर किया गया है। अगर लोग आपस में कुछ जानकारियां शेयर करते हैं तो उन्‍हें इस साइट में गुप्‍त रखा जा सकेगा।


कैसे करे फेसबुक पर वीडियो चैटिंग

आपको बताते चलें कि स्‍काइप का इस्‍तमाल इंटरनेट के माध्‍यम से कॉल करने में किया जाता है। स्‍काइप की इस सुबिधा को प्रयोग में लाने के लिये आपके मित्र के पास वेबकैम होना जरुरी है। इसके बाद आपको अपने उस दोस्‍त को चुनना है जिससे आपको बात करनी है। अभी आप सिर्फ एक ही शख्‍स से बात कर सकेंगे। इसी जगह फेसबुक गूगल प्‍लस से मात खा जाता है।

दरअसल, गूगल प्‍लस में एक बार में कई लोगों से बात की जा सकेगी। हां, फेसबुक में इस तरह का फीचर बाद में आ सकता है। बाजार पर नजर रखने वाले लोग फेसबुक और स्‍काइप के इस समझौते में माइक्रोसॉफ्ट का फायदा देख रहे हैं, क्‍योंकि माइक्रोसॉफ्ट साल के आखिर तक स्‍काइप को खरीद लेगी। माइक्रोसॉफ्ट के पास फेसबुक में पहले ही कुछ हिस्‍सा है।


manojjaiswalpbt@GMail.com

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शुक्रवार

मोटर साईकिल से कम खर्च में कार चलाइए कार

at 03:31
मनोज जैसवाल : दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच ज्यादा से ज्यादा माइलेज देने वाली कारों की मांग बढ़ गई है। ऐसे में कार बनाने वाली कंपनियां भी ऐसी कारें बनाने पर जोर दे रही हैं जो बेहतर माइलेज दे सकें। ऐसी ही एक कार तैयार की है यूरोप की जानी मानी कार निर्माता कंपनी फोक्सवैगन ने। इसका नाम है फोक्सवैगन ‘एक्सएल 1’ । आपको बता दें कि यह एक डीजल-इलेक्ट्रीक हाइब्रिड कार है जो 1 लीटर से भी कम डीजल (0.91 लीटर) में 100 किलोमीटर की दूरी तय कर लेती है।
यानि मोटर साईकिल से कम खर्च में कार चलाइए( माइलेज में )

कंपनी ने अपनी इस कार को इसी साल कतर में हुए ऑटो शो में शो-केस किया था। कंपनी की तरफ से बताया गया है कि साल 2013 में जर्मनी और ब्रिटेन के बाजारों के लिए सीमित संख्या में इसका कमर्शियल प्रोडक्शन किया जाएगा। और अगर लोगों को यह कार पसंद आती है तो अन्य देशों के लिए भी इसका प्रोडक्शन किया जाएगा।


अनुमान लगाया जा रहा है कि इस कार की कीमत 22 लाख रुपए के आस पास हो सकती है। आपको यह भी बता दें कि इस कार में केवल दो लोगों के बैठने के लिए ही जगह है। यह कार मात्र 11.9 सेकेंड में ही 62 मील प्रति धंटे की रफ्तार पकड़ लेती है। इस कार को तैयार करने के लिए कंपनी ने काफी हल्के मटिरियल का इसका इस्तेमाल किया है जिसके चलते इसका वजन सिर्फ 795 किलोग्राम है।

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सोमवार

इंटरनेट पर दिखने वाली वेबसाइटों के पतों को एक नया रूप

at 14:14

मनोज जैसवाल : इंटरनेट पर डॉट काम और डॉट जीओवी जैसे नाम वाली वेबसाइटों का दौर अब बीते जमाने की बात हो जाएगी, क्योंकि इसकी जगह अलग और दिलचस्प नाम जैसे गुड डॉट फूड, लरनोटो डॉट साल्सा या फिर ग्लासी डॉट लिपस्टिक आ जाएंगे।
ज्यादातर लोगों के लिए इंटरनेट का मतलब होता है डॉटकॉम। इसीलिए जब इंटरनेट काफी तेजी से दुनिया भर में पहुंचा, तो उसे डॉटकॉम क्रांति कहा गया। हालांकि इस दौरान इंटरनेट वेबसाइट के जो पते हमारी जुबान पर चढ़े, वे सब डॉटकॉम नहीं थे, उनमें से कुछ डॉटनेट थे, कुछ डॉटओआरजी थे और कुछ डॉटजीओवी भी। हर वेबसाइट की अपनी-अपनी खासियतों के अलावा इन सबकी एक खूबी समान थी कि इनमें आपके सारे अनुरोध, सारे आंकड़े, सारी बातचीत, सारी चिट्ठी-पत्री अमेरिका में रखे सर्वरों के जरिये ही आती -जाती थी। बहुत हद तक अब भी ऐसा ही होता है। किसी दफ्तर में बैठा कोई कर्मचारी जब अपने ठीक सामने बैठे सहयोगी को ई-मेल भेजता है, तो वह वाया अमेरिका ही उसके पास पहुंचता है। लेकिन जब इंटरनेट की क्रांति हुई, तो इसे स्वीकार करने के अलावा हमारे पास कोई और चारा भी नहीं था। उस समय नई दिल्ली ही नहीं, सिंगापुर और हांगकांग जैसे एशिया के आधुनिक शहरों के पास भी इसका वह इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं था, जो कैलीफोर्निया और अमेरिका के दूसरे शहरों में मौजूद था। तब अपनी वेबसाइट बनवाने के लिए उसका पता यानी यूआरएल अमेरिका में रजिस्टर करवाना पड़ता था और इसकी फीस भी अमेरिका के हवाले हो जाती थी। बाद में जब पूरी दुनिया में इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हुआ, तो यह सूरत भी बदलने लगी। सभी देशों ने अपने-अपने यूआरएल हासिल करने शुरू किए। भारत में डॉटइन, पाकिस्तान के लिए डॉटपीके, ब्रिटेन के लिए डॉटयूके शुरू हुआ।

अमेरिका का एकाधिकार तो खत्म हो गया, लेकिन यह नई व्यवस्था दुनिया की भू-राजनीति से आगे नहीं जा सकी। इंटरनेट दुनिया को एक बनाने की सबसे बड़ी संभावना माना जाता है, लेकिन इसके पते मुल्क की सीमाओं में सिमटकर रह गए। हालांकि इस माध्यम के पास इससे कहीं आगे जाने की संभावना थी। इसने कुछ हद तक इंटरनेट की संभावनाओं को ही रोक दिया। कहां तो हम ऐसी व्यवस्था की कल्पना तक करने लग गए थे, जब हर व्यक्ति, यहां तक कि दुनिया के हर जीव-जंतु तक की अपनी एक वेबसाइट होगी। लेकिन हमने इसके लिए ऐसी सड़क बनाई, जो एक जगह जाकर रुक जाती थी। एक दिक्कत यह भी थी कि ये सारे पते अंग्रेजी या रोमन लिपि में ही उपलब्ध थे। अच्छी बात यह है कि अब इन संभावनाओं के दरवाजे खुलने शुरू हो गए हैं।
इंटरनेट के यूआरएल का प्रबंधन देखने वाली संस्था द इंटरनेट कॉरपोरेशन फॉर एसाइंड नेम्स ऐंड नंबर्स ने तय किया है कि ये सीमाएं अब हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी। अब नए पते किसी भी तरह के हो सकते हैं। मसलन वे डॉटबैंक भी हो सकते हैं, डॉटसिनेमा भी, डॉटदिल्ली भी और डॉटझुमरीतलैया भी। या आप चाहें, तो यूआरएल में डॉट के बाद अपना नाम भी जुड़वा सकते हैं। बस इसके लिए आपको शुरू में आवेदन पत्र के साथ दो लाख डॉलर जरूर खर्च करने पड़ेंगे। और हां, एक महत्वपूर्ण फैसला यह भी हुआ है कि अब ये यूआरएल किसी भी भाषा में हो सकते हैं, हिंदी, तमिल या नेपाली किसी में भी। यूरोपीय भाषाओं के अलावा अन्य भाषाओं के साथ शुरू में एक ही भाषा के अलग-अलग तरह के की-बोर्ड की जो समस्या थी, उसे यूनीकोड तकनीक ने पहले ही हल कर दिया है।
वैश्विक इंटरनेट डोमेन सेवा नियामक इंटरनेट कॉर्पोरेशन एसाइन्ड नेम्स एंड नंबर्स (आईसीएएन) ने वेबसाइटों के लिए इंटरनेट पर नाम आवंटित करने की प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव का फैसला किया है।
नई प्रणाली में कंपनियां और सरकारी संगठन अपनी वेबसाइट के नाम के साथ डॉट कॉम और डॉट जीओवी लिखने की बाध्यता से मुक्त हो जाएंगे और इसकी बजाय अपनी पसंद के मुताबिक कोई भी नाम जैसे एप्पल या ऑरेंज कुछ भी लिख सकेंगे। आईसीएएन के निदेशक मंडल की सोमवार को सिंगापुर में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।

एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह होगा कि रूसी, चीनी और हिन्दी भाषा में डोमेन पते इन भाषाओं की लिपियों में भी सिरिलिक, कांजी और देवनागरी में उपलब्ध होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि डोमेन पतों में बदलाव का आवेदन करने वालों में कंपनियां और शहरी निकाय सबसे आगे होंगे।

उदाहरण के तौर पर कार कंपनी टोयोटा अपनी वेबसाइट के नाम के साथ डॉट टोयोटा और न्यूयार्क शहर की महानगर पालिका अपने वेबसाइट के साथ डॉट न्यूयार्क जैसे शब्दों का प्रयोग करना पसंद कर सकती है
संगठन के अध्यक्ष रॉड बेकस्ट्राम ने बैठक के बाद कहा- अब एक इतिहास रचा गया है। यह एक नए युग की शुरुआत है। नई प्रणाली से इंटरनेट पर दिखने वाली वेबसाइटों के पतों को एक नया रूप मिलेगा, जिससे सभी को फायदा होगा। आईसीएएन के मुताबिक नए डोमेन पतों के लिए आवेदन अगले वर्ष 12 जनवरी से स्वीकार किए जाएंगे और अगले वर्ष २०१२ के अंत तक संभवतः नए डोमेन पते इंटरनेट पर दिखने  लगेंगे।


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रविवार

21 साल के हुए सर्च इंजन

at 04:06
मनोज जैसवाल : इंटरनेट सर्च इंजनों के 21 साल पूरे होने के बाद आज गूगल, बिंग और याहू जैसे दिग्गज सर्च इंजनों की व्यापकता को देखकर ऐसा लगता है जैसे उन्होंने जीवन के लगभग हर पहलू को ‘खोज योग्य’ बना दिया है, लेकिन इतने लंबे और बड़े सफर के बाद भी वेब सर्च को ज्यादा से ज्यादा सटीक और उपयोगी बनाने की होड़ खत्म नहीं हुई है। जब-तब कोई न कोई नवीनता भरा प्रयोग कर वे अपने यूजर्स को चौंकाने का मौका तलाश ही लेते हैं। गूगल के ‘इंस्टेंट’ सर्च फीचर के साथ-साथ इन दिनों जो खासी चर्चा में है वह है ‘सोशल सर्च।
गूगल ने हाल ही में एक ‘सोशल सर्च’ कंपनी आर्डवार्क का अधिग्रहण किया था। अब उसने अपनी खोज सेवाओं में ‘सोशल सर्च’ को भी शामिल कर लिया है। उधर माइक्रोसॉफ्ट के ‘बिंग’ से लेकर सोशल नेटवर्किंग साइट ‘फेसबुक’ और ‘ट्विटर’ ने भी ‘सोशल सर्च’ के क्षेत्र में प्रवेश किया है। इस नई श्रेणी की सर्च सुविधा की जरूरत क्यों पड़ी? आप जानते हैं कि सभी प्रमुख सर्च इंजनों के खोज परिणाम स्वचालित एल्गोरिद्म (कंप्यूटरीय गणनाओं के फार्मूले) के आधार पर दिखाए जाते हैं।
इन परिणामों का प्रासंगिक और सटीक होना इन्हीं गणनाओं पर आधारित होता है। उन्हें महत्व के लिहाज से किस क्रम में दिखाया जाए, वह भी कंप्यूटर ही तय करता है। हालांकि ‘पेज रैंक’ और ‘लिंक लोकप्रियता’ जैसी अवधारणाओं के प्रयोग ने इन नतीजों को बेहतर बनाया है, लेकिन फिर भी ‘मशीनी’ फैसलों की अपनी सीमाएं होती हैं। वे इंसानों की पसंद-नापसंद और प्राथमिकताओं से मेल करेंगे, इस बात की कोई गारंटी नहीं है।
दूसरी तरफ सोशल सर्च ‘मानवीय पसंद-नापसंद’ को ध्यान में रखते हुए परिणाम दिखाती है, इसीलिए वे अधिक स्वाभाविक और अनुकूल महसूस होते हैं। इसका प्रयोग करने वाले अलग-अलग व्यक्तियों को अलग-अलग नतीजे दिखाई देंगे, भले ही कीवर्ड समान हो।
सोशल सर्च में इस बात का पता लगाया जाता है कि क्या आपकी दिलचस्पी वाले मुद्दों पर आपके सामाजिक दायरे में रहने वाले अन्य लोगों ने भी कभी सर्च किया है या फिर फेसबुक, ट्विटर, ब्लॉग या किसी अन्य माध्यम पर उनसे जुड़ी टिप्पणी की है? यदि हां, तो शायद वे आपके लिए भी उपयोगी होंगे क्योंकि आपके परिचय-क्षेत्र में किसी ने उन्हें ‘पसंद’ किया है। दूसरे, इस बात के काफी आसार हैं कि समान सामाजिक परिवेश से आने वाले लोगों को एक जैसी सूचनाओं की जरूरत हो।


परिणाम कहां-कहां से!
गूगल सोशल सर्च में ट्विटर, गूगल प्रोफाइल, ब्लॉगों, फ्लिकर, फ्रेंड्सफीड, पिकासा, यू-ट्यूब आदि की सामग्री शामिल की जाती है, लेकिन वही सामग्री जिसका आपके सामाजिक दायरे के लोगों ने प्रयोग या जिक्र किया हो। यदि आप हिन्दी पत्रकारिता पर सामग्री ढूंढ रहे हैं तो हो सकता है कि आपके किसी मित्र के ब्लॉग का लेख सबसे ऊपर देखकर आप चौंक जाएं।
सामान्य सर्च में शायद वही लेख दो सौवें पेज तक भी नहीं मिलेगा, लेकिन सोशल सर्च आपकी जरूरतों का इंसानी लिहाज से आकलन करती है। इस लेख की उपयोगिता अन्य लोगों के लिए भले ही बिल्कुल न हो, आपके लिए जरूर है क्योंकि आप लेखक के मित्र हैं और उसकी रचना को पढ़ना चाहेंगे।
फर्ज कीजिए कि आप जापान के बारे में चित्र तलाश रहे हैं। आपके लिए कितना सुखद आश्चर्य होगा यदि सर्च नतीजों में पहले नंबर पर आपके किसी मित्र की जापान यात्रा के दौरान लिए गए चित्र दिखाई दें, जो उन्होंने कभी फ्लिकर या पिकासा जैसी इमेज साइटों पर डाले थे! अगर आप उन्हें इस्तेमाल करना भी चाहें तो मित्र से अनुमति लेने में कोई परेशानी नहीं आएगी, बनिस्पत किसी अन्य फोटोग्राफर के ‘कापीराइट-युक्त’ फोटोग्राफ के।
आप शेक्सपियर पर रिसर्च कर रहे हैं और इंटरनेट सर्च के दौरान यह देखकर खुशी के मारे उछल पड़ते हैं कि आपके गाइड के वरिष्ठ मित्र ने शेक्सपियर के बारे में किसी ‘कमाल के लेख’ का जिक्र अपने फेसबुक पेज में किया है।
आपने लिंक क्लिक किया और लेख हाजिर! सोशल सर्च न होती तो शायद आप कभी अपने गाइड के उन वरिष्ठ मित्र तक न पहुंच पाते। चूंकि वे भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हैं, इसलिए उनकी पसंद का लेख आपके लिए भी उपयोगी होगा ही, यह मानकर चला जा सकता है! सोशल सर्च इसी तरह हर व्यक्ति की अलग-अलग जरूरतों, परिवेश, पसंद-नापसंद और सर्च नतीजों की अनुकूलता को ध्यान में रखकर परिणाम दिखाती है।

खोज का आधार क्या?
आपके मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि गूगल या दूसरे सोशल सर्च इंजन आपके मित्रों, रिश्तेदारों और परिचितों की सामग्री तक कैसे पहुंचते हैं? और यदि वे दुनिया के हर इंसान के लिए इतनी मेहनत कर रहे हैं तो उनके कुल नतीजों का भंडार कितना बड़ा होगा! अगर आप गूगल समूह की किसी भी वेबसाइट (जीमेल, ब्लॉगर, यू-ट्यूब, गूगल-डॉक्स आदि) के सदस्य हैं तो उसे आपकी पसंद-नापसंद या गतिविधियों की कुछ न कुछ जानकारी जरूर है।
इस आधार पर वह आपके ब्लॉगों में टिप्पणियां करने वाले मित्रों, ट्विटर में आपके फॉलोवर्स या जिन्हें आप फॉलो करते हैं, उन सबको खोजने में सक्षम है। यही नहीं, वह आपके मित्रों के मित्रों और परिचितों को भी अपने दायरे में लेता है। इन सबको मिलाकर आपका ‘सोशल ग्राफ’ (गूगल इसे ‘सोशल सर्कल’ कहता है) तैयार होता है - एक तरह से आपका अपना मित्र-समाज जो आपकी उम्मीदों से कहीं बड़ा हो सकता है। वजह? अगर आप ट्विटर में पच्चीस लोगों को फॉलो करते हैं और वे पच्चीस लोग अलग-अलग पच्चीस लोगों को फॉलो करते हैं तो आपके सोशल सर्किल में वे भी शामिल होंगे।
सोशल सर्च में परिणाम दिखाने से पहले आपके सोशल ग्राफ के दायरे में आने वाले लोगों से जुड़े कंटेंट (सामग्री) को खोजा जाता है और नतीजे सामान्य सर्च के साथ ‘सर्च रिजल्ट्स फ्रॉम पीपल इन योर सोशल सर्कल’ शीर्षक के साथ अलग से दिखाए जाते हैं। आपके सोशल ग्राफ में कुछ अन्य लोग भी शामिल हैं, जैसे - फ्रेंड्सफीड नामक वेबसाइट में आपके मित्र, गूगल-टॉक की चैट-सूची के मित्र, गूगल कॉन्टेक्ट्स में दिए गए मित्र, सहकर्मी और रिश्तेदार।
अगर आप जानना चाहते हैं कि आपका सोशल सर्कल कितना बड़ा है, तो देखें- ’google.com/s2/search/social. गूगल सोशल सर्च को पूर्णता तक ले जाने के लिए उसका फेसबुक और लिंक्ड-इन के साथ जुड़ना जरूरी है, जो आज नहीं तो कल हो ही जाएगा। फेसबुक ने अपने सर्च नतीजों को वेबसाइटों से जोड़ने के लिए एक विशेष सुविधा ‘ओपन ग्राफ प्रोटोकॉल’ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई है जिसका इस्तेमाल करने को कोई भी वेबसाइट स्वतंत्र है। अगर गूगल चाहे तो इसे आजमा सकता है।
गूगल पर सोशल सर्च के लिए अलग से कोई वेब एड्रेस डालने की जरूरत नहीं है। सामान्य सर्च के नतीजों के बीच में ही सोशल सर्च के परिणाम अलग से दिखाए जाते हैं, लेकिन इस सुविधा का प्रयोग करने के लिए आपका गूगल पर ‘साइन इन’ करना (यूज़रनेम और पासवर्ड डालकर साइट खोलना) जरूरी है।
यह भी संभव है कि आपके सामाजिक दायरे में आने वाले लोगों ने इच्छित कीवर्ड से जुड़ी कोई सामग्री इंटरनेट पर नहीं डाली है। कुछ लोग अपनी सोशल नेटवर्किंग साइटों का कुछ हिस्सा ‘प्राइवेट’ रखते हैं। उसके नतीजे सोशल सर्च में नहीं दिखते। अगर आपके प्रोफाइल की भाषा ‘यूएस-इंग्लिश’ है, तो शायद आपको अधिक नतीजे दिखाई दें।

दूसरे भी पीछे नहीं
माइक्रोसॉफ्ट की सोशल सर्च सुविधा आजमाने के लिए  bing.com/social पर जाएं। यह सोशल नेटवर्किंग साइटों पर साझा किए गए लिंक्स और ट्विटर के नतीजे दिखाता है। यहां कोई कीवर्ड डालने पर ऐसे तीन लोगों से जुड़े लिंक भी सुझाए जाते हैं जो उस विषय पर गहरी जानकारी रखते हैं। अगर आप उस विषय में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं तो आप बिंग के सुझाए लोगों को ट्विटर पर ‘फॉलो’ कर उनके संपर्क में रह सकते हैं।
बिंग सोशल आपको अपनी रुचि के अनुकूल दिलचस्प लोगों से जोड़ता है। इंटरनेट सर्च में इस तरह का सामाजिक पहलू पहले कहां था? फेसबुक ने पिछले अप्रैल माह में अपना ‘ओपन ग्राफ प्रोटोकॉल’ जारी किया था। आपने देखा होगा कि कुछ समय पहले इस वेबसाइट पर ‘लाइक’ और ‘रिकमेंड’ नामक लिंक्स की शुरुआत हुई थी जिन्हें दबाकर आप किसी भी व्यक्ति, टिप्पणी, लिंक, चित्र आदि के बारे में अपनी दिलचस्पी का इजहार कर सकते थे।

21 साल के हुए सर्च इंजन
सर्च इंजनों के इस्तेमाल को 21 साल हो गए हैं। पहला इंटरनेट सर्च इंजन ‘आर्ची’ था जिसे 1990 में एलन एमटेज नामक छात्र ने विकसित किया था। आर्ची के आगमन के समय ‘विश्व व्यापी वेब’ का नामो-निशान भी नहीं था। चूंकि उस समय वेब पेज जैसी कोई चीज नहीं थी, इसलिए आर्ची एफटीपी सर्वरों में मौजूद सामग्री को इन्डेक्स कर उसकी सूची उपलब्ध कराता था।
‘आर्ची’ इसी नाम वाली प्रसिद्ध कॉमिक स्ट्रिप से कोई संबंध नहीं है। यह नाम अंग्रेजी के ‘आर्काइव’ शब्द से लिया गया था, जिसका अर्थ है क्रमानुसार सहेजी हुई सूचनाएं। आर्ची के बाद मार्क मैककैहिल का ‘गोफर’ (1991), ‘वेरोनिका’ और ‘जगहेड’ आए। 1997 में आया ‘गूगल’ जो सबसे सफल और सबसे विशाल सर्च इंजन माना जाता है। ‘याहू’ ‘बिंग’ (पिछला नाम एमएसएन सर्च), एक्साइट, लाइकोस, अल्टा विस्टा, गो, इंकटोमी आदि सर्च इंजन भी बहुत प्रसिद्ध हैं। भारत में ‘रीडिफ’ ‘गुरुजी’ और ‘रफ्तार’ अच्छे सर्च इंजन हैं।
इंटरनेट पर खोज के लिए दो तरह की वेबसाइटें उपलब्ध हैं - डायरेक्टरी या निर्देशिका और सर्च इंजन। दोनों के काम करने के तरीके अलग-अलग हैं। डायरेक्टरी यलो पेजेज की तरह है। जिस तरह यलो पेजेज में अलग-अलग कंपनियों, फर्मो आदि से संबंधित सूचनाओं को श्रेणियों और सूचियों में बांटकर रखा जाता है, उसी तरह निर्देशिकाओं में भी श्रेणियां होती हैं।
शिक्षा, विज्ञान, कला, भूगोल आदि ऐसी ही श्रेणियां हैं। इन्हें आगे भी उप श्रेणियों में विभक्त किया जाता है। याहू डायरेक्टरी (dir.yahoo.com), डीमोज (dmoz.com) आदि ऐसी ही निर्देशिकाएं हैं। इनमें हम श्रेणियों, उप श्रेणियों से होते हुए संबंधित जानकारी तक पहुंचते हैं। चूंकि निर्देशिकाओं के बंधक खुद इन श्रेणियों और सूचियों को संपादित करते रहते हैं, इसलिए इनमें अनावश्यक सामग्री मिलने की आशंका कम होती है। इनमें प्राय: बहुत देखभाल कर उन्हीं वेबसाइटों की सामग्री ली जाती है जो वहां विधिवत पंजीकृत होती हैं।
निर्देशिका के विपरीत, सर्च इंजनों का काम स्वचालित ढंग से होता है। इनके सॉफ्टवेयर टूल जिन्हें ‘वेब क्रॉलर’ ‘स्पाइडर’ ‘रोबोट’ या ‘बोट’ कहा जाता है, इंटरनेट पर मौजूद वेब पेजों की खोजबीन करता रहता है। ये क्रॉलर वेबसाइटों में दिए गए लिंक्स के जरिए एक से दूसरे पेज पर पहुंचते रहते हैं और जब भी कोई नई सामग्री मिलती है, उससे संबंधित जानकारी अपने सर्च इंजन में डाल देते हैं।

जिन वेबसाइटों में निरंतर सामग्री डाली जाती है (जैसे समाचार वेबसाइटें), उनमें ये बार-बार आते हैं। इस तरह उनकी सूचनाएं लगातार ताजा होती रहती हैं। लेकिन चूंकि ज्यादातर काम मशीनी ढंग से होता है, इसलिए सर्च इंजनों में कई अनावश्यक वेबपेज भी शामिल हो जाते हैं। इसलिए सर्च नतीजों को निखारने की क्रिया लगातार चलती है।

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शुक्रवार

हमारी गलियां भी दिखाएगा गूगल

at 04:08
मनोज जैसवाल : नई दिल्ली/बेंगलुरू . देश के प्रमुख शहरों की गलियों को अब गूगल पर देखा जा सकेगा। सर्च इंजन गूगल ने प्रमुख सड़कों की थ्रीडी इमेज इंटरनेट पर लाने का काम गुरुवार को शुरू कर दिया। गूगल ने यह कदम अपनी बहुचर्चित फीचर स्ट्रीटव्यू के तहत उठाया है। इसकी शुरुआत बेंगलुरू से हुई है। कंपनी ने इसके लिए अपने विशेष वाहनों को शहर की गलियों-चौराहा पर दौड़ाना शुरू किया है। इन वाहनों में विशेष कारें तथा रिक्शे शामिल हैं। इनमें उच्च क्षमता वाले कैमरे लगे हैं।

कंपनी का कहना है कि इन कैमरों से ली गई फोटो (चित्रावली) को बाद में गूगलमैप्स पर स्ट्रीटव्यू में उपलब्ध कराया जाएगा। कंपनी अभी 27 से अधिक देशों में स्ट्रीटव्यू की सेवा दे रही है। इसमें यूजर्स कंप्यूटर स्क्रीन पर गलियों के दृश्य तक देख सकते हैं।

27 देशों के बाद भारत में भी होगी शुरुआत

ये होगा फायदा

गूगल इंडिया के उत्पाद प्रमुख विनय गोयल का मानना है कि स्ट्रीट व्यू शहरी विकास की योजना बनाने वालों, सुरक्षा एजेंसियों, मकान तलाशने वालों तथा यात्रियों के लिए बहुत काम आ सकता है। इसके अलावा आप अपने शहर की गलियों और सड़कों को कहीं से भी देख सकेंगे।

इसलिए नुकसान

सुरक्षा की दृष्टि से इसकी आलोचना भी होती रही है। गूगल ने यह सेवा 2007 में शुरू की थी। स्ट्रीटव्यू के वाहनों ने वाईफाई नेटवर्क से ई-मेल, पासवर्ड और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां हासिल कर ली थीं। इस कारण दुनिया के कई देशों ने इसे बंद करने की मांग की थी।

सुरक्षा का पूरा ख्याल

व्यक्तिगत निजता को देखते हुए केवल सार्वजनिक जगहों के चित्र लिए जाएंगे। लोगों के चेहरे, वाहन नंबर प्लेटों को छिपा दिया जाएगा।

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शनिवार

प्रीमियम ट्रैक पर आरिया के साथ टाटा की रफ्तार

at 19:48
प्रकाशित किया मनोज जैसवाल ने(मजेदार दुनिया)केलिए 


टाटा आरिया अब मैदान में है और यह टोयोटा इन्नोवा से लेकर स्कोडा
सुपर्ब तक हर मॉडल को चुनौती दे रही है, लिहाजा हमने दो बेहतरीन मॉडलों के साथ इसकी तुलना की, आकार और प्रदर्शन के मोर्चे पर। आप भी देखें, क्या लगा हमारे हाथ...टाटा मोटर्स के लिए अपनी छवि बदलना इस समय सबसे जरूरी काम है। इसकी पहचान कैब उद्योग के पसंदीदा ब्रान्ड के रूप में बन गई है। कंपनी अपनी इस छवि में बदलाव करना चाहती है और इस मोर्चे पर आरिया उसके लिए फायदेमंद हो सकती है। इसके जरिए कंपनी को अपनी ब्रान्ड वैल्यू में बदलाव करने में मदद मिलेगी।

टैक्सी ड्राइवरों की पहली पसंद मानी जाने वाली यह कंपनी अब अमीर लोगों के बीच अपनी पहचान बनाना चाहती है। क्या कंपनी आरिया के जरिए अपना यह लक्ष्य पूरा कर पाएगी? इस सवाल का जवाब पाने के लिए हमने आरिया की तुलना उसके दो प्रमुख प्रतिस्पर्धी मॉडलों -टोयोटा फॉर्च्यूनर और फोर्ड इंडेवर से की। यहां हम आपको बता रहे हैं कि इनमें से कौन सा मॉडल सबसे ऊपर रहा और कौन पिछड़ गया।

फॉर्च्यूनर और इंडेवर, दोनों ही गाडि़यां अपनी काबिलियत साबित कर चुकी हैं। देश की सड़कों पर इनका प्रदर्शन शानदार रहा है। कई लोग यह कह सकते हैं कि फॉर्च्यूनर के सामने आरिया में कुछ भी नया नहीं है। लेकिन, इस मामले में हमारी अलग सोच है। इंजन को छोड़ आरिया हर मामले में अलग है और इसमें नयापन है। इसका इंजन सफारी का है। जहां तक लुक की बात है तो तीनों गडि़यां एसयूवी की तरह दिखाई देती हैं। आरिया के साथ खास बात यह है कि इसका डिजाइन जिस तरह से बनाया गया है, उससे यह एसयूवी के साथ-साथ एमयूवी जैसी लगती है। यदि आप आरिया के डिजाइन को ध्यान से देखें तो आपको यह कई मशहूर कारों जैसी नजर आएगी। यदि आप फॉर्च्यूनर और एंडेवर को देखें तो आपको इनमें भी कारों की झलक दिखाई देगी, लेकिन आरिया में कारों की कुछ खूबियों को बड़े अच्छे तरीके से शामिल किया गया है। हमें इसका डिजाइन अच्छा लगता है, क्योंकि यह पूरी तरह से आक्रामक दिखाई देता है।

आरिया में बैठते ही इसका इंटीरियर आपको इंडिका के मुकाबले पूरी तरह से अलग लगेगा। सीट, डैश डिजाइन और कबीहोल को देखकर लगता है कि इंटीरियर पर कंपनी ने काफी ध्यान दिया है। अगर हम इसकी तुलना फॉर्च्यूनर और एंडेवर से करें तो यह नहीं कह सकते कि दोनों गाडि़यां आरिया के मुकाबले अच्छी हैं। लेकिन, कुशलता और क्वालिटी के मामले में यह आरिया से बेहतर दिखाई देती हैं। इसके अलावा आपको यह भी लगता है कि आरिया के इंटीरियर को बेहतर बनाने की कोशिश में इसके केबिन में जरूरत से ज्यादा चीजें डाल दी गई हैं। ऐसा नहीं है कि इनकी जरूरत नहीं है, लेकिन इसे प्रीमियम उत्पाद बनाने की कोशिश में कंपनी ने किसी तरह से इन चीजों का इस्तेमाल करने की कोशिश की है। लेकिन, एक बात पक्की है।

आरिया की क्वालिटी जिस तरह की है वह अब तक टाटा की गाडि़यों में देखने को नहीं मिलती थी। हम कंपनी की पैसेंजर ह्वीकल की बात कर रहे हैं। इंटीरियर स्पेस के मामले में आरिया फॉर्च्यूनर और एंडेवर से आगे निकल जाती है। लेकिन, यदि सफर में आराम की बात करें तो तीनों में काफी अंतर है। सफर के दौरान शरीर को सबसे कम झटका एंडेवर में लगता है। इसके बाद फॉर्च्यूनर का स्थान है। लेकिन, आरिया में आपको इस तरह का आराम नहीं मिलेगा और शरीर को काफी झटका लगता है। हालांकि, अगर सीधे रास्ते पर जाना है तो फिर तीनों में ही आपको किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। सबसे कठिन रास्तों पर फॉर्च्यूनर और एंडेवर चलाने के बाद मैंने पाया है कि दोनों ने अपनी काबिलियत साबित की है। जहां तक आरिया की बात है तो हमने इसे पहाड़ी रास्तों पर चलाया।

गीली घास वाले रास्ते पर हमने इसे आजमाया और यहां हमने आरिया के 4ङ्ग4 एडाप्टेर टॉर्क-ऑन-डिमांड सिस्टम का कमाल देखा। यह रास्ते को भांप लेता है और जरूरत के मुताबिक टॉर्क सप्लाई करता है। खतरनाक रास्ते पर जहां मिट्टी कट गई होती है और काफी फिसलन होती वहां आरिया थोड़ा हांफते हुए निकलने में कामयाब रही। हालांकि, हमें आरिया को आजमाने के लिए ज्यादा खराब सड़क नहीं मिली, लेकिन थोड़ी सी जांच के बाद हम आश्वस्त हो गए कि लंबी और मुश्किल सफर के लिए आरिया की सवारी की जा सकती है।

आराम की कसौटी पर तीनों गाडि़यों की जांच करने के बाद अब हम बाजार उपलब्ध इनके विकल्प और कीमतों के बारे में बात करेंगे। इंजन और गियर ट्रांसमिशन के मामले में एंडेवर में आपको सबसे ज्यादा वेरायटी मिलेगी। इसमें 3.0 लीटर और 2.5 लीटर इंजन के विकल्प के साथ ही आपको मैन्युएल या 4ङ्ग4 या 4ङ्ग2 ड्राइव फीचर के साथ ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन सिस्टम का विकल्प मिलेगा। फॉर्च्यूनर में इंजन के मामले में आपको एक ही वेरायटी मिलेगी। इसमें सिर्फ 3.0 लीटर वर्जन का ऑल-व्हील ड्राइव वाला इंजन मिलेगा। आरिया के साथ अच्छी बात इसका 2.2 लीटर वाला डायकोर इंजन है। क्यूबिक क्षमता के मामले में यह दूसरे इंजन के मुकाबले कम है। लेकिन माइलेज के मामले में यह बेहतर है। यह वैसे ग्राहकों के लिए बेहतर है, जो एसयूवी जैसी गाड़ी चाहते हैं, लेकिन ज्यादा खर्च नहीं करना चाहते। एंडेवर के साथ अच्छी बात इसका ऑटो ट्रांसमिशन है, जो बड़े शहर में ड्राइविंग के लिए सुविधाजनक है। फॉर्च्यूनर ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन या स्मॉल इंजन साइज में उपलब्ध नहीं है। इसे चलाना में मजा आता है, क्योंकि यह आसपास की गाडि़यों के मुकाबले भारी पड़ता है।यह खुशी की बात है कि टाटा ने टैक्सी वाली अपनी छवि बदलने की कोशिश की है और हमें बेहतर उत्पाद दिया है। लेकिन, अभी भी प्रीमियम कार बनाने वाली कंपनी के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने के लिए कंपनी को काफी मेहनत करनी पड़ेगी। इस दिशा में आरिया पहला कदम है। इसमें एबीएस, ईबीडी, ईएसपी विद ट्रैक्शन कंट्रोल जैसी विशेषताएं हैं।

इसके अलावा इसमें स्टिरिंग माउंटेड फोन और म्यूजिक कंट्रोल, एयरबैग्स, इन-डैश जीपीएस, ऑटामैटिक डार्कनेस सेंसिंग लाइट और रेन सेंसिंग वाइपर्स हैं। इसकी कीमत 12.91 लाख (एक्स शो रूम दिल्ली) है। इस तरह से एंडेवर और फॉर्च्यूनर के मुकाबले इसकी कीमत कम है। लेकिन, सबसे खास बात यह है कि ब्रान्ड के मामले में इसे टाटा की पुरानी छवि के चलते थोड़ा मुश्किल का सामना करना पड़ेगा। ईमेल- manojjaiswalpbt@gmail.com.PTI
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बुधवार

अपने चिट्ठे पर फ़ीडबर्नर का फ़ीड काउंट और ईमेल से चिट्ठा पढ़ने की सुविधा कैसे लगाएँ?

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प्रकाशित मनोज जैसवाल : मजेदार दुनिया के लिए 





















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अपने चिट्ठे पर फ़ीडबर्नर का फ़ीड काउंट और ईमेल से चिट्ठा पढ़ने की सुविधा कैसे लगाएँ?

आपके चिट्ठे को आपके बहुत से पाठक नियमित सब्सक्राइब कर पढ़ते हैं और गूगल-वर्डप्रेस के डिफ़ॉल्ट आरएसएस फ़ीड में ये बात दिखाई नहीं देती कि ऐसे पाठक कितने हैं. इसे जानने के लिए और तमाम अन्य एनालिसिस तथा पाठकों की सुविधाओं के लिए फ़ीडबर्नर की फ़ीड अलग से कई चिट्ठों पर दी जाती रही है जैसा कि इस चिट्ठे में है. ऑनलाइन चिट्ठा समस्या निवारण गोष्ठी जो स्काईप के जरिए हुई थी, उसमें सागर नाहर ने अपने चिट्ठे पर फ़ीडबर्नर के चिकलेट व ईमेल से चिट्ठा पढ़ने की सुविधा लगाने में आ रही समस्या के बारे में बताया था. मेरा पन्ना में जीतेन्द्र चौधरी अपने चिट्ठे का वर्ष 2008 के रूझान की बातें करते समय फ़ीडबर्नर जैसी सुविधा अपने चिट्ठे में नहीं रखने के कारण उनके चिट्ठे को नियमित सब्सक्राइबर द्वारा पढ़े जाने वाले आंकड़े नहीं बता पा रहे हैं. यदि उनके चिट्ठे पर फ़ीड बर्नर लगा होता तो वे इस आंकड़े को अवश्य बता पाते.तो आज नाहर जी की समस्या दूर की जा रही है – परंतु सिर्फ ब्लॉगर के लिए. शायद यह उनके नए तकनीकी दस्तक में काम आ जाए. मैं वर्डप्रेस इस्तेमाल नहीं करता हूँ, अतः ये नहीं कह सकता कि इनमें बताए चरण वर्डप्रेस के लिए काम आ सकेंगे. वैसे, काम आना चाहिए, क्योंकि ज्यादा अंतर नहीं होता. फिर भी, वर्डप्रेस के लिए जीतू जी से आग्रह है कि वे ऐसा ही ट्यूटोरियल लिख कर पाठकों का ज्ञान वर्धन करें, और इसे अपने लोकप्रिय चिट्ठे पर भी लगाएं ताकि लोगों को देख कर इसे लगाने की प्रेरणा मिले.
  1. सबसे पहले फ़ीडबर्नर पर नया खाता खोलें. यदि खाता पहले से है तो साइन इन करें. आपको पहले ही पृष्ठ पर दिखाई देगा – बर्न ए फ़ीड राइट दिस इंस्टैंट. इनपुट बक्से में अपने चिट्ठे का यूआरएल भरें और इसके बाजू में दिए अगला (नेक्स्ट) बटन को दबाएँ. (2)
  1. अगले पृष्ठ पर आइडेंटिफ़ाई पेज सोर्स आएगा जिसमें डिफ़ॉल्ट एटम पर होगा. इसे चाहें तो वैसा ही रहने दे सकते हैं, परंतु आप आरएसएस हेतु नीचे के दूसरे बटन को क्लिक कर चुन लें और अगला (नेक्स्ट) बटन को दबाएँ. (3)
  1. अगले पृष्ठ पर फ़ीड टाइटिल दिखाई देगा. चेतावनी : यदि आपका ब्लॉग शीर्षक हिन्दी में दिखाई दे रहा हो तो इसे अंग्रेज़ी में (रोमन) में बदल लें, नहीं तो सारा ताम झाम बेकार हो सकता है और हो सकता है कि आपकी फ़ीड काम नहीं करे. यहाँ ताज़ा समाचार हिन्दी में दिखाई दे रहा है. इसे मैंने Taza Samachar कर दिया. वहीं पर आपको फ़ीड एड्रेस दिखाई देगा. उसके ठीक सामने इनपुट बक्से पर अपने ब्लॉग को इंगित करता या ब्लॉग नाम डालें. मैंने यहाँ पर taza-samachar डाला है. इस पते को ध्यान से नोट कर सुरक्षित रख लें. जो इस तरह होगा – http://feeds.feedburner.com/taza-samachar यह आपके फ़ीड का नया पता है. अब एक्टिवेट फ़ीड बटन को क्लिक करें. (4)
  1. अगले चरण में नेक्स्ट बटन को क्लिक करें. जो आपको अगले पृष्ठ पर ले जायेगा.(5)
  1. इस पृष्ठ पर आप कुछ अन्य विशेषताओं को जोड़ सकते हैं. परंतु इन्हें बाद में भी किया जा सकता है. अतः यहाँ हम कुछ भी नहीं करते हैं और आगे बढ़ने के लिए नेक्स्ट बटन को क्लिक करते हैं (6)
  1. यहाँ पर आपको कई विकल्प मिलते हैं. चूंकि हम ब्लॉगर की बात कर रहे हैं, अतः यहाँ पर हम कुछ ब्लॉगर स्पेसिफिक सेटिंग करेंगे. वर्ड प्रेस वाले बख़ूबी आगे बढ़ सकते हैं. यहाँ पर रीडायरेक्ट योर ब्लॉगर फ़ीड टू फ़ीडबर्नर फ़ीड नाम के लिंक पर क्लिक करें. इससे आपके ब्लॉग के अब तक के सब्सक्राइबर – यानी नियमित सब्सक्राइब कर पढने वाले पाठकों की संख्या को भी इसमें जोड़ लिया जाएगा. (7)
  1. यहां पर इसके लिए आपको ब्लॉगर में लॉगइन कर सेटिंग करनी होगी. ब्लॉगर में लागइन कर चिट्ठे की सेटिंग में साइट फ़ीड पर फुल विकल्प चुनें (ध्यान रखें कि पूरी फ़ीड देने से ही पाठक ज्यादा मात्रा में सब्सक्राइब कर पढ़ते हैं) (जिफ1)
  1. यहीं पर पोस्ट फ़ीड रीडायरेक्ट यूआरएल इनपुट बक्से में अपना नोट किया गया पता जो कि इस केस में है - http://feeds.feedburner.com/taza-samachar उसे भरें.(जिफ2)
  1. आपने अब तक अपने चिट्ठे के लिए फ़ीडबर्नर खाता खोल लिया है, फ़ीड बना लिया है और उसे ब्लॉगर से जोड़ लिया है. अब आगे इसके कोड हम अपने चिट्ठे पर लगाते हैं. इसके तीन कोड (कम या ज्यादा भी लगा सकते हैं) लगाने से बेहतर होगा. पहला फ़ीड चिकलेट का जो नारंगी वर्गाकार यूआरएल दर्शाता है, दूसरा फ़ीडबर्नर काउंट का जो आपके पाठकों की संख्या को दिखाता है तथा तीसरा ईमेल से चिट्ठे की ग्राहकी (सब्सक्राइब) लेने का. तीनों के तरीके आमतौर पर एक ही हैं जो कोड द्वारा या विजेट द्वारा संपन्न किए जा सकते हैं. यदि आप विजेट से करना चाहें तो यह और भी आसान है. अब या तो क्रमांक 6 में बताए पृष्ठ पर वापस जाकर या फ़ीड बर्नर पर नए बनाए खाते में क्लिक कर उस फ़ीड की सेटिंग को खोलें तथा पब्लिसाइज बटन पर क्लिक करें. चिकलेट चूज़र पर क्लिक करें (8)
  1. फिर वहाँ पर सबसे नीचे स्क्रॉल करें. चिकलेट का डिफ़ॉल्ट आइकन नारंगी वर्गाकार ही रहने दें. वैसे तो इसे दर्जनों अन्य उपलब्ध चिकलेटों से भी बदल सकते हैं, बस उसके रेडियो बटन को क्लिक कर. फिर जो कोड आपको दिखाई देगा, उसे कॉपी कर लें और ब्लॉगर चिट्ठे के लेआउट में बाजू पट्टी में पेज एलिमेंट चुनकर एड एचटीएमएल स्क्रिप्ट विकल्प चुनकर कोड चिपका दें व टैम्प्लेट सहेज लें. या फिर दूसरा आसान विधि विजेट द्वारा इसे लगाएँ. कोड कापी करने के बजाये यूज एज विजेट इन विकल्प में ड्रापडाउन में ब्लॉगर चुनें और गो बटन को क्लिक करें. (9)
  2. आपको ब्लॉगर के खाते में ले जाया जाएगा जहाँ आपको उस चिट्ठे को चुनने का विकल्प दिया जाएगा जिसमें इसे संस्थापित करना है. चिट्ठे को चुनें और एड विजेट पर क्लिक कर इसे विजेट के रूप में संस्थापित करें (10)
  3. उपर्युक्त 9, 10 तथा 11 चरणों को फ़ीड काउंट तथा ईमेल सब्सक्रिप्शन्स के लिए भी दोहराएं.
  4. लीजिए, हो गया आपका चिट्ठा फ़ीड से पूरी तरह बर्न. और अब ये कुछ ऐसा दिखेगा – (12)
फ़ीडबर्नर बहुत सारे बढ़िया आंकड़े भी दिखाता है. यहाँ सबसे ऊपर प्रदर्शित चित्र मेरे इस चिट्ठे के फ़ीड सब्सक्राइबरों का आंकड़ा, ग्राफ़िकल रूप में है.
और चूंकि गूगल ने फ़ीडबर्नर को खरीद लिया है, तो यह गूगल से बढ़िया इंटीग्रेट हो जाता है. और यदि आपने एडसेंस लगाया हुआ है तो यह आपके फ़ीड को एडसेंस से समृद्ध भी करता है
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