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बुधवार

सरकार ने टेके घुटने, अन्ना होंगे रिहा

at 00:23
अन्ना हजारेमनोज जैसवाल : अन्ना हजारे की गिरफ्तारी के देशव्यापी विरोध के बाद सरकार घुटने टेकते नजर आ रही है और उसने अन्ना की रिहाई के आदेश दे दिए हैं. अन्ना हजारे और उनके सहयोगियों को कुछ ही देर में दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल से रिहा किया जाएगा.
अन्ना हजारे 
की रिलीज वारंट को जेल के डीजी के पास भेज दिया गया है और डीजी जेल ने भी इस बात की पुष्टी कर दी है.

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने अन्ना के सहयोगी शांति भूषण और किरण बेदी को रिहा कर चुकी है.

मंगलवार की सुबह दिल्ली के मयूर विहार इलाके से अन्ना को गिरफ्तार करने के बाद देशभर में उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया जा रहा है. शाम को इंडिया गेट, तिहाड़ जेल और एम्स पर अन्ना समर्थकों ने कैंडिल मार्च भी निकाला.

सुबह गिरफ्तारी के बाद अन्ना को 7 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. उन्हें तिहाड़ के जेल नंबर 4 में रखा गया. यहां अन्ना ने खाना खाने से इंकार कर दिया. जेल प्रशासन ने उनका मेडिकल टेस्ट भी कराया, जिसके बाद प्रशासन को यह अंदेशा होने लगा कि अन्ना की तबीयत बिगड़ सकती है. इसके बाद ही सरकार की ओर से अन्ना को रिहा करने का फैसला आया.

अन्ना की सहयोगी किरण बेदी ने अन्ना की रिहाई पर कहा कि अन्ना एक मजबूत इंसान हैं और अपनी रिहाई को लेकर किसी शर्त पर सहमत नहीं हुए. उन्होंने कहा कि अन्ना अपनी भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम में किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे.
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सोमवार

हमारे साथ वही आए जो अरेस्ट होने के लिए तैयार हो : अन्ना हजारे

at 00:14
मनोज जैसवाल : नई दिल्ली। अन्ना हजारे ने कांग्रेस द्वारा उन पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को बेबुनियाद करार देते हुए उसे इन्हें साबित करने और अपनी आमदनी और खर्चों का हिसाब देने की चुनौती दी। हजारे ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि 20 साल से चल रही भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई के दौरान उनके चरित्र पर कोई दाग नहीं लगा। उन्होंने कांग्रेस को चुनौती दी कि उसने उनके खिलाफ जो आरोप लगाए हैं उन्हें साबित करके दिखाए। अन्ना ने कहा कि वे 16 अगस्त को जेपी पार्क में अनशन के लिए जाएंगे। अगर गिरफ्तार किया गया तो जेल में अनशन करेंगे। लाठी-गोली खाएंगे लेकिन हाथ नहीं उठाएंगे। अन्ना के साथी अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 16 अगस्त की सुबह दस बजे वही लोग जेपी पार्क आएं जो गिरफ्तार होने के लिए तैयार हों।
कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने इससे पहले कहा था कि हजारे ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। न्यायमूर्ति सावंत आयोग ने उनके ट्रस्टों के बारे में जो आंकड़े दिए हैं उनसे हजारे के खुद भ्रष्टाचार में लिप्त होने का पता चलता है। हजारे ने इसका जवाब देते हुए कहा कि न्यायमूर्ति पी वी सावंत ने अपनी रिपोर्ट में कहीं भी उन्हें भ्रष्ट नहीं ठहराया है। अलबत्ता उनकी रिपोर्ट में दोषी ठहराए जाने के बाद महाराष्ट्र सरकार के तीन मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा था। अन्ना ने कहा कि कांग्रेस मेरे खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराती। मेरे खिलाफ सौ रुपये का घोटाला भी साबित करके दिखाए।
‘ प्रेस कांफ्रेंस ’


अन्ना हजारे
इस आरोप पर कि प्रधानमंत्री को उन्होंने जो पत्र लिखा है वो गांधीवादी की भाषा नहीं हो सकती, अन्ना ने कहा कि मैं गांधी जी की इज्जत करता हूं लेकिन जो लोग उनकी भाषा नहीं समझते उनके लिए मैं शिवाजी की भाषा भी जानता हूं। अपने आंदोलन के लिए धन की व्यवस्था के बारे में तिवारी के सवालों पर उन्होंने कहा कि उनकी आमदनी और खर्चों का पूरा लेखाजोखा इंटरनेट पर मौजूद है। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस पारदर्शिता पर इतना ही भरोसा करती है तो उसे भी अपनी आमदनी और खर्चों का लेखाजोखा सार्वजनिक करना चाहिए।
हजारे ने कहा कि सरकार ने उनके ट्रस्ट के खातों की जांच के लिए आठ चार्टर्ड एकाउंटेंट भेजे थे। वे ट्रस्ट के तमाम कागजात की फोटो कापी अपने साथ लेते गए मगर उन्हें इनमें कहीं कोई गड़बड़ी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि संसद में पेश लोकपाल विधेयक के कुछ प्रावधानों के खिलाफ 16 अगस्त से आमरण अनशन करने की अपनी योजना पर वह अडिग हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस की गैरवाजिब शर्तें वह स्वीकार नहीं करेंगे। अनशन की इजाजत नहीं दिए जाने की स्थिति में वह और उनके सहयोगी 16 अगस्त को सुबह 10 बजे राजधानी के जे पी पार्क में एकत्र होकर गिरफ्तारी देंगे।
हजारे की सहयोगी और पूर्व आई पी एस अधिकारी किरण बेदी ने दिल्ली पुलिस पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अनशन की इजाजत देने के लिए उसकी ओर से थोपी गई शर्तें अलोकतांत्रिक हैं। उन्होंने आंदोलनकारियों से शांति बनाए रखने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील की और आशंका जताई कि कुछ उपद्रवी तत्व अनशन के दौरान गड़बड़ी फैलाने की कोशिश कर सकते हैं।
हजारे ने आरोप लगाया कि लोकपाल विधेयक पर सरकार की नीयत पहले से ही साफ नहीं थी। उसने मजबूरी में नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को विधेयक का प्रारूप बनाने के लिए गठित समिति में रख तो लिया मगर साथ ही उनके खिलाफ एक-एक कर आरोप लगाना भी शुरू कर दिया। आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने जो लोकपाल विधेयक संसद में पेश किया है उसमें बुनियादी संशोधन कर नागरिक समाज की मांगों को शामिल नहीं किया जा सकता इसलिए नागरिक समाज की मांग है कि इसे वापस लेकर इसकी जगह एक सशक्त विधेयक संसद में पेश किया जाए।

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शुक्रवार

कारीगरी का नायाब नमूना है श्री पद्मनाभास्‍वामी मंदिर, देखिए तस्‍वीरें

at 22:12

मनोंज जैसवाल:त्रिवेंद्रम स्थित श्री पद्मनाभास्‍वामी मंदिर अपनी भव्य स्थापत्य कला और ग्रेनाइट के स्तंभों की लंबी श्रृंखला के लिए मशहूर है। मंदिर के तहखाने के एक कमरे से एक टन सोना निकला है। इससे पहले इस मंदिर के दो चैंबर 1880 में खोले गए थे। इसमें हजारों साल पुराने सोने के सिक्के और 9 फुट लंबी सोने की चेन शामिल है। साथ ही बड़ी मात्रा में हीरे जवाहरात भी इसमें पाया गया है।


एक अनुमान के मुताबिक मंदिर के एक ही तहखाने से करीब 50 हजार करोड़ रुपये मूल्य का खजाना मिला है। अभी मंदिर का दूसरा तहखाना खोला जाना बाकी है। ऐसे में कहा जा रहा है कि इस दौलत के दम पर पद्मनाभा स्वामी मंदिर ट्रस्ट तिरुपति बालाजी ट्रस्ट को दौलत के मामले में पीछे छोड़कर देश का सबसे धनवान ट्रस्ट का खिताब हासिल कर सकता है। गौरतलब है कि तिरुपति बालाजी ट्रस्ट के पास करीब 50 हजार करोड़ की संपत्ति बताई जाती है।
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रविवार

उत्तर प्रदेश में अराजकता चरम पर

at 00:12
मनोज जैसवाल : राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार से डिप्टी सीएमओ डॉक्टर वाईएस सचान की जिला जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सीबीआई से जांच नहीं कराने का कारण स्पष्ट करने के लिए नोटिस भेजा है।

आयोग के अध्यक्ष तथा कांग्रेस के सांसद पीएल पुनिया ने बताया कि आयोग ने राज्य सरकार से पूछा है कि जब डॉक्टर सचान के परिजन उनकी मौत की सीबीआई जांच की लगातार मांग कर रहे हैं, तब वह यह जांच क्यों नहीं करा रही है।

उन्होंने बताया कि सचान की मौत से जुड़े हालात इस मामले में किसी गड़बड़ी की तरफ इशारा कर रहे हैं। लिहाजा, इस मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए। पुनिया ने बताया कि राज्य सरकार को आयोग की नोटिस का जवाब देने के लिए 10 दिन का वक्त दिया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अराजकता चरम पर है और राज्य की जेलें और थाने तक सुरक्षित नहीं रह गए हैं।

गौरतलब है कि गत 2 अप्रैल को लखनऊ में हुई मुख्य चिकित्सा अधिकारी बीपी सिंह की हत्या के मुख्य आरोपी डॉक्टर सचान गत 22 जून को लखनऊ जेल के अस्पताल के शौचालय में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए थे। सरकार ने इसे प्रथम दृष्ट्या आत्महत्या का मामला बताया है।

प्रदेश के मंत्रिमण्डलीय सचिव शशांक शेखर सिंह के अनुसार डॉक्टर सचान के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उनकी मृत्यु अत्यधिक खून बहने की वजह से हुई है। प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला लगता है। उन्होंने बताया था कि मृतक के शरीर पर कुल नौ चोटें हैं, जिनमें आठ चोटें धारदार हथियारों से हुई हैं।

इनमें से दो गर्दन पर, दो दाईं कोहनी पर, दो बाईं कोहनी पर, एक दाईं जांघ के ऊपरी हिस्से और एक बाईं कलाई पर थीं। इसके अलावा गले में फंदे का निशान भी पाया गया। दूसरी ओर, सचान के परिजन ने राज्य सरकार की बात को गलत बताते हुए इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।



इस पर अधिक जानकारी यहाँ देखे


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बुधवार

उत्‍तर प्रदेश में हर रोज़ होते हैं चार बलात्‍कार

at 15:26
Four rapes per day in Uttar Pradesh: Reportमनोज जैसवाल :अपडेट किया गया
 लखनऊ।। यूपी में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने में सरकार और पुलिस नाकाम दिख रही है। बीते 24 घंटों के दौरान भी कई नाबालिग लड़कियों के साथ रेप की खबरें हैं।

बाराबंकी में देवां के इब्राहिमपुर इलाके में 10 साल की बच्ची दुकान में खरीदारी करने गई थी। गांव के ही शिवकुमार ने उसे अगवा कर उससे दुष्कर्म किया। बच्ची किसी तरह घर पहुंची और परिजनों से आपबीती सुनाई। परिजन आनन-फानन उसे जिला अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए उसे लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। आरोपी को जेल भेज दिया गया है।

सुल्तानपुर थाने के तेंदुआ काजी गांव में घर के बाहर खेल रही मासूम बच्ची को बहला-फुसला कर गांव का ही मुकेश नामक युवक बाहर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची की चीख-पुकार पर एक युवक वहां पहुंचा तो आरोपी उसे छोड़कर फरार हो गया। बेहोशी की हालत में बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया। पिता की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।

हाथरस के सासनीगेट इलाके में शनिवार को 14 साल की लड़की के साथ पड़ोस के किशोरी लाल नाम के युवक ने घर में घुसकर कथित रूप से बलात्कार किया। घटना के वक्त किशोरी घर पर अकेली थी। उसके माता-पिता किसी काम से बाहर गए थे। स्थानीय थाना के प्रभारी आर.एन.सिंह ने रविवार को बताया कि पीड़ित के परिवार की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लड़की को मेडिकल के लिए भेज दिया गया है। सिंह ने कहा कि फरार आरोपी की तलाश में छापेमारी की जा रही है।

इससे पहले शनिवार को गाजियाबाद के पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र के गांव अनवरपुर में 10 वर्षीय बच्ची को रेप के बाद जिंदा जला दिया गया था।

कुशीनगर में तीन महीने पहले एक वहशी युवक ने 13 लड़की के साथ बलात्कार किया था। गर्भवती होने पर किशोरी जब अपनी मां के साथ युवक के खिलाफ शिकायत करने पहुंची तो पुलिस ने उसे भगा दिया। दूसरी तरफ, युवक और उसके परिवार वालों ने दबंगई के बल पर लड़की का गर्भपात करा दिया। एसपी के हस्तक्षेप के बाद बलात्कारी युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। वर्तमान में भले ही बलात्कार की घटनाएं तेजी से सामने आ रही हों लेकिन ऐसी घटनाएं 
पूर्व में भी होती रही हैं। उत्‍तर प्रदेश पुलिस की फाइलों को खंगाले तो पता चलाता है कि बीते वर्ष प्रदेश में 585 ऐसी घटनाएं हुईं। यह तो बलात्कार की ऐसी वारदातें थीं जो पुलिस तक पहुंची ढेरों ऐसी रहीं जिनका किसी को पता भी नहीं चला।

उत्‍तर प्रदेश के अन्य इलाकों की बात की जाए या फिर राजधानी की महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। 15 मार्च से 15 जून के बीच राजधानी में दुष्कर्म के  21 मामले दर्ज हुए। इस आंकड़े से साबित होता है कि राज्य में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो गयी है और अपराधी खुले आम आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। राज्य में एक दिन में औसतन चार महिलाओं के साथ दुराचार हो रहा है। यह आंकड़ा तो पुलिस के पास है हकीकत इससे कहीं अधिक है।


जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो अलीगढ़ में 20 जून को एक दलित महिला ने पुलिस कर्मी पर  दुराचार का आरोप लगाया तो पुलिस मामले को रफा-दफा करने की मुद्रा में आ गयी। अलीगढ़ में ही तीन माह में बलात्कार की 14 घटनाएं हुईं। बाराबंकी में महिला हिंसा की जून व मई के मध्य 10 दुराचार तथा 16 छेडख़ानी के मामले दर्ज कराये गए। बाराबंकी के निकट फैजाबाद जिले में दुराचार के 9 मामले प्रकाश में आए जिसमें एक महिला के गर्भवती होने पर उसकी हत्या कर दी गयी। सुल्तानपुर में 3 व अम्बेडकर नगर में 5 मामले दर्ज हुए।


लखीमपुर में तीन माह में पांच महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ जिसमें चर्चित निघासन काण्ड भी शामिल है। गत माह गाजियाबाद में एक बाप ने अपनी मासूम बेटी को हवस का शिकार बनाया। हापुड़ में 22 अप्रैल को एक 8 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गयी। कौशाम्बी में तीन माह में दुराचार की आधा दर्जन से अधिक घटनाएं घट चुकी हैं।


उपरोक्त हकीकत यह बताने के लिए काफी है कि राज्य के हालात कभी भी बेहतर नहीं रहे। गत वर्ष से 2011 की तुलना करें तो जहां पिछले साल जनवरी में 97 बलात्कार की घटनाएं हुई इस वर्ष इनकी संख्या बढ़कर 121 पहुंच गयीं। फरवरी में 95 की तुलना में 151 दुष्कर्म की घटनाएं हुई। मार्च में अपराधियों ने बीते वर्ष 147 घटनाओं को अंजाम दिया तो इस वर्ष 152 महिलाओं के साथ दुराचार किया गया। राज्य में जून माह तक करीब 700 बलात्कार की घटनाएं हो चुकी हैं और पुलिस उनकी रोकथाम करने में नाकाम साबित हो रही है।


राजनीतिक दल जहां इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं.
वहीं सरकार नया कानून बनाने की बात कर रही है। बलात्कार की घटनाओं पर विशेष महानिदेशक 
बृजलाल ने अपने बयान में कहा कि दुराचारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही के आदेश दिए जा चुके हैं। उनके बयान से विरत देश के कानून में ही इतने छेद हैं कि अपराधियों को सजा मिल पाना मुश्किल हो जाता है।
इसका ताजा उदाहरण. यहाँ देखे



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रविवार

पिता एक ऐसा शब्द है जो एक संस्कार है...

at 18:58
पिता एक ऐसा शब्द है जो एक संस्कार है, आदर्श है ब्यबस्था  है सामाजिक तानेबाने की सबसे अहम् कड़ी है पिता . पिता मुखिया भी है पिता हमारे मस्तिस्क का तिलक भी है . अपने बारे मे एक सच्ची घटना आपको बताता हू.

सन १९६७ की बात है. हम तीन भाई थे पिता जी माता जी समेत पांच लोगो का परिवार था.शहर के सबसे संपन्न परिबारो में हम लोगो की गिनती होती थी.
एक दिन ऐसा हुआ कि किसी बजह से हम लोगो को एकाएक ही
बह शहर त्यागना पड़ा.(मै उस समय क्लास ८ में था).इस बजह  से मेरे पिता  अपने जमे हुए कामो को उसी जगह त्याग कर खाली हाध दूसरी जगह आ गए. एंब अकेले ही  एक नई जिंदगी की शुरूआत की.  हम लोगो को अपने अनुभब ब बिचारो को हमारे दिलो ब दिमागों इस तरह डाला कि आज ४४ बरसो के बाद भी हम लोग उसे भूले
नहीं है आज एक बार फिर से हम लोगो के पास सब कुछ है एशो आराम का तमाम सामान बगंला गाड़िया ब
परिबार में पांच की जगह इकतीस लोग है. लेकिन पिता जी, माता जी. भाई जी नहीं है.आज फादर्स डे है.
फादर्स डे  मनाना एक अच्छी बात है. ख़राब बात है पिता को बिसार देना. पिता हम सबके  लिए वंदनीय है.
ओंर  हमेशा वंदनीय रहे. यही तोहफा होगा उनके लिए भी शायद हमारे लिए भी.

समय के साथ जमाना बदल गया है शायद हमारा समाज भी.बाप बेटे के बीच रिश्तो में भी वह बात
नहीं रही है. शायद एकल परिबारो की बजह से या ओंर बजह रही हो. लेकिन जो सीख हम अपने बच्चो को
देते है उसका एक अंश भी अपने पिता के बारे में सोचे तो कितना अच्छा रहे.

भारतीय परंपरा में पिता परमेशवर से भी बड़े है.


 त्वमेव: माता च पिता त्वमेव: त्वमेब: सर्ववं मम देव देवा:


इन्ही पंक्तियो के साथ अपने पिता को नमन करता हू.


मनोज जैसवाल

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सोमवार

सस्ते लैपटाप का सपना साकार

at 00:05
मनोज जैसवाल :तमाम बाधाओं को पार करते हुए छात्रों के लिए सस्ता लैपटाप मुहैया कराने की सरकार की योजना मुकाम तक पहुंच गई.
10 हजार लैपटाप की पहली खेप मानव संसाधान विकास मंत्रालय को प्राप्त हो गई जिसकी कीमत 2,200 रूपये होगी.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि छात्रों को सस्ते लैपटाप मुहैया कराने की कवायद काफी कठिन रही.
पिछले वर्ष निविदा के अनुरूप जिस कंपनी को एक लाख लैपटाप तैयार करने का आर्डर दिया गया था, उसे एक बड़ी कंपनी ने खरीद लिया था.

उन्होंने कहा कि इसके बाद आर्डर को रद्द कर दिया गया और फिर से निविदा जारी की गई. इस बार हमने सुरक्षा संबंधी व्यापक उपाए किये थे और हमें 10 हजार लैपटाप की पहली खेप प्राप्त हो गई है.

अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय को 10 हजार लैपटाप की खेप प्राप्त हो गई है जिसे जून के अंत तक आईआईटी राजस्थान को सौंप दिया जायेगा. अगले चार महीनों में ऐसे 90 हजार और लैपटाप प्राप्त होंगे जिसकी कीमत 2,200 रूपये होगी.

इस परियोजना की परिकल्पना के मुताबिक, मंत्रालय ने इस लैपटाप की कीमत 35 डालर (1,500 रूपये) निर्धारित की थी. हालांकि अब इसकी कीमत बढ़कर 2,200 रूपये हो गई है.

मंत्रालय का हालांकि कहना है कि 2,200 रूपये के बावजूद यह सस्ता लैपटाप है जिसकी 50 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार वहन करेगी. छात्रों को इसके लिए 1,100 रूपये का भुगतान करना पड़ेगा. अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक राज्य को प्रथम चरण के तहत ऐसे 3,000 लैपटाप प्रदान किये जायेंगे.

मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (एमआईटी) के 100 डॉलर की लैपटाप परियोजना की तर्ज पर मानव संसाधन मंत्रालय ने 2005 में इस योजना की परिकल्पना की थी.

सरकार के इस अतिमहत्वाकांक्षी परियोजना के तहत पेश किये जा रहे लैपटाप में हार्ड डिस्क तो नहीं है लेकिन इसे 32 जीबी के बाहरी हार्ड ड्राइव से जोड़ा जा सकता है.

सात इंच के इस टच स्क्रीन लैपटाप में दो यूएसबी का पोर्ट है और इसकी बैटरी में तीन घंटे कार्य करने की क्षमता है. यह लैपटाप सौर ऊर्जा के उपयोग से भी चल सकता है.

इस उपकरण में वर्ड, एक्सेल, पावर प्वायंट, पीडीएफ, ओपेन आफिस, वेब ब्राउजर और जावा स्क्रीप्ट भी संलग्न है. इसमें जिप अनजिप तथा वीडियो स्ट्रीमिंग सुविधा भी है.

इंटरनेट सुविधा से लैस इस उपकरण में मीडिया प्लेयर, वीडियो कांफ्रेसिंग और मल्टी मीडिया कंटेन्ट सुविधा उपलब्ध है. यह लैपटाप कठिन परिस्थितियों में भी काम कर सकता है. 
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शनिवार

अपने ब्लॉगर ब्लॉग का मोबाइल संस्करण एनेबल करें

at 20:09


   

मनोज जैसवाल  

आजकल लोगबाग ज्यादा से ज्यादा मोबाइल फ़ोनों का प्रयोग इंटरनेट सर्फिंग और ब्लॉगों को पढ़ने इत्यादि में करने लगे हैं. आने वाले दिनों में इसकी संख्या में और भी धुंआधार इजाफ़ा होने वाला है.
ऐसे में आपका ब्लॉग धर्म ये कहता  है कि आपको मोबाइल पर ब्लॉग पढ़ने वालों को सुविधाएँ देनी चाहिए. ब्लॉगर ब्लॉग में आपके ब्लॉग के मोबाइल संस्करण को एनेबल करने की सुविधा दी गई है, जिसे आपको एनेबल कर देना चाहिए.

क्यों?
मोबाइल उपकरण ज्यादातर कम कम्प्यूटिंग पावर वाले होते हैं और उनकी स्क्रीन भी छोटी होती है. जब आप मोबाइल संस्करण एनेबल कर देते हैं तो मोबाइलों पर काम की चीज यानी आपकी पोस्टिंग ही वहाँ दिखाई देगी. बाकी का सारा कचरा - विजेट, साइडबार के बिना काम के लिंक, फ़ोटो इत्यादि लोड नहीं होंगे जिससे मोबाइल में पेज जल्दी भी लोड होगा, नेविगेशन भी बढ़िया होगा और आपका ब्लॉग पोस्ट भी बढ़िया पठनीय होगा.
हाँ, एक नुकसान ये हो सकता है कि स्क्रिप्ट युक्त एडसेंस जैसे विज्ञापन नजर न आएं. मगर, फिर आपका प्राथमिक उद्देश्य भी तो यही है न कि लोगबाग आपका लिखा पढ़ें?

कैसे करें ?
बेहद आसान है. draft.blogger.com में लॉगिन करें. सेटिंग टैब को क्लिक करें और ईमेल व मोबाइल लिंक पर क्लिक करें. वहाँ आपको सबसे ऊपर मोबाइल टैम्प्लेट बीटा के अंतर्गत शो मोबाइल टैम्प्लेट दिखेगा. उसके 'हाँ' रेडियो बटन पर क्लिक कर उसे सेव कर लें. और यदि आप चाहें तो बाजू में आपके ब्लॉग के यूआरएल को इंगित करता मोबाइल बारकोड का स्क्रीनशॉट लेकर अपने ब्लॉग में लगा लें (जैसा कि इस ब्लॉग की बाजू पट्टी में लगा है) या अपने विजिटिंग कार्ड में छपवा लें ( मैं भी जल्द ही छपवाता हूँ, ).
आपका ब्लॉग मोबाइल फ्रेंडली हो गया है. बधाई.
लोगबाग अब आपके ब्लॉग के मोबाइल बारकोड का चित्र अपने मोबाइल से खींचकर (इसके लिए कम्पेटिबल मोबाइल फ़ोनों में 

अलग से अनुप्रयोग आता है) या फिर सीधे ही उसका यूआरएल भर कर मोबाइल संस्करण का प्रयोग कर सकते हैं
manojjaiswalpbt@gmail.com
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गुरुवार

ट्विटर पर टॉपलेस हुई हसीनाएं..

at 00:38
मनोज जैसवाल 

लगता है आजकल हसीनाओं में अपने ट्विटर फैंस को खुश करने की होड़ लगी है। तभी तो किम करडाशियन से लेकर रिहाना तक सभी अपने बेहद निजी पलों में खिंचाई तस्वीरों को ट्विटर के जरिए सार्वजनिक कर रही हैं।



हाल ही में पॉप गायिका रिहाना ने अपनी साथी कलाकार निक्की मुनाज के साथ अंतरंग पलों की एक तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट की थी। उसके बाद किम करडाशियन ने अपनी टॉपलेस बिकनी फोटो ट्विटर पर जारी की। रिहाना और किम के प्रंशसकों ने इन तस्वीरें का स्वागत करते हुए उनपर काफी उत्तेजक कमेंट्स भी किए।


मॉडल एडरियाना करी और अमेरिकन अभिनेत्री ऑबरे ओ डे ने भी ट्विटर पर अपनी टॉपलेस तस्वीरें पोस्ट की हैं। ऐसा करने वाली ये पहली सेलिब्रिटी नहीं है। इससे पहले डेमी मूर से लेकर लिंडसी लोहान तक ट्विटर के जरिए अपने फॉलोवर्स को अपनी हॉट काया का दीदार करा चुकी हैं।


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बुधवार

काले धन को जगजाहिर करने में आड़े आ रहा था स्विट्जरलैंड का कानून ?

at 22:37








मनोज जैसवाल 



नई दिल्‍ली. विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वालों के नाम न उजागर करने पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सरकार पर दबाव बढ़ गया है। देश की नजरें इस ओर टिकी हैं कि क्या सरकार काला धन वापस लाने के लिए कुछ कदम उठाने जा रही है? दूसरी ओर स्विट्जरलैंड सरकार ने भी बैंकों से काला धन ले जाने के लिए सभी देशों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। ऐसे में विदेशी बैंकों में जमा 70 लाख करोड़ की काली कमाई का रास्ता खुलता दिख रहा है लेकिन इन सब के बीच अहम सवाल यह है कि आखिर कौन सी वजह थी जिससे स्विस बैंक सहित अन्‍य बैंकों में जमा इस धन की हकीकत सामने नहीं आ सकी थी।

स्विस बैंक लिंचेस्‍टाइन बैंक जैसे कई ऐसे ठिकाने हैं जो काला धन जमा करने वालों के लिए ‘स्‍वर्ग’ जैसे हैं। इस संदर्भ में इन बैंकों की कार्यप्रणाली को जानना जरूरी होगा।

स्विस बैंक की गोपनीयता

माना जाता है कि विदेशी बैंकों में जमा काले धन का अधिकतर हिस्‍सा स्विस बैंक में पड़ा है। दरअसल स्विट्जरलैंड के कानून के मुताबिक बैंकों में जमा धन की गोपनीयता बरकरार रखना नागरिक अधिकारों के तहत आता है। चाहे वह स्विट्जरलैंड का नागरिक हो या विदेशी नागरिक, यदि उसका धन स्विट्जरलैंड के बैंक में जमा है तो इसे गोपनीय माना जाता है। हालांकि आपराधिक गतिविधियों के जरिये इकट्ठा किए गए धन इन बैंकों में जमा होने की आशंका पर संघीय सरकार बैंकिंग गोपनीयता कानून 1934 के दायरे से बाहर जाकर ऐसे संदिग्‍ध खाते की जांच कर सकती है। वैसे ऐसी घटनाओं से बचने के लिए बैंक पूरी पड़ताल करते हैं। स्विट्जरलैंड की जनता तो बैंकिंग गोपनीयता के अधिकार को देश के संविधान में लागू करने के लिए वोटिंग भी कर रही है।

पिछले साल अगस्‍त में भारत और स्विट्जरलैंड के बीच दोहरे कराधान से बचाव संबंधी एक संशोधित संधि पर हस्ताक्षर किए गए। इस संशोधित संधि से भारत सरकार को स्विस बैंकों में किसी भी भारतीय द्वारा कथित तौर पर जमा किए गए काले धन का ब्योरा हासिल करने में मदद मिलेगी।

काला धन जमा करने वालों के लिए स्‍वर्ग है लिंचेस्‍टाइन

टैक्‍स हेवन के तौर पर मशहूर जर्मनी के लिंचेस्टाइन में एलजीटी बैंक पिछले दिनों काफी विवादों में रहा। जर्मनी के टैक्‍स अधिकारियों ने एक सूचना मिलने पर इस बैंक में जमा कई लोगों के खातों की जांच की और टैक्‍स चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की। इस बैंक में जर्मनी सहित दुनिया के कई देशों के नागरिकों की करीब 5 लाख यूरो की राशि जमा होने की बात सामने आई थी।

एलजीटी बैंक का असली नाम लिंचेस्‍टाइन ग्‍लोबल ट्रस्‍ट है जो यूरोप का सबसे बड़ा ट्रस्‍ट है। इसका पूरा स्‍वामित्‍व प्रिंस ऑफ लिंचेस्‍टाइन फाउंडेशन के जिम्‍मे है। इस ट्रस्‍ट में करीब 1900 कर्मचारी है जो यूरोप, एशिया, मध्‍य पूर्व और अमेरिका में 29 से अधिक दफ्तरों में कार्यरत हैं manojjaiswalpt@gmail.com
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आफ़ताब की भी सुनें...

at 00:54
मनोज जैसवाल 

30 सितंबर की शाम का हर हिंदुस्तानी की तरह मुझे भी बेसब्री से इंतजार था. मैं जानना चाहता था कि जिसे सब आजाद हिंदुस्तान का सबसे बड़ा फैसला बता रहे हैं और जिस फैसले को लेकर (मालूम नहीं क्यों) मौलाना, पंडित, नेता, अभिनेता, मीडिया सब देशवासियों से अमन-शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं, वो फैसला क्या आता है और उसके बाद क्या होता है? खैर, तय वक्त से करीब घंटे भर बाद फैसला आया, मैंने फैसला सुना, उसे समझा और फिर बिना किसी को कुछ बताए दफ्तर से निकल गया.
करीब पौन घंटे बाद मैं पुरानी दिल्ली में अपने एक पुराने दोस्त के घर पर था. मैं आफताब से मिलना चाहता था. आफताब, मेरे दोस्त के बड़े भाई का बेटा है, जो इसी साल दस सितंबर को पूरे 18 साल का हुआ है.
मुझे आज भी याद है आफताब के जन्म के मुश्किल से दो महीने बाद ही छह दिसंबर 1992 हुआ था.  पुरानी दिल्ली में कई दिनों तक कर्फ्यू लगा रहा. तब मैं उन लोगों के बेहद करीब हुआ करता था. पूरी पुरानी दिल्ली की सोच को करीब से जानने और महसूस करने का मौका मुझे उन्हीं दिनों मिला था. तब मुझे मजबूरन क्रिकेट का लाइव मैच भी इन्हीं दोस्तों के घर बैठ कर देखना पड़ता था. क्योंकि मेरे वालिद हिंदुस्तान और पाकिस्तान के मैच के दौरान जब भी पाकिस्तान हार रहा होता टीवी बंद कर दिया करते थे. शायद वो पाकिस्तान को हारते नहीं देख सकते थे.
यही हाल मेरे दोस्तों का था. गलती से अगर मैं पाकिस्तान के गिरने वाले विकेट या भारत की तरफ से जड़ने वाले चौके-छक्के पर ताली बजा देता तो एक साथ कई दोस्त मुझे धमका जाते कि अगर उनके साथ बैठ कर मैच देखना है तो भारत की हार पर खुश हों और पाकिस्तान की शिकस्त पर शोक मनाएं. मैच देखने की मजबूरी थी इसलिए अकसर उसी तरह मुझे एक्टिंग करनी पड़ती.
जिस उम्र में आफताब के चाचू से मेरी दोस्ती हुई थी, उसी उम्र में पहुंच चुका आफताब बड़े तमीज़ से मेरे सामने बैठा था. घर में टीवी ऑन था और सभी यहां भी फैसलें की खबरें सुन रहे थे. कुछ देर तक इसी फैसले पर घरवालों से बातचीत करने के बाद मैंने आफताब से पढ़ाई-लिखाई की बातें शुरू कर दीं.
आफताब अपने घर का पहला बेटा है जो अंग्रेजी स्कूल में पढ़ने गया और जिसने हाल ही में दसवीं का इम्तेहान फर्स्ट डिवीजन से पास किया है. हालांकि इस घर के पांच दूसरे और बच्चे भी अब अंग्रेजी स्कूल में ही पढ़ते हैं. कुछ देर तक इधर-उधर की बातें करने के बाद अचानक मैंने आफताब से सीधे वो सवाल पूछ लिया जिसके लिए मैं यहां तक आया था- 'इस फैसले पर तुम्हारी क्या राय है? शायद उसे मुझसे किसी ऐसे सवाल की उम्मीद नहीं थी. इसलिए पहले तो वो थोड़ा ठिठका, पर फिर अचानक बोल पड़ा- 'चाचू जमीन के तीन हिस्से क्यों किए? क्या एक ही हिस्से पर मंदीर-मसजिद नहीं बन सकता था?'
आफताब के इस एक लाइन ने पुरानी दिल्ली की नई सोच मेरे सामने रख दी थी. शायद मैं इसी सोच को समझने के लिए ही आफताब के पास भाग कर गया आया था. आफताब की सोच को जानना मेरे लिए बेहद जरूरी था, क्योंकि छह दिसंबर 92 और आफताब दोनों एक साथ 18 के हुए हैं.
आफताब के साथ-साथ आज इस मुल्क की एक पूरी नई फौज भी 18 की हो गई है. जिसकी सोच शायद आफताब से अलग नहीं है. और हां, आफताब भी क्रिकेट का दीवाना है पर उसका हीरो धोनी है. और अब जब आफताब धोनी के चौके-छक्के पर तालियां पीटता है तब उसका चाचू या मेरे बाकी दोस्त उसे धमकातें नहीं हैं...बल्कि वो भी उसकी ताली से ताल मिलाते हैं
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मंगलवार

भ्रष्‍टाचार के अंधेरे में उम्‍मीद का दीया जलाएं

at 23:59
मनोज जैसवाल 


हम कितने भ्रष्ट हो सकते हैं. या यूं कहें कि भ्रष्टाचार के कितने किस्सों और कहानियों को सुने और भ्रष्टाचार की नित नई परिभाषा को जानने के बाद हम कब तक अपने आप को चौंकाने का दम रखते हैं. हम-यानी, भारतवर्ष की आम जनता. हमारे जीवन में भ्रष्टाचार की इतनी ज्यादा अहमियत या जगह, क्यों है? सुबह से लेकर शाम तक, हमारे हर काम में जो हमारे घर की परिधि से बाहर हो, उसमें किसी ना किसी रुप में भ्रष्टाचार हमारे चारो ओर क्यों होता है, क्यों हमें इससे निरंतर जूझना पड़ता है. क्या थके नहीं हैं, हम अबतक इस शब्द -भ्रष्टाचार, से?
हर दिन किसी ना किसी नेता, अफसर, राजनीतिक कार्यकर्ता, बिजनेसमैन, सीईओ, शरीके बड़े आदमी की करनी और उससे होने वाले करोड़ों, अरबों के राष्ट्रीय नुकसान की बात पिछले 63 सालों से देखते या सुनते आये हैं. अब तो आदत होने लगी है. अगर टीवी या अखबार में किसी के घूस लेने या देने की बात ना दिखें, तो अटपटा लगता है- खलने लगता है. लगता है कि आज तो देश में कुछ हुआ ही नहीं. महसूस होता है, जैसे सरकार और सरकारी तंत्र काम ही नहीं कर रहा. ...भई बिना लेन-देन के हम कहां आगे बढ़ते हैं.
50, 60, 70 के दशक की बातों को छोड़ देते हैं. 1949 में सबसे पहले मशीनगन स्कैम सामने आया था, फिर 1952 में जीप स्कैम और फिर तो स्कैमों की झड़ी सी लग गयी. उस पीढ़ी में घोटालों का दायरा बड़ा छोटा हुआ करता था. रकम कम हुआ करती थी और अगर घोटाले की जानकारी सामने आये, तो लोग लिहाज में ही सही, अपने पद से हट जाया करते थें.
कृष्णामेनन की बात छोड़ देते हैं. वो तो नेहरु के इतने चहेते थें कि कांग्रेसियों ने नेहरु के सम्मान में उन्हें बख्श दिया. लेकिन इमरजेंसी के बाद, भ्रष्टाचार को मानो वैधानिक स्थान दे दिया गया. अफसरों और नेताओं को बाकायदा हर कॉन्‍ट्रैक्‍ट में कुछ फीसदी का पत्ता दिया जाने लगा. ...और इस 'सुविधा शुल्क' से किसी को कोई आपत्ति या परहेज नहीं था. कॉन्‍ट्रैक्‍ट लीजिए, 8 से 10 फीसदी हिस्सा दीजिए और काम ठीक-ठाक तरीके से कर दीजिए. मामला ढका रहता था.
फिर आया बोफोर्स का धमाका. 1988-89 में बोफोर्स की तोपें ऐसी गरजी, कि साफ-सुथरी छवि वाले राजीव गांधी की सारी चमक धुल गई. आज के परिप्रेक्ष्‍य में देखें तो महज 64 करोड़ की तथाकथित घूसखोरी ने राजीव गांधी से सत्ता छीन ली. बोफोर्स घोटाले ने राजीव गांधी को देश के आइकॉन से आम नेताओं की कतार में ला खड़ा किया. भले ही इस दाग को गांधी परिवार आज नहीं मानता, लेकिन बोफोर्स के बाद शायद भ्रष्टाचार की परिभाषा सार्वजनिक सी हो गयी. हर नेता या शक्तिशाली शख्‍स इसमें लिप्त दिखा.
पिछले चार हफ्तों को ही देखें, तो लगता है जैसे हमारे देश में हर शाख पर उल्लू नहीं एक घोटालेबाज, एक भ्रष्ट आदमी बैठा है. 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में शायद 1,10,000 करोड़ का घोटाला हुआ. ये आंकड़ा लिखते वक्त मुझे ये एहसास भी नहीं हो रहा, कि इतना पैसा वाकई में कितना पैसा होता होगा. कहां रख सकते हैं इसको ...और अगर गलती से मिल जाये तो क्या पूरे जीवन में कोई इतनी बड़ी रकम को खर्च कर पायेगा. चलिये रकम की बात बेमायने है, भ्रष्टाचार के स्तर की बात करते हैं.
साफ–सुथरी छवि वाले मनमोहन सिंह भी आज सोचते होंगे की क्या राजनीति का ये दलदल उनके लिए सही विकल्प था? प्रधानमंत्री कार्यालय, लगभग सभी मंत्रालय, रक्षा महकमा, सेना, आईएएस अधिकारी से लेकर स्‍थानीय निकाय के प्रतिनीधि तक आज किसी ना किसी घोटाले में शामिल हैं. 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला, महाराष्ट्र का आदर्श सोसाइटी घोटाला, कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला, कर्नाटक का कोयला खदान घोटाला, उड़ीसा का वेदांता घोटाला, मध्यप्रदेश का डंपर घोटाला ....इतने स्कैम के बाद अब तो घोटाला शब्द सुनते ही मन करता है कि भई कोई नयी खबर है तो बताओ, नहीं तो बक्शो. 
पिछले 2 हफ्तों से सरकार और विपक्ष ने संसद ना चलने देकर, लाखों करोड़ के राजस्‍व का नुकसान सिर्फ इसलिए कराया ताकि वो ये साबित कर सकें कि अगला उनसे ज्यादा भ्रष्ट है. तोहमत दोनो पक्ष एक दूसरे पर मढ़ रहे हैं– बिना किसी जिम्मेदारी के. किसी भी नीतिगत मसले पर कोई विचार नहीं हो रहा. फाइनेंस बिल के प्रवधानों पर बिना चर्चा, अतिरिक्त ग्रांट पास कर दिया गया. सरकार ये रकम कहां और कैसे खर्च करेगी– इस जानकारी को जनता तक पहुंचाने की अपनी जिम्मेदारी को विपक्ष निभाना ही नहीं चाहती और ना ही सरकार ने लोगों को कुछ बताने की जहमत उठाई कि 45 हजार करोड़ की अतिरिक्त राशि सरकार को किसलिए चाहिये? करीब 50 महत्वपूर्ण बिलों पर कोई चर्चा नहीं हुई है. ये बिल निरस्त हो जायेंगे.
अमेरिकी राष्‍ट्रपति के दौरे से देश को क्या मिला और क्या नहीं, इसपर ना तो सरकार चर्चा चाहती है और ना ही विपक्ष को कोई लेना-देना है. कुल मिलाकर देश को चलाने की सारी जिम्मेदारी अफसरों पर डालकर हमारे चुने हुये प्रतिनिधि सिर्फ अपनी जेब भरने में लगे हुये हैं. ऐसे में, अगर कोई बाबू, सरकारी खुफिया जानकारी बेचकर पैसे कमाने लगे, चरित्रहीना की सारी हदें भी पार कर जाये, तो कौन है देखने वाला. आईएएस अधिकारी रवि इंदर सिंह की गिरफ्तारी के बाद जो भ्रष्टाचार और चरित्रहीनता का नमूना सामने आया है, इससे तो अब पूरे सिस्टम से ही विश्वास खत्म होता दिख रहा है. इस सब पर तुर्रा तो ये, कि सिस्टम पर सवाल उठाने वाले पत्रकारों की एक जमात भी अपनी जड़ खुद ही खोदने लगे हैं. जैसे जैसे कुछ पत्रकारों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, भरोसा अब निष्‍पक्ष पत्रकारिता से भी उठता दिख रहा है.
वक्त अब हम सबों से ये सवाल करने लगा है कि आखिर कब तक हम अपने समाज, अपने देश, अपनी जमीन से गद्दारी करते रहेंगे? भ्रष्टाचार नामक इस दीमक से हमें कब छुटकारा मिलेगा? एक आम भारतवासी कब अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर, देशहित की बात सोचेगा? हर बार ये कहा जाता है कि भ्रष्टाचार वो कीड़ा है, जिसपर रोक-थाम लगाने की जिम्मेदारी ऊपर से शुरु होता है. लेकिन अब इस परिभाषा को बदलने की जरुरत है. इस कीड़े को हर भारतवासी को अपने स्तर पर ही मारना होगा. ये लड़ाई हम सबों की है, ना कि सिर्फ कुछ लोगों की. अगर मुन्नाभाई फिल्म में संजय दत्त भ्रष्टाचार का मुकाबला गुलाब के साथ कर सकते हैं, तो क्या हमारे बगीचों में गुलाब की कमी हो गयी है?
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रविवार

यह नाटक पेट्रोल मूल्‍यवृद्धि से ध्‍यान हटाने के लिए

at 22:40
मनोज जैसवाल 
इन दिनों पूरे देश में प्याज के दामों पर किचकिच चल रही है. एक-दूसरे पर दोषारोपण किया जा रहा है. पर असली सच यही है कि सत्ताधीश, पेट्रोलियम कंपनियां और उनके हाथों की कठपुतली बने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया-कर्मी पेट्रोल मूल्यवृद्धि से ध्यान हटाने के लिए ही प्याज की महंगाई का नाटक कर रहे हैं. प्याज की अस्थायी तौर पर बढ़ी हुई कीमत पर हाहाकार मचा रहे हैं. जबकि सभी जानते हैं कि प्याज की कीमत आज नहीं तो कल कम हो जाएगी, मगर पेट्रोल के बढे़ हुए दाम कभी कम नहीं होंगे. पिछले कुछ दिनों से खबरिया चैनलों पर मीडिया-कर्मी प्याज के समाचारों को इतना ‘हाइप’ दे रहे हैं मानों प्याज नहीं होगा तो यह जीवन-सृष्टि नहीं चलेगी. जबकि ऐसा कुछ नहीं है. जैन समाज में अधिकांश लोग प्याज नहीं खाते. छूते तक नहीं, फिर भी उनकी सेहत हमेशा अच्छी रहती है. आज जनता अगर एक-दो सप्ताह प्याज न खाए, तो क्या बिगड़ेगा. वह जीवनावश्यक वस्तु नहीं है. मगर पेट्रोल सर्वाधिक जीवनावश्यक वस्तु है. वह हर घर, हर व्यक्ति, हर परिवार और हर समाज की जरूरत है. लेकिन पेट्रोल की कभी कम न होने वाली प्रचंड मूल्यवृद्धि को लेकर आजकल कहीं कोई हाहाकार नहीं कर रहा है, क्योंकि कोई भी न्यूज चैनल इस विषय पर चीख नहीं रहा है.
फिर बता दें कि नैसर्गिक विपदा (बेमौसम वर्षा) के कारण किसानों की प्याज और सब्जी-भाजी की फसल का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. इसलिए बाजार में प्याज सहित अन्य सब्जियों का अभाव देखा जा रहा है. अनेक किसानों का प्याज सड़ गया है. वह 2-4 रुपए किलो की दर पर भी लेने कोई तैयार नहीं है. तब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वाले वह सड़ी हुई फसल क्यों नहीं दिखाते? क्यों नहीं इन गरीब किसानों के हुए नुकसान पर सरकारी तंत्र को झकझोरने वाली रिपोर्ट प्रसारित करते! मगर सरकारी नुमाइंदों, पेट्रोलियम कंपनियों और सत्ताधीशों के हाथों में खेलने वालों को किसानों के आंसुओं से कोई सरोकार नहीं है.

अगले माह तक प्याज के दाम जब जमीन पर आ जाएंगे और पेट्रोल के दाम वहीं 62-63 रुपए प्रति लीटर पर कायम रहेंगे, तब हाहाकार मचाने वाले ये लोग कहां मुंह छिपाएंगे? क्योंकि प्याज और सब्जियों के भाव तो कम हो ही जाएंगे, मगर भविष्य में कभी भी पेट्रोल के दाम नहीं घटेंगे! पिछले छह माह में पेट्रोल के मूल्य में सात बार वृद्धि की गई है और वह पिछले छह माह की तुलना में 12 रुपये महंगा हो चुका है. लेकिन कहीं किसी ने हो-हल्ला नहीं किया. जबकि किसानों की उपज का मूल्य जरा-सा बढ़ा नहीं कि हाहाकार मचाया जाता है. ऐसे में लगता है कि यह किसानों के खिलाफ एक सुनियोजित षड़यंत्र है.

विदेशों से आयात किया गया क्रूड ऑइल प्रक्रिया पूरा होने के बाद भारत में पेट्रोल 22 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध होता है. मगर उपभोक्ताओं को उसके लिए 62-63 रुपये प्रति लीटर देने पड़ते हैं अर्थात प्रत्येक लीटर पर कम से कम 40 रुपये अधिक. महीने में दो से तीन किलो प्याज खाने वाले एक परिवार को हर माह कम से कम 30 से 40 लीटर पेट्रोल (औसतन) लगता है. प्याज के दामों की मार ज्यादा पड़ेगी या पेट्रोल की! फिर सरकार को यदि ‘आम आदमी’ की इतनी ही चिंता है, तो वह 22 रुपये प्रति लीटर वाले पेट्रोल पर इतने भारी-भरकम टैक्स क्यों लगाती है? और पेट्रोलियम कंपनियों को भारी मुनाफा क्यों कमाने दे रही है? क्या इससे यह साबित नहीं होता कि सरकार और इन पेट्रोलियम कंपनियों के बीच लंबी साठगांठ है?

पेट्रोल (फ्यूल) जीवनावश्यक वस्तु है, जबकि प्याज नहीं. पेट्रोल-डीजल पर बेतहाशा टैक्स लगाना ही अव्यवहारिक है. नैतिकता के खिलाफ है. अब भी वक्त है, सरकार को टैक्स लगाना भी छोड़ना चाहिए और फ्यूल कंपनियों को मुनाफा भी कम करने के आदेश देने चाहिए. अगर सरकार किसानों की सच्ची हमदर्द है, तो उसे बायो पेट्रोल व बायो डीजल (नैसर्गिक ईंधन) के उत्पादन पर ध्यान देना चाहिए. वह शक्कर (गन्ने) से बनता है. ऐसा ईंधन सस्ता भी होगा, इससे किसानों को लाभ भी होगा तथा वह पर्यावरण के हित में भी होगा. दुनिया में ब्राजील, चिली, मैक्सिको, अर्जेंटीना व मॉरीशस आदि देशों में तो अधिकतर इसी प्रकार का बायो फ्यूल ही इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन किसान विरोधी सरकार शायद ही ऐसा करेगी. पेट्रोल न मिले, तो रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो सकता है, लेकिन प्याज न मिले तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा. इसलिए प्याज मूल्यवृद्धि पर रेंकने वालों को पेट्रोल मूल्यवृद्धि पर ही हाहाकार करना चाहिए

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फिक्‍स था बिग बॉस का महामुकाबला!

at 22:27
 मनोज जैसवाल 


श्वेता तिवारी के बिग बॉस सीजन चार जीतने के बाद एडमॉल के बिग बॉस - बिगर तमाशा का अंत हुआ। श्वेता के हिस्से एक करोड़ रुपए आए और बाकी बचे लोग जो बिग बॉस के घर का हिस्सा बने थे, उन्हें भी पहचान और पैसा मिला। एक प्रतिभागी ने कैमरे के सामने स्वीकार किया। पहले जो लोग मिलने को भी तैयार नहीं थे, बिग बॉस में आने के बाद पहचानने लगे हैं। भाव देते हैं। इस रियलिटी शो को देखने के दौरान इसकी रियलिटी पर हो सकता है कि कोई सवाल ना उठाए लेकिन शो में शामिल घर वालों को घर से अंदर बाहर करने में दर्शकों का रोल कहीं नजर नहीं आया। बिग बॉस के घर से किसे निकालना है, इसका रिमोट दर्शकों के हाथ में नहीं बल्कि कार्यक्रम के प्रबंधकों के हाथ में था। वरना श्वेता तिवारी के नाम की घोषणा के साथ बिग बॉस को इस बात का भी ऐलान करना चाहिए कि यदि श्वेता द ग्रेट खली के मुकाबले विजयी हुईं हैं तो उसकी जीत के लिए तय पैमाने क्या थे? यदि उन्हें दर्शकों ने अपने वोट से जिताया है तो दर्शकों को यह जानने का पूरा हक है कि उनकी चहेती श्वेता तिवारी कितने मतों से विजयी हुई हैं। दूसरी तरफ खली द ग्रेट के प्रशंसकों को भी यह जानने का पूरा हक है कि यदि उनके प्रिय खली नहीं जीते तो इसके पीछे उनसे कहां चूक हुई? लेकिन बिग बॉस ने इसकी परवाह नहीं की।
बिग बॉस के पास तो इस सवाल का जवाब भी नहीं होगा कि जब घर के अंदर बाहर की खबर नहीं जा रही थी तो डॉली बिन्द्रा ने कैसे जाना कि बाहर सारा का तलाक हो चुका है? चूंकि बिन्द्रा एक एपिसोड में यह कहती हुई मिलीं कि सारा तो दूसरी शादी की तैयारी कर रही है। इस संदेह से इनकार नहीं किया जा सकता कि आने से पहले क्लोडिया, प्रवेश राणा, वगैरह-वगैरह को पता हो कि उन्हें किन-किन एपिसोड में बाहर होना है। डॉली बिन्द्रा जब कार्यक्रम से बाहर हो गईं उन्हें पता हो कि उन्हें फिर कार्यक्रम में वापस आना है। बिग बॉस में डॉली बिन्द्रा की भूमिका को देखकर कोई भी समझ सकता है कि वह कार्यक्रम में एक तय एजेन्डे के साथ शामिल हुईं थीं। वह लगातार कार्यक्रम में अपने हंगामें का तड़का लगा रही थीं। कोई भी कह सकता था कि बिग बॉस की तरफ से उन्हें विश्वास पत्र मिला हुआ है कि अन्तिम चार तक कोई उनका बाल भी बांका नहीं कर सकता। और इस बात में भी शक की गुंजाइश कम ही थी कि बिग बॉस में वे टॉप फोर से आगे जाएंगी।
इस कार्यक्रम में द ग्रेट खली की जगह श्वेता तिवारी की जीत में सटोरियों की भूमिका का भी संदेह होता है। कोई नहीं सोच सकता था कि इस मुकाबले में द ग्रेट खली की हार होगी! एक समाचार चैनल के अनुसार सट्टा बाजार में बड़ी रकम खली के नाम पर लग रही थी। ऐसे में करोड़ों रुपयों के खेल में श्वेता तिवारी के नाम एक करोड़ कर देना घाटे का सौदा तो नहीं लगता? इन्हीं बातों से संदेह होता है कि श्वेता की जीत बिग बॉस फिक्सिंग का हिस्सा तो नहीं। बकौल श्वेता उसने भी नहीं सोचा था कि वह बिग बॉस सीजन चार में जीत हासिल करेंगी। यदि श्वेता की जीत वाजिब  थी तो बिग बॉस को श्वेता की जीत कैसे सुनिश्चित हुई, इस प्रक्रिया के खुलासे में पारदर्शिता बरतनी चाहिए।टेलीविजन मनोरंजन का कारोबार करोड़ों का है, लेकिन जिन दर्शकों से यह बाजार बनता है, यूं लगता है मानो वे ही इस पूरे आयोजन में हासिश पर डाल दिए गए हैं।

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शुक्रवार

क्या अंतरिक्ष में हो सकता है गर्भधारण?

at 22:03

 मनोज जैसवाल 
वॉशिंगटन. नासा को अंतरिक्ष में सेक्स के विषय पर अध्ययन करना चाहिए। ताकि यह पता लगाया जा सके कि जीरो गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में गर्भधारण हो सकता है या नहीं।

विशेषज्ञों ने नासा को यह सुझाव दिया है। हालांकि नासा इस विषय पर हमेशा से चुप रहा है। कैलिफोर्निया स्थित ब्रेन रिसर्च लेबोरेटरी के डॉ. रहॉन जोसेफ ने ‘जर्नल ऑफ कॉस्मोलॉजी में ‘सेक्स ऑन मार्स’ शीर्षक से प्रकाशित चैप्टर में ये बातें लिखी हैं। फॉक्स न्यूज ने डॉ. जोसेफ के हवाले से बताया, ‘इंसान सेक्स के बारे में बहुत ज्यादा सोचते हैं। अगर आप मंगल ग्रह की लंबी यात्रा पर जा रहे हैं तो वहां करने के लिए कुछ नहीं होगा।.नासा जिन अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजता है उनके बीच भावनात्मक रिश्ता बनने की संभावना होती है।

उनके इस रिश्ते को आगे बढ़ने से रोकना नाइंसाफी होगी।’ डॉ. जोसेफ ने कहा, ‘अंटार्कटिक अंतरिक्ष के समान है। वहां बहुत लंबा समय अंदर बिताना पड़ता है। हम देखते हैं कि विपरीत परिस्थितियों में शोधकर्ता वहां लंबे समय तक रहते हैं और महिला शोधकर्ता गर्भवती भी हो जाती हैं। ये एक सामान्य बात है। नासा को मंगल ग्रह के बारे में भी यह सोचना चाहिए। अगर मंगल ग्रह पर शिशु आएगा तो वह वहां के अलग और नए पर्यावरण से परिचित हो जाएगा। इस तरह कई पीढ़ियों के बाद एक नई प्रजाति सामने आएगी।’

नासा ने अंतरिक्ष में सेक्स को लेकर कभी भी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। अंतरिक्ष यात्रियों के लिए तय किए गए आचरणों में कहा गया है कि वे उचित व्यवहार बनाए रखेंगे। नासा के लैंजली रिसर्च सेंटर के प्रवक्ता माइकल फिनरएन ने कहा, ‘मंगल पर बस्ती बसाने जैसा कोई भी कदम नासा अभी नहीं उठा रहा है। अंतरिक्ष या मंगल पर सेक्स अथवा गर्भधारण को लेकर नासा कोई अध्ययन कर रहा है या नहीं? इस बारे में हम कोई टिप्पणी नहीं कर पाएंगे।’ बहरहाल, इसे लेकर जिज्ञासा बनी हुई है।manojjaiswalpbt@gmail.com

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छींक कर निकाल दी सर में लगी गोली, बच गई जान

at 21:37

 मनोज जैसवाल 
जो खबर हम बता रहे हैं वो रजनीकांत की किसी फिल्म का सीन भले ही न हो लेकिन है हकीकत। इटली में एक युवक के सिर में गोली लगी, यवक ने नाक से छींककर यह गोली बाहर निकाल दी। अब उसकी जान बच गई है।



घटना नए साल की शाम की है। 28 वर्षीय डार्को सांगरमानो अपनी गर्लफ्रैंड के साथ नए साल का जश्न मना रहे थे। तभी .22 कैलिबर की एक गोली उनके सिर में आकर लगी। दाएं ओर से सिर में घुंसी यह गोली आंख के पीछे से होते हुए नाक में आकर अटक गई। डार्को ने अस्पताल जाते वक्त छींककर यह गोली नाक से बाहर निकाल दी। जब वो अस्पताल पहुंचा तो उसने डॉक्टरों को बताया कि सिर में दर्द के सिवा उसे कोई और तकलीफ नहीं हो रही है।



डॉर्को का इलाज कर रहे डॉक्टर सिड बैरानो का कहना है कि वो बहुत खुशनसीब था जो उसकी जान बच गई। गोली सिर लगी और आंख के पीछे से घुंसती हुई नाक में जा अटकी। चमत्कारिक रूप से उसने छींक कर यह गोली बाहर निकाल दी। समय पर गोली निकलल जाने से उसकी जान बच गई।




यह घटना इटली के शहर नेपल्स में घटी। नेपल्स नए साल पर पार्टी के दौरान आतिशबाजी और गोलीबारी के लिए जाना जाता है। जश्न में गोलियां भी खूब चलती है। कोई गोली गलती से डार्को को आ लगी होगी। नए साल के जश्न में दो अन्य लोगों को भी 
गोली लगी थी।
manojjaiswalpbt@gmail.com
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बुधवार

क्या निजी अस्पताल छल कर रहे हैं

at 00:12

मनोज जैसवाल 



बेहद महंगे हो गए हैं अस्पताल

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सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों ने प्रीफर्ड प्रोवाइडर नेटवर्क (पीपीएन) का जो खाका पेश किया था उसको लेकर मुश्किल खड़ी हो गई है। चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने वालों के पास न तो इलाज का कोई मानक है, इलाज के लिए वे कितना पैसा वसूलते हैं इसके लिए भी पैमाना नहीं है, कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भी कोई निश्चित खाका नहीं है, कुल मिलाकर इनका महंगा इलाज आम आदमी की पहुंच से बहुत दूर हो गया है।

पीपीएन तंत्र में स्वास्थ्य बीमा करने वाली कंपनी ही फाइनैंसर का काम करती है लेकिन कुछ वजहों से इन कंपनियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वैसे तो बीमा क्षेत्र में स्वास्थ्य बीमा चमकता हुआ कारोबार है और पिछले एक दशक में इसकी चक्रवृद्घि बढ़ोतरी दर 35 फीसदी रही है और वर्ष 2009-10 के दौरान इसका आकार 8,300 करोड़ रुपये हो गया।

हालांकि देश की अभी महज 10 फीसदी से भी कम आबादी स्वास्थ्य बीमा के तले आती है। इस लिहाज से इस क्षेत्र में अंतहीन संभावनाएं हैं। ऐसे में गड़बड़झाले और झूठे दावे इस उभरते हुए क्षेत्र की रफ्तार पर बुरा असर डाल रहे हैं। ग्राहक भी इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रहेंगे। उनके स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम भी बढ़ सकता है।

तकरीबन सभी स्वास्थ्य बीमा सेवा प्रदाता ग्राहकों को अस्पताल में या तो सीधे या फिर टीपीए के जरिये कैशलैस इलाज की सुविधा मुहैया कराती हैं। मरीज अस्पताल में भर्ती हो जाता है और उसे अपनी जेब में हाथ नहीं डालना पड़ता जबकि बीमा कंपनी सीधे ही अस्पताल के साथ उसके बिल का निपटान करती है।

इसके तहत ही 'नेटवर्क हॉस्पिटल'  श्रृंखला का उदय हुआ। बीमा कंपनी और चिकित्सा सेवा प्रदाता के बीच सहमति पत्र का फायदा आखिरकार ग्राहक को ही मिलता है। देश के लगभग हर इलाके में ग्राहकों को हर तरह की स्वास्थ्य सेवाएं इसके जरिये मिलीं। इसमें बुनियादी और प्रीमियम सभी तरह की सेवाएं शामिल हैं। हालांकि साथ ही चिकित्सा सेवाओं की दर इतनी बढ़ती गई जो फिलहाल खतरनाक स्तर पर पहुंच गई हैं।

बढ़ते प्रीमियम को देखते हुए एक स्थिति यह भी आ सकती है कि आम आदमी के लिए स्वास्थ्य बीमा दूर की कौड़ी नजर आने लगे। मौजूदा दौर में बीमा कंपनियों का ध्यान एक बेहतर दावा प्रबंधन प्रणाली विकसित करने पर है। दावों का निपटान इन दिनों बीमा कंपनियों के लिए कड़ी चुनौती बनता जा रहा है और इनके प्रबंधन के लिए बेहतर तरीका वक्त की जरूरत है।



बेहतर हुआ इलाज और देखभाल

डॉ. परवेज अहमद सीईओ और एमडी मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट लि.

फिलहाल जिस मसले पर विवाद चल रहा है उसमें कई तरह के झूठ का बखान किया जा रहा है। खासतौर से इस बात के मद्देनजर तो यह बात और भी झूठ का पुलिंदा लगती है क्योंकि बीमा कंपनियों और चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने वालों का अंतिम लक्ष्य ग्राहकों को किफायती दरों पर सेवा मुहैया कराना है।

कॉर्पोरेट अस्पतालों ने बेहतरीन चिकित्सा सेवाओं का सूत्रपात किया है और काम का एक बेहतरीन ढांचा तैयार किया है। एक ऐसे कारोबार में जहां पर अभी भी गड़बडिय़ां कायम हैं वहां पर इन अस्पतालों ने पारदर्शी मॉडल पेश किया है। यह भी अजीब विडंबना है कि जिन कॉर्पोरेट अस्पतालों ने यह सब किया उन्हें ही पारदर्शिता और उलूल-जुलूल भुगतान के लिए कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।

मुझे लगता है कि जिस मसले का आसानी से एक समाधान निकल सकता था वह बीमा कंपनियों के एकतरफा फैसले की वजह से फंस सा गया है। मैं कह सकता हूं कि भारत में चिकित्सा सेवा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया है। हमारे पास आज बेहतरीन तकनीक, बुनियादी ढांचा और कई ऐसी असाध्य बीमारियों का इलाज मौजूद है जिसका इलाज कराने के लिए पहले विदेश जाना पड़ता था।

हालांकि मुद्रास्फीतिक दबाव का असर भी देखने को मिल रहा है क्योंकि 30 साल पहले जिस बीमारी के  इलाज के लिए जितना खर्च आता था अब वह खर्चा बढ़ गया है। इस बुनियाद पर कई लोग बेवजह का अंदाज लगा रहे हैं कि अस्पताल इलाज के लिए जरूरत से ज्यादा पैसा वसूल कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2008-09 के दौरान आईआरडीए के आंकड़ों के मुताबिक कुल किए गए दावों में से 7 फीसदी महंगे अस्पतालों के किए गए जो कुल दावों के मूल्य के 40 फीसदी के बराबर थे।

वहीं अगर 93 फीसदी दावों की बात करें तो यह छोटे अस्पतालों और नर्सिंग होम के थे जो कुल वैल्यू के 60 फीसदी के बराबर थे। आंकड़े इस बात को पुष्ट करते हैं कि करीब 95 फीसदी से भी अधिक मामलों में बिलों में किसी भी तरह से बिल को बढ़ा-चढ़ा कर पेश नहीं किया गया था।

हम मानते हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं के इस पूरे तंत्र में सरकारी बीमा कंपनियां एक अहम कड़ी है और  वे लगातार नुकसान नहीं झेल सकतीं। हमारे हिसाब से अपने नुकसान को कम करने और कारोबार को बेहतर तरीके से चलाने के लिए ये कंपनियां अस्पताल की हैसियत के हिसाब से बीमा पॉलिसियां बना सकती हैं।

कंपनियां ग्रुप इंश्योरेंस के लिए भी वाजिब कीमतें तय कर सकती हैं।  वे को-पे के छोटे अकाउंट भी शुरू कर सकती हैं
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मंगलवार

सांठगांठ की बोरी से निकला महंगा प्याज़

at 23:58

 मनोज जैसवाल 
अगर आप सोचते हैं कि प्याज के थोक भाव बढऩे से खुदरा भाव चढ़े हैं तो आप गलत हैं। यह तेजी कुछ प्याज कारोबारियों की सांठगांठ का नतीजा है, जिसने आम आदमी के साथ ही प्याज की खेती करने वाले किसान को भी रुला रखा है। कारोबारियों ने थोड़ा सा प्याज ऊंचे भाव पर खरीदा, जिससे लोगों को लगा कि इसके दाम बढ़ रहे हैं और पूरे बाजार में भाव बढ़ गए।

भाव भी ऐसे बढ़े कि नासिक में एपीएमसी की मंडियों में जिस दिन प्याज 3,000 रुपये से  4,000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था उसी दिन खुदरा बाजार में इसका दाम 70 रुपये प्रति किलो था। एपीएमसी के सूत्रों ने बताया कि लासलगांव मंडी में 20 दिसंबर को प्याज का थोक भाव अधिकतम 6,229 रुपये और न्यूनतम 1,200 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि इसकी औसत कीमत 3,800 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई थी।

दिलचस्प है कि कारोबारियों ने थोक भाव का हवाला देते हुए प्याज के खुदरा दाम बढ़ाए थे। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक कारोबारी ने बताया, 'कारोबारियों ने एपीएमसी में ऊंचे दाम पर 20-30 क्विंटल प्याज खरीदा और बाकी प्याज बेहद कम भाव पर खरीदा। खुदरा भाव उन्होंने अधिकतम दाम के आधार पर ही तय किए। कम आपूर्ति के हालात में अक्सर ऐसा होता है।

दरअसल नवंबर में हुई बेमौसम बरसात से प्याज की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। एपीएमसी सूत्रों ने बताया कि प्याज की खेती में 25,000 रुपये प्रति एकड़ लागत आती है और अधिकतर किसान तो इसकी भरपाई भी नहीं कर पाये हैं।

प्याज निर्यात पर सरकारी रोक के बाद भाव नीचे आए हैं। मंगलवार को लासलगांव में प्याज का थोक भाव 2,351 रुपये प्रति क्विंटल था। नासिक के खुदरा  बाजार में अच्छी किस्म का प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम और छोटा प्याज 20 रुपये किलो मिल रहा था।
प्याज किसान तानाजी ने बताया, 'बारिश से मेरी खेती बरबाद हो गई और पांच एकड़ में 45 क्विंटल प्याज ही हुआ। लागत करीब 1 लाख रुपये आई थी, जबकि मुझे बिक्री से महज 81,000 रुपये मिले। निर्यात नहीं रुकता तो मेरी लागत निकल आती। भारतीय राष्टïरीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'कर्नाटक और गुजरात में नई फसल आने लगी है। नासिक में जनवरी के अंत से फसल आ जाएगी। अगले साल फरवरी तक प्याज के दाम नीचे आ जाएंगे।

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बुधवार

जब ब्लड प्रेसर की दवा खाते रहने के बाद भी ब्लड प्रेसर समान्य न हो तब क्या करे…………

at 14:27
मनोज जैसवाल 
बहुत से ऐसे मरीजों को देखा है जिनको एलोपैथी की ब्लड प्रेसर की दवा खाने के बाद भी उनका ब्लड प्रेसर सामान्य नहीं होता, जबकि उनकी सभी तरह की आधुनिक जान्च कर ली गयीं और सब कुछ समान्य निकला या सामान्य निकलता है /
मैने ऐसे मरीजों को काफी समय तक Monitor किया है, बिना कोई अतिरिक्त दवा के / वे जो भी Allopathy की दवा खा रहे थे, मैने उनको वही दवा , जिस Doctor ने prescribe की थी, Doctor की सलाह लेकर लगातार लेने की सलाह दी / लेकिन इस सबके बाद भी  उनका Blood Pressure कम नहीं हुआ /
ऐसे बहुत से लोग हैं जिनको इस तरह की परेशानी बनी रहती है, उनको मै कुछ सुझाव दे रहा हू, जिन पर अमल करने से फायदा हो सकता है /
आयोडीन जैसे नमक और सादा समुद्री नमक खाना बन्द कर दें और इसकी जगह सेन्धा नमक का प्रयोग करना शुरू कर दें / घर के सभी लोग सेन्धा नमक खाने से बहुत सी आये दिन की बीमारियों से निजात पा जायेन्गे / सेन्धा नमक खने से Blood Pressure कम होने लगता है /
अपना पेट साफ रखे / परन्तु इसके लिये कोई विरेचक चूर्ण या दस्त साफ़ लाने वाला प्दार्थ न ले / ज्यादा कब्ज की हालत में अमल्तास को पानी में भिगोकर खाने के पहले सेवन करें / अमल्तास की मात्रा कितनी लेनी है , बेह्तर है , अपने नजदीक के किसी वैद्य या हकीम से पूछ लें / हलका विरेचन के लिये त्रिफला चूर्ण का प्रयोग कर सकते है /
सुबह का नश्ता बन्द कर दें और केवल एक गिलास फलों का रस या सादा दूध सेवन करें /
दोपहर में हल्का भोजन लें और अपनी भूख से कम खायें /
अचार, दाल मोठ, नमकीन सब बन्द कर दें / जब भुख लगे तब फल या फलों का रस लें /
जिनका ब्लड प्रेसर बढा हुआ रहता है उनका इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफ परीक्षण में कई तरह की कार्य विकृतियां मिलती है, जिनमें Hydro Musculosis, Epigastritis, swelling bowels pathophysiology इत्यादि बातें शामिल होती है / इन कारणॊं का इलाज कर देने से बढा हुआ blood pressure कम होने लगता है /
जब allopathy दवा खाने के बाद भी blood pressure कम नही होता तो चिकित्सक दवा की मात्रा बढा देते है / ऐसा करना ठीक नहीं होता / इससे अछ्छा है कि allopathy दवा खाने के साथ साथ यदि आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवा खाये तो अधिक फायदा उठा सकते है / अपने नजदीक के किसी वैद्य या होम्योपैथिक चिकित्सक से सम्पर्क करें /
मान्सिक तनाव से दूर रहें और कोशिश करें कि मन को शान्त रखें / आपकी किसी समस्या का हल नही हो रहा है तो उस समस्या के हल के लिये प्रयास करे और सब कुछ ईश्वर के ऊपर छोड दें / यह बात हमेशा ध्यान में रखें कि सब कुछ और बहुत कुछ हम नही कर सकते / मन में इस बात का विश्वास करें और हमेशा POSITIVE THINKING को दिशा दें /
अपने सभी कार्य नियमित करें / कम से कम ७ घन्टा आराम करेम / मश्तिष्क यदि ज्यादा काम करने से थक जाये तो बीच बीच में थोड़ी थोड़ॊ देर के लिये आराम दे /
इन सब उपायों को करने से blood pressure अवश्य सामान्य होगा, इसका विश्वास करें / जब ऐसे उपाय करने से सैकड़ॊ लोगो के blood pressure सामान्य हो गये है तो उन सबका भी  सामन्य होगा , जो यह सलाह अपनायेगे  /
 
email-manojjaiswalpbt@gmail.copm
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सोमवार

ऐसे बचाएं अपनी कंप्यूटर प्राइवेसी

at 23:36
प्रकाशित किया मनोज जैसवाल ने किसी ने घर या ऑफिस में जरूरी ई-मेल देखने के लिए कुछ मिनट आपका कंप्यूटर यूज करने को कहा और आपने हां कर दी। लेकिन आपके हटते ही उसने कंप
्यूटर में My Recents Documents खोलकर ऐसे डॉक्यूमेंट्स को खंगाल डाला जिन पर आपने काम किया था। माइक्रोसॉफ्ट वर्ड और एक्सल में File मेन्यू के नीचे दी गई पिछले डाक्यूमेंट्स की लिस्ट में क्लिक करते हुए आपकी जरूरी फाइलें और फिर इंटरनेट एक्सप्लोरर खोलकर एड्रेस बार पर क्लिक करके आपके द्वारा देखी गई पिछली सभी वेबसाइटों की लिस्ट भी पढ़ डालीं। यानी कुछ मिनटों में वह आपके सारे जरूरी डेटा देखकर चलता बना। वह डेटा, जिसे आपने बड़ी मेहनत से बनाया और 'सीक्रेट' फोल्डरों में छिपाया हुआ था।

विंडोज और दूसरे ऑपरेटिंग सिस्टमों में यूजर की सुविधा के लिए दी गई डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट गलत व्यक्ति के हाथ लगने से असुविधा में बदल सकती हैं। यही बात यूजर की गतिविधियों को रेकॉर्ड करने वाले लॉग्स पर लागू होती है। भले ही आप अपने काम को कितना भी प्राइवेट क्यों न समझते हों, जरूरी सावधानी बरते बिना उसका ब्यौरा हर उस व्यक्ति को उपलब्ध है जो कुछ देर के लिए ही सही, आपके कंप्यूटर पर बैठता है। वजह, कंप्यूटर पर आपकी प्राइवेसी को तोड़ने के औजार भी विंडोज में ही मौजूद हैं। थोड़ी-सी कोशिश से आप कंप्यूटर और इंटरनेट पर किए अपने काम, वहां बनाई अपनी फाइलों आदि का रेकॉर्ड डिलीट कर सकते हैं।

ताजा सॉफ्टवेयरों की लिस्ट :

Start बटन दबाने पर लेफ्ट साइड उन सॉफ्टवेयरों और एप्लिकेशंस की लिस्ट दिखाई देती है जिनका आपने पिछली बार यूज किया था। इसे हटाने के लिए Task Bar पर राइट क्लिक करें। अब Properties दबाकर Start Menu टैब दबाएं और फिर Customoize बटन पर क्लिक करें। अब पहले Clear List और फिर Ok बटन दबाएं। सॉफ्टवेयरों की लिस्ट खाली हो जाएगी। बार-बार यही काम करने के लिए Registry का यूज भी कर सकते हैं। पहले Program फिर Accessories में जाकर Note Pad ओपन करके उसमें ये दो लाइनें लिखें :

REGEDIT4
[-HKEY_CURRENT_USER\Software\Microsoft\Windows\CurrentVersi\\Explorer\RunMRU]\

अब इस फाइल को ''norunmru.reg'' के नाम से (कोट के निशान समेत) सेव कर लें। फाइल के आइकन को डबल क्लिक करें। अब पूछे जाने वाले सवाल का जवाब Yes में दें। विंडोज की Ragistry में आपके ताजा सॉफ्टवेयरों की लिस्ट साफ हो गई है। एक बार कंप्यूटर On-Off या Log Off- Log In करें और उस लिस्ट को लेकर पूरी तरह से बेफिक्र हो जाएं। अब जब भी इसे खाली करना हो, उसी फाइल को यूज कर लें।

लेटेस्ट डाक्यूमेंट्स की लिस्ट :
Programs>My Recent Documents से अपने लेटेस्ट डाक्यूमेंट्स की लिस्ट हटाने के लिए Task Bar पर राइट क्लिक करें। अब Properties दबाकर Start Menu टैब दबाएं और फिर Classic Start Menu रेडियो बॉक्स को चुनते हुए Custmise बटन पर क्लिक करें। अब जो Dialog Box खुलेगा, उसमें Clear बटन दबाते ही आपका काम हो जाएगा। हां, वापसी में Classic Start Menu की जगह पर फिर से Start Menu रेडियो बॉक्स को चुनना न भूलें वरना Start बॉक्स विंडोज के पुराने एडिशन जैसा दिखाई देगा।

अगर आप चाहते हैं कि यह लिस्ट हमेशा के लिए दिखनी बंद हो जाए तो Start बटन दबाने के बाद Run मेन्यू दबाएं और खुलने वाले Dialog के खाली बॉक्स में regedt32 टाइप कर ok दबाएं। ऐसा विंडोज की ragistry को खोलने के लिए किया जाता है। अब HKEY_CURRENT_USER\Software\Microsoft\Windows\Current\Version\Policies\Explorer तक पहुंच जाएं। अब राइट तरफ खुलने वाले बॉक्स में NoRecentDocsHistory ढूंढें। यदि यह मौजूद है तो उस पर डबल क्लिक करके वैल्यू की जगह पर 1 लिखकर ok बटन दबाएं। अगर यह मौजूद नहीं है तो राइट क्लिक करके New| DWORD Value को चुनें और बनने वाली नई प्रविष्टि (न्यू एंट्री) का नाम बदलकर NoRecentDocsHistory कर दें। इस नाम पर डबल क्लिक करें और इसकी वैल्यू की जगह पर 1 लिखकर ok बटन दबाएं। ठीक इसी तरह दो और नई DWORD Values क्रिएट करें, जिनके नाम ClearRecentDocsOnExit और NoRecentDocsMenu रखें। इनकी वैल्यू भी 1 सैट कर दें और बस, प्रॉब्लम हमेशा के लिए खत्म। हां, अपने कंप्यूटर को बंद करके खोलना न भूलें।

आपकी इंटरनेट हिस्ट्री :
आपने इंटरनेट पर कौन-कौन सी वेबसाइटें सर्फ की उनकी डिटेल्स इंटरनेट ब्राउजर की हिस्ट्री में सहेज कर रखी जाती है। डिटेल्स के अलावा कई इमेज, ऑडियो-विडियो फाइलें, कुकीज, फॉर्मों में भरी जाने वाली इन्फमेर्शन आदि भी आपके कंप्यूटर में मौजूद होती है। अगर आप Internet Explorer को यूज करते हैं तो View>Explorer Bar>History में जाकर देखें। इंटरनेट पर पिछले महीनों में आप जहां-जहां गए, उसका सारा हिसाब-किताब संभाल कर रखा हुआ दिखाई देगा। Fire Fox ब्राउजर में यही चीज History टैब पर क्लिक करके Show All History ऑप्शन के जरिए देखी जा सकती है। इन इन्फमेर्शंस और इंटरनेट सर्फिंग के दौरान कंप्यूटर में बनाई जाने वाली टेम्परेरी फाइलों और जमा की गई चीजों को हटाना भी आसान है।

Internet Explorer में अपने पुराने रेकॉर्ड को साफ करने के लिए Tools>Internet Options> Browsing History-Delete तक पहुंच जाएं। Delete बटन दबाने पर खुलने वाले डायलॉग में ब्राउजिंग हिस्ट्री को डिलीट करने के लिए कई ऑप्शन सुझाए जाएंगे। उनमें से अपनी जरूरत के ऑप्शंस को चुनें और बाकी काम कंप्यूटर को करने दें। अगर आप स्थायी रूप से यही व्यवस्था करना चाहते हैं तो दो उपाय आजमाएं :

Tools>Internet Options> Advanced पर जाकर Security ऑप्शन पर जाएं और अब Empty Temporary Internet Files Folder When Browser is Closed ऑप्शन को 'टिक' करें और ok दबाकर बाहर आ जाएं।

2. Tools> Internet Options > General में जाकर Browsing History पर क्लिक करें और Settings से होते हुए History ऑप्शन के सामने जीरो लिखें। यहां आपसे पूछा जाता है कि आप कितने दिनों की वेब एक्सेस का लेखा-जोखा रखना चाहते हैं। जीरो का मतलब हुआ - एक दिन भी नहीं।

अगर आप अपनी कंप्यूटर प्राइवेसी को बचाने के लिए किसी जटिलता में नहीं पड़ना चाहते तो कुछ फ्री सॉफ्टवेयरों को आजमा सकते हैं   
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