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मंगलवार

आइये जानते है नोकिया के कुछ नए स्मार्टफोन्स और टैबलट के बारे में

at 19:48
आइये जानते है नोकिया के कुछ नए स्मार्टफोन्स और टैबलट के बारे मेंसभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। अपने दिए गए वादे के अनुसार इस ब्लॉग पर पोस्टों का क्रम जारी रखते हुए आज की पोस्ट में मैं आपको जानकारी दे रहा हूँ। 'आइये जानते है नोकिया के कुछ नए स्मार्टफोन्स और टैबलट के बारे में''नोकिया ने दुबई के एक इवेंट में कई प्रॉडक्ट्स पेश किए। इनमें नोकिया लूमिया 2520 टैबलट, 6 इंच डिस्प्ले वाले लूमिया 1520, लूमिया 1320 स्मार्टफोन और नोकिया आशा 500, 502 और 3G 503 शामिल हैं।


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बुधवार

आइये जानते है दुनिया की कुछ शीर्ष इंटरनेट कंपनियों के बारे में

at 14:34
आइये जानते है दुनिया की कुछ शीर्ष इंटरनेट कंपनियों के बारे मेंसभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार।
 तकनीक की आंधी में व्यापार की दुनिया भी आज इस तरह से बदल गयी है, जिसका अंदाजा शायद कुछ दशक पहले तक किसी ने नहीं लगाया होगा। पहले किसी भी तरह के नये कारोबार को शुरू करने के लिए जमीन से लेकर उसे बुनियादी ढांचे के निर्माण में बड़ी रकम खर्च करने के अलावा कई सरकारी एजेंसियों से एनओसी (नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) हासिल करना पड़ता था। ऐसे उद्यम या व्यवसाय की स्थापना के साथ ही उसकी संचालन लागत भी बहुत ज्यादा होती है। कारोबारी एक-एक पैसा जोड़ कर अपना कारोबार जमाते हैं, तब जाकर कई वर्षो के बाद उसे एक बड़े बिजनेस के रूप में सेट कर पाते हैं। लेकिन अब नये जमाने में यदि आपके पास बहुत पूंजी नहीं है, लेकिन आप आइडिया के धनी हैं, तो फिर महज कुछ वर्षो में ही अपना कारोबार बहुत ही बड़ा बना सकते हैं। खासकर सेवा क्षेत्र में तो कई कंपनियों ने अच्छा खासा नाम कमाया है। कंप्यूटर और इंटरनेट के कारोबार से जुड़ी कंपनियों ने तो दिन-दोगुना रात-चौगुना वाली वृद्धि दर को हासिल करते हुए दुनिया को चौंका दिया है।
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रविवार

आइये जानते है गूगल के महत्वपूर्ण बदलाव 'शेयर्ड एन्डोर्समेंट्स' के बारे में

at 00:49
आइये जानते है गूगल के महत्वपूर्ण बदलाव 'शेयर्ड एन्डोर्समेंट्स' के बारे में
सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। आज अपने इस ब्लॉग पर लगभग दो महीने के बाद पोस्ट लिख रहा हूँ। इस लम्बे इंतजार के लिए अपने इस ब्लॉग के पाठको से माफ़ी चाहता हूँ। एंव आप सभी को भरोसा देता हूँ, कि इस ब्लॉग पर मेरा लेखन नियमित रहेगा। अब बात करते हैं आज की पोस्ट के बारें में। विश्वस्त सूत्रों से यह खबर आप को दे रहा हूँ। कि अब गूगल अपनी सेवा की शर्तें बदलने वाला है। गूगल अपने सर्विस टर्म्स में बदलाव 11 नवंबर से करने वाला है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि वह आपके फोटो और नाम का इस्तेमाल विज्ञापनों में करना चाहता है। इसके लिए वह आपसे अनुरोध कर रहा है।

चलिए उसके बदलाव को विस्तृत रूप में हम बताते हैं। इसके बाद गूगल प्ले स्टोर से ली गई किसी चीज पर आपका रिव्यू विज्ञापनों में दिख सकता है। यह खासकर तब दिखेगा, जब आपके दोस्तों-परिचितों में से कोई गूगल पर सर्च करेगा। गूगल ने इसे 'शेयर्ड एन्डोर्समेंट्स' का नाम दिया है। 
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सोमवार

आइये जानते है विंडोज़ XP के कुछ विकल्प

at 22:51
आइये जानते है  विंडोज़ XP के कुछ विकल्प अप्रैल 2014 के बाद से माइक्रोसॉफ्ट अपने सफल ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज़ XP को अलविदा कह देगा। बेहतर होगा कि आप एक्सपी के विकल्पों के बारे में सोचें। 

ऑप्शन से पहले तय करें यूज़
ऐसे में आपके पास सिर्फ दो विकल्प हैं। या तो विंडोज़ एक्सपी पर काम करते रहें और अपनी सिक्यूरिटी किस्मत के भरोसे छोड़ दें या फिर किसी बेहतर ऑपरेटिंग सिस्टम को अपना लें। नए ऑपरेटिंग सिस्टम का चुनाव कई बातों पर निर्भर करेगा। सबसे अहम होगा आपका बजट और कामकाज का मौजूदा तौर-तरीका।

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रविवार

नरेंद्र मोदी : एक दमदार नेतृत्व की झलक

at 15:32
नरेंद्र मोदी
नरेंद्र मोदी
इन दिनों नरेंद्र मोदी चाहे जो करें या कहें, वही चर्चा के केंद्र में आ जाता है। इससे यह तो साफ है कि आप मोदी का या तो समर्थन करेंगे या विरोध, लेकिन उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते।

ऐसा लगता है कि विवादों और नरेंद्र मोदी का चोली-दामन का साथ है. हैदराबाद की रैली को लेकर विवाद निपटा नहीं था कि लालकिले से प्रधानमंत्री के भाषण के जवाब में भुज के लालन कालेज में भाषण देकर मोदी ने एक नया विवाद मोल ले लिया।

हालांकि मोदी ने बिगड़ते हालात, राष्ट्रीय सुरक्षा, भ्रष्टाचार, महंगाई जैसे मुद्दों से प्रधानमंत्री के किनारा कर लेने
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सोमवार

धैर्य की परीक्षा - एक प्रेरक कथा

at 14:53
कई बार हम अपनी कमियों को इतना हावी कर लेते हैं कि सक्षम होते हुए भी खुद को कमजोर मान बैठते हैं, जबकि वास्तविकता अलग होती है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए जरूरी होता है खुद को ऐसे क्षेत्र में मजबूत बनाना, जहां से कोई आपको हरा न पाए। एक महत्वपूर्ण पक्ष मेंटरशिप का भी है।आज एक प्रेरक कहानी पेश कर रहा हूँ, एक दुर्घटना में अपनी बायीं बाजू खोने के बावजूद एक 10 साल के लड़के सुरेश ने जूडो सीखने का फैसला किया। वह एक जापानी जूडो मास्टर से ट्रेनिंग लेने लगा। ट्रेनिंग अच्छी चल रही थी। पर सुरेश समझ नहीं पा रहा था कि तीन माह बाद भी उसे केवल एक मूव ही क्यों सिखायी जा रही है, उसे कुछ नया क्यों नहीं सिखाया जा रहा? एक दिन सुरेश ने पूछ ही लिया, मास्टर जी, क्या आप मुझे और मूव्स नहीं सिखाएंगे? मास्टर ने कहा, यही मूव तुम जानते हो और यही एक मूव है, जिसे तुम्हें जानने की जरूरत होगी। सुरेश को बात समझ नहीं आयी, पर मास्टर की बात मानते हुए सुरेश ने प्रशिक्षण जारी रखा। कुछ माह बाद, मास्टर पहली बार सुरेश को एक टूर्नामेंट में लेकर गया। सुरेश हैरत में था, जब उसने पहले दोनों मैच बड़ी आसानी से जीत लिए। तीसरे मैच में थोड़ी-सी परेशानी आयी, पर कुछ समय बाद विपक्षी लड़का धैर्य खो बैठा और बिना सोचे-समझे गलत मूव का इस्तेमाल करने लगा। यही कदम सुरेश की जीत का कारण बना। सुरेश फाइनल में पहुंच चुका था और हैरान था। अंतिम मैच में विपक्षी लड़का उसकी तुलना में बड़ा, मजबूत और अधिक अनुभवी था। यह सोचते हुए कि सुरेश को नुकसान हो सकता है, रेफ्री ने टाइम आउट की घोषणा कर दी। वह मैच खत्म करने की घोषणा करने वाला था, तभी मास्टर ने कहा, नहीं मैच जारी रहने दो। मैच दोबारा शुरू हो गया। तभी विपक्षी लड़का एक ग़लती कर बैठा। उसने अपना गार्ड हटा दिया। उसी समय सुरेश ने अपनी मूव का इस्तेमाल कर दिया और मैच जीत गया। वह उस सिरीज़ का चैंपियन बन गया। घर लौटते समय सुरेश मास्टर के साथ मैच में अपनी हर मूव की समीक्षा कर रहा था। अंत में सुरेश ने साहस करके पूछा, मास्टर जी मैं केवल एक मूव के बल पर यह टूर्नामेंट कैसे जीत गया? मास्टर ने कहा, दो कारण हैं, पहला तुमने जूडो में सबसे मुश्किल माने जाने वाली मूव में महारत हासिल की है। दूसरा, इस मूव से बचने के लिए विपक्षी लड़के को तुम्हारी बायीं बाजू को कब्जे में करना था, जो है ही नहीं।

Manoj jaiswal


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मंगलवार

अब छोटे व्यापारियों को भी बचाइए ?

at 05:20
यकीनन इस समय देश की अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा की भारी कमी को दूर करने के परिप्रेक्ष्य में एक अगस्त, 2013 को मल्टी ब्रांड रिटेल में शर्तों को उदार बनाया गया है। वस्तुत: देश की अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर में है। 2012-13 में चालू खाते का घाटा जीडीपी के 4.8 फीसदी पर पहुंच गया है। बीते वित्त वर्ष में निर्यात 300 अरब डॉलर का हुआ, जबकि आयात 490 अरब डॉलर का। इस क्रम में विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 285 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। इन सबके साथ-साथ डॉलर की तुलना में रुपए के मूल्य में भारी गिरावट और दो अगस्त को भारतीय मुद्रा की कीमत 61.10 रुपए प्रति डॉलर के रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर आने के कारण सरकार ने तेजी से विभिन्न कदम उठाकर देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ाने की डगर पर और आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। निस्संदेह देश में विदेशी निवेश की भारी जरूरत बनी हुई है, ऐसे में मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई से जुड़ी शर्तों में ढील देने के लिए विदेशी रिटेलर्स कंपनियों की तरफ से सरकार पर बढ़ते हुए दबाव के बाद सरकार ने मल्टी ब्रांड रिटेल से जुड़ी मुख्य तीन शर्तों में रियायत दी है। अब मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई वाले रिटेल स्टोर खोलने के लिए 10 लाख की आबादी की पाबंदी नहीं रह गई है, पहले की शर्तों के अनुसार मल्टी ब्रांड में एफडीआई वाले रिटेल स्टोर 10 लाख या इससे अधिक जनसंख्या वाले शहर में ही खोले जा सकते थे।
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रविवार

आइये जानते है पुराने स्मार्टफोन-टैबलेट को अपग्रेड करने के कुछ टिप्स

at 20:30
कुछ समय पहले खरीदा गया स्मार्टफोन या टैबलेट क्या चंद फीचर्स नहीं होने के कारण पुराना लगने लगा है? नए के लिए दोबारा से 10 से 30 हजार रुपये खर्च न करने के कारण क्या आप पुराने फीचर्स ही इस्तेमाल करने को विवश हैं? यदि आप यह जवाब हां में सोचते हैं, तो कैसे अपने पुराने गैजेट को नया बना सकते हैं, डिजिटल गैजेट्स इस्तेमाल करने वाले लोगों की अक्सर यह शिकायत होती है कि उनके स्मार्टफोन या टैबलेट में फलां फीचर मौजूद नहीं है। मिसाल के तौर पर आज भी बहुत सारे लोग अपने गैजेट में हिंदी (देवनागरी) टाइप करने की सुविधा मौजूद न होने से परेशान हैं। हालांकि उसी गैजेट के नए संस्करण में हिंदी यूनिकोड समर्थन मौजूद है। ऐसे लोगों को नया स्मार्टफोन या टैबलेट खरीदने की सलाह नहीं दी जा सकती, क्योंकि वे पिछले गैजेट की खरीद पर 10 से 30 हजार रुपए तक खर्च कर चुके होते हैं। सिर्फ कुछेक नई सुविधाओं के लिए ऐसा भारी-भरकम खर्च कोई क्यों करना चाहेगा? तो क्या ऐसे लोग पुराने संस्करण की सीमाओं में बंधे रहने के लिए हमेशा के लिए विवश हैं? आप जानते हैं कि किसी भी गैजेट को चलाने वाले सॉफ्टवेयर को ऑपरेटिंग सिस्टम कहते हैं। वह जितना सक्षम होगा, गैजेट उतना ही शक्तिशाली और उपयोगी होगा। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि उनके पुराने गैजेट में ही नया ऑपरेटिंग सिस्टम इन्स्टॉल हो जाए, अपनी सभी सुविधाओं, फीचर्स, चेहरे मोहरे और क्षमताओं के साथ? यानी पुराना फोन बन जाए नया और ट्रेंडी? बिना कुछ खर्च किए! पुराने एंड्रॉयड फोन (एंड्रोयड 2.2 फ्रोयो और उससे पहले) में हिंदी का समर्थन मौजूद नहीं था। क्या उस फोन में एंड्रॉयड का ताजातरीन संस्करण (4. 2 जेली बीन) इन्स्टॉल नहीं हो सकता, जिसमें हिंदी बड़े आराम से काम करती है? ऐसा हो तो हिंदी ही क्यों, बेचारे उपयोक्ता दर्जनों नए फीचर्स इस्तेमाल कर सकेंगे। सौभाग्य से हैंडहेल्ड गैजेट्स को संचालित करने वाले गूगल एंड्रॉयड व एपल आईओएस ऑपरेटिंग सिस्टमों को अपग्रेड करना संभव है।

एंड्रॉयड (टैबलेट, स्मार्टफोन के लिए)

अगर आपके स्मार्टफोन या टैबलेट में मौजूद एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम ‘ओवर द एयर’ अपग्रेड सुविधा  से  अपग्रेड नहीं हो रहा, तो उसे मैनुअली अपग्रेड कर सकते हैं।  सबसे नया एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम 4. 2 (जेली बीन) है। अपग्रेडेशन से पहले गैजेट में मौजूद सभी जरूरी डाटा का बैकअप ले लेना चाहिए। हालांकि अपग्रेड में आपका डाटा डिलीट नहीं होता, पर सावधानी बरतने में बुराई नहीं है।
1. यह देख लें कि गैजेट इंटरनेट से कनेक्टेड है।
2. ‘सेटिंग्स’ आइकन/मेन्यू पर क्लिक करें।
3. खुलने वाले मेन्यू में  ‘अबाउट  फोन’ या ‘अबाउट टैबलेट’ पर क्लिक करें।
4. यहां ‘सॉफ्टवेयर अपडेट’ या  ‘सिस्टम अपडेट’ पर क्लिक करें।
5. आपका गैजेट इंटरनेट पर मौजूद अपडेट की खोज शुरू कर देगा। अगर अपग्रेड की पुष्टि के बारे में पूछा जाए तो कर दें।
6. अपग्रेड उपलब्ध होने पर ऑपरेटिंग सिस्टम का नया संस्करण इन्स्टॉल करने के लिए आपकी मंजूरी ली जाएगी।
7. आपके हां कहने पर नया वर्जन डाउनलोड और इन्स्टॉल हो जाएगा। गैजेट बंद होकर नए रंग-रूप और ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ चालू होगा।

आई-ओएस (आई-पैड, आई-फोन के लिए)

आई-पैड और आई-फोन को एपल का आई-ओएस (ड्रर) नामक ऑपरेटिंग सिस्टम संचालित करता है। आई-ओएस 5 और उसके बाद के संस्करणों को इंटरनेट की मदद से ताजा ऑपरेटिंग सिस्टम में अपग्रेड करना संभव है। आई-ओएस का ताजातरीन संस्करण 6.1 है। अपने एपल गैजेट को नए ऑपरेटिंग सिस्टम से लैस करने के लिए यह प्रक्रिया आजमाएं।
1. सेटिंग्स पर क्लिक करें और उसके बाद ‘जनरल’ पर।
2. अब सॉफ्टवेयर अपडेट पर क्लिक करें, जिसके बाद सिस्टम आपके लिए उपलब्ध अपग्रेड की तलाश शुरू कर देगा।
3. अगर अपग्रेड उपलब्ध है तो आपको बताया जाएगा।
4. ‘डाउनलोड’ बटन दबाने पर नया संस्करण डाउनलोड होने लगेगा।
5. डाउनलोड  के बाद दिखने वाले बॉक्स में ‘इन्स्टॉल’ बटन दबाएं।
6. इन्स्टॉलेशन पूरा होने के बाद सिस्टम रीस्टार्ट होगा और लौटेगा एकदम नई-नवेली स्क्रीन के साथ।
एहतियात: बेहतर होगा कि अपने गैजेट को अपग्रेड करने की प्रक्रिया के दौरान वाई-फाई इंटरनेट कनेक्टिविटी का इस्तेमाल करें। इससे आपकी डाटा सर्विस का बिल सीमित रहेगा।

ब्लैकबेरी (स्मार्टफोन)

ब्लैकबेरी गैजेट को नए ब्लैकबेरी ऑपरेटिंग सिस्टम में अपग्रेड करने के लिए कंप्यूटर की मदद लेना बेहतर है। हालांकि आप चाहें तो स्मार्टफोन की अपनी Over The Air अपडेट सुविधा का भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए Home स्क्रीन पर  Options पर क्लिक करने के बाद Device और फिर   Software Updates विकल्प का प्रयोग करें। इसके लिए स्मार्टफोन में इंटरनेट कनेक्टिविटी मौजूद होनी चाहिए।
कंप्यूटर के जरिए अपग्रेड करने की प्रक्रिया इस तरह है-
1. पहले  कंप्यूटर में रिसर्च इन मोशन (ब्लैकबेरी का विकास करने वाली कंपनी) की वेबसाइट  us.blackberry.com पर जाकर नए ब्लैकबेरी ऑपरेटिंग सिस्टम की फाइल डाउनलोड करें।
2. साइट के होमपेज पर  ऊपर नेवीगेशन मेन्यू में सॉफ्टवेयर  लिंक पर क्लिक करें। खुलने वाले मेन्यू बॉक्स में Smartphone Software के नीचे नए ब्लैकबेरी ऑपरेटिंग सिस्टम की सूची दिखाई देगी। यहां पसंद के सॉफ्टवेयर पर क्लिक करें। याद रखें, Blackberry 7 या उससे नीचे के सॉफ्टवेयर वाले स्मार्टफोन में Blackberry 10 OS इन्स्टॉल नहीं होता है। दोनों पूरी तरह अलग हैं।
3.  पसंदीदा ब्लैकबेरी ऑपरेटिंग सिस्टम पर क्लिक करने के बाद जो पेज खुलेगा, उसमें Update your Blackberry Software दिखाई देगा। इसे क्लिक करें। खुलने वाले पेज में आपके मौजूदा स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम का पता लगाने की भी सुविधा है। इसी पेज पर Update on the Web नामक खंड में जाकर Check For Updates बटन दबाएं।
4. आपके स्मार्टफोन को जांचने और उसके अनुकूल एडवांस्ड ब्लैकबेरी सॉफ्टवेयर मौजूद होने पर डाउनलोड होना शुरू हो जाएगा।
5. यदि नया ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध है तो वह डाउनलोड होने लगेगा और ब्लैकबेरी स्मार्टफोन के अपग्रेड होने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस प्रक्रिया के दौरान स्मार्टफोन रीस्टार्ट हो सकता है।
6. प्रक्रिया खत्म होने पर आपके ब्लैकबेरी स्मार्टफोन का ऑपरेटिंग सिस्टम बदल जाएगा। हाजिर है एकदम नया और अपडेटेड संस्करण। स्मार्टफोन के किसी फीचर में आई समस्या दूर करने के लिए भी अपग्रेड सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है।

 मनोज जैसवाल

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शनिवार

सावधान : फेसबुक पर वायरस है उस पर क्लिक मत करिये !!

at 21:50
अगर आप फेसबुक यूज़र हैं तो सावधान होने की जरूरत है। 'एन29एन29' एक अश्लील वीडियो है जिसमें वायरस है। क्लिक करते ही यह आपके दोस्तों और रिश्तेदारों में आपको बदनाम कर देगा।दरअसल 'एन29एन29' एक कोड है जिसे किसी अश्लील वीडियो के साथ एंबेड कर फेसबुक फीड पर डाल दिया जाता है। जब आप फेसबुक फीड पर कोई अश्लील वीडियो देखें तो उसे किसी भी तरह क्लिक करने की चूक न करें।चाहे देखने के लिए या डिलीट करने या शेयर करने के लिए। इसे क्लिक करते ही यह अश्लील वीडियो कई बार आपकी टाइमलाइन पर पोस्ट हो जाएगा।इसके तुरंत बाद आपसे फेसबुक पर जुड़े सभी लोगों की टाइमलाइन पर ये वीडियो इस मैसेज के साथ पहुँचेगा कि आपने इसे देखा और आपको बेहद पसंद आया।ये भी लिखा होगा कि आपने उनकी वॉल पर ये वीडियो पोस्ट किया है। इस वायरस को सबसे ज्यादा उस वीडियो के साथ भेजा जा रहा है जिसमें एक लड़की खड़ी है और उसके हिप्स की एक झलक दिखाई दे रही है।इस वीडियो में ये भी लिखा रहता है कि इस लड़की ने शराब के नशे में बीच सड़क पर अपने सारे कपड़े उतार दिए। ये सब देखकर अगर आपने अगर उस वीडियो पर ग़लती से भी क्लिक कर दिया तो आपको बदनाम होने से कोई नहीं बचा सकता।इससे पहले भी इस तरह के कई वायरस फेसबुक यूजर्स के लिए परेशानी का सबब बन चुके हैं।

जियस वायरस

जियस वायरस (Zeus) भी फेसबुक पर जबरदस्त तरीके से फैला हुआ है। यह वायरस आपके बैंक अकाउंट को खाली कर सकता है।फेसबुक पर कोई भी ऐसा लिंक जो संदेहास्पद हो, उस पर क्लिक करते ही यह 'जियस' आपके सिस्टम में अपनी जगह बना लेता है। वायरस को जब तक अपने मतलब की जानकारी नहीं मिल जाती तब तक वह इंतजार करता है। मान लीजिए अभी तक आपने ना तो इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल किया और न ही कहीं लॉगइन डिटेल्स सेव की हैं तो ऐसी स्थिति में यह वायरस सही वक्त का इंतजार करेगा।यानी कि जब भी आप ऑनलाइन बैंकिंग के लिए अपना लॉगइन आईडी और पासवर्ड डालेंगे, यह वायरस उन्हें चुरा लेगा।

लिंकस्पैम वायरस

फेसबुक पर लिंकस्पैम वायरस (linkspam virus) के चलते भी कई लोगों को अपने अकाउंट तक को बंद करना पड़ा।जेडडीनेट नामक साइट दावा किया था कि यह वायरस फेसबुक यूजर्स को सीधे तौर से किसी लिंक पर क्लिक करने के लिए उकसाता है।कई यूजर्स ने दावा किया कि कि उन्होंने साइट पर बेहद ही डरावनी और अश्लील तस्वीरें देखीं। उन्हें ये तस्वीरें यूजर्स की न्यूजफीड्स में दिखाई दी।


 Manoj jaiswal

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शुक्रवार

फेसबुक ने लाँच किये वेरिफाइड पेज और वेरिफाइड अकाउंट्स

at 01:15
दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने ट्विटर की तरह वेरिफाइड पेज और वेरिफाइड अकाउंट्स लांच किए हैं।

अब आप फेसबुक पर यह आसानी से जान पाएंगे कि आपके फेवरेट स्टार का सही अकाउंट कौन सा है? इससे पहले सोशल नेटवर्किंग साइट पर सही और गलत अकाउंट के बारे में जानना मुश्किल था।

अभी फेसबुक ने इस तरह के पेज की शुरूआत सेलिब्रिटी, जर्नलिस्ट, सरकारी अधिकारी, पॉपुलर बिजनेस ब्रांड के लिए की है। नई सर्विस के बाद यूजर को सही अकाउंट की पहचान करने में आसानी होगी।

 'वेरिफाइड पेज' पर ब्लू कलर का छोटा सर्किल दिखाई देगा। इस घेरे में व्हाइट कलर का का राइट का निशान बना होगा, जो कि सही अकाउंट की पहचान होगी।

इसी निशान से आपको पता चलेगा कि जो पेज आप फॉलो करने जा रहे हैं वह सही है या नहीं। चुनिंदा सेलिब्रिटी के वेरिफाइड अकाउंट ओपन करने के लिए क्लिक करें।

अमिताभ बच्चन

सलमान खान

प्रियंका चोपड़ा

एमएस धोनी

सचिन तेंदुलकर





Manoj jaiswal 

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बुधवार

अब नए फेसबुक की नई न्यूज़ फीड अब इंडिया में भी

at 15:22
 भारत में फेसबुक यूज़र्स के लिए खुशखबरी है। अब भारत में फेसबुक यूज़र्स नई न्यूज़ फीड पा सकते हैं। नए डिजाइन का ऐलान मार्च में किया गया था। इस न्यूज़ फीड में बड़ी फोटो के साथ विज़ुअल पर ज्यादा जोर दिया गया है।

नए यूज़र इंटरफेस में कैप्शन के साथ बड़ी और बेहतर फोटो दिखती हैं। इसमें फोटो के आस-पास काफी खाली जगह भी है, जिससे फोटो पर पूरा ध्यान जाता है।

ऐसा लगता है कि न्यूज़ फीड का नया लुक गूगल प्लस को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इसमें आर्टिकल और विडियो के थम्नेल के साथ-साथ फॉन्ट भी बड़ा दिखता है।

लेफ्ट पैन में प्रोफाइल, पेज और ग्रुप के लिंक के साथ चैट बार है। नए लुक में इस पैन को छिपाया नहीं जा सकता है। इसमें अगर आपके दोस्तों में से कई लोग एक ही चीज़ शेयर करते हैं, तो उसकी जानकारी टेक्स्ट की जगह उसकी फोटो के साथ मिलेगी। नए लुक में एक खास बात यह है कि आप चुनिंदा अपडेट्स पा सकते हैं।

नई न्यूज़ फीड फेसबुक के सभी यूज़र्स को धीरे-धीरे मिलेगी। लेकिन आप फेसबुक की वेटिंग लिस्ट में शामिल होकर इसे जल्दी पा सकते हैं। इसके लिए यहां क्लिक करिए और खुलने वाले पेज पर सबसे नीचे जाइए। यहां आपको रिक्वेस्ट के साथ ही पता चल जाएगा कि आपके किन-किन दोस्तों ने नई न्यूज़ फीड अपनाई है मैने  तो इसमे अपना नाम शामिल कर लिया है आप भी इसमे शामिल हो सकते हैं।


Manoj jaiswal

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सोमवार

आखिर हम किसके लिये कमाते है ?

at 00:29
मनोज जैसवाल : सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। आपने अपने आसपास ऐसे कई लोगों को देखा होगा, जो जिंदगी भर मर-मर कर कमाते हैं. एक-एक रुपया जोड़ते हैं, महंगी चीजें नहीं खरीदते, पसंद का खाना नहीं खाते. सोचते हैं कि अभी मैं कमा लूं, बचत कर लूं ताकि बुढ़ापे में यह रुपया मेरे काम आयेगा. तब मैं ऐशो-आराम से रहूंगा। यह सोच अच्छी है. बचत करना भी चाहिए, लेकिन क्या यह बचत खुशियों के बदले करना सही है? यहां मैं अपने एक मित्र का उदाहरण देता हूँ। बचपन से लेकर जवानी तक उन्होंने खूब पढ़ाई की. वे बिल्कुल अपने पिताजी के नक्शे-कदम पर चल रहे थे. पिताजी की तरह कहीं भी फालतू रुपये बरबाद नहीं करते थे। उनकी सरकारी नौकरी भी लग गयी, वे और मेहनत करने लगे. दिन-रात फाइलों में लगे रहते. पत्नी-बच्चे कहते कि घर पर समय बिताओ. हमें घुमाने ले जाओ, तो वे एक ही जवाब देते. यह सब काम मैं तुम्हारे लिये ही तो कर रहा हूं। अभी रुपये जोड़ लूं ताकि बाद में हमें कोई परेशानी न हो। वैसे भी इधर-उधर घूमने-फिरने से रुपये बरबाद होंगे। 55 साल की उम्र में वे 75 के दिखने लगे। ज्यादा काम करने की वजह से उनकी तबीयत खराब होने लगी 60 साल की उम्र में वे रिटायर हो गये। इधर उनके बच्चों ने उनका साथ छोड़ दिया और दूसरे शहर में बस गये पत्नी का स्वर्गवास हो गया अब उनके पास ढेर सारे रुपये हैं, लेकिन उनकी घूमने-फिरने की उम्र जा चुकी है। बीमारी की वजह से वे कहीं नहीं जा सकते. दिन भर घर पर ही रहते है उदास और अकेले। यह सोचने का विषय है कि हम आखिर किसके लिये कमाते है? मर-मर कर जीने के लिए? हमें समझना होगा कि भविष्य के लिए बचत जरूरी है। लेकिन खुशियों के बदले नहीं इसे आजमायें, जब भी आपको सैलरी मिले या बिजनेस में मुनाफा हो। खुशियां मनायें. आधे रुपये बचत में डालें और आधे रुपयों से अपने पर लगाएँ महीने में कम-से-कम एक बार अपनी आत्मा को तृप्त करने के लिए कोई काम करें। शॉपिंग करें, अच्छे महंगे होटल में जाकर खाना खायें, मसाज, मेनिक्योर, पेडिक्योर करायें. वीकेंड मनाने कही जायें. होटल में बाथ टब में रिलैक्स करें। इस तरह आप काम करने के लिए खुद को तैयार भी कर लेंगे और इन्जॉयमेंट भी हो जायेगा।

manoj jaiswal


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शनिवार

आइये जानते हैं करेले के फायदे

at 02:39
मनोज जैसवाल : सभी सब्जियों में करेला सबसे कसैला होता है लेकिन दूसरी किसी भी सब्जी की तुलना में अधिक गुणकारी होता है.
करेले में दूसरी किसी सब्जी की तुलना में अधिक औषधीय गुण छिपे होते हैं. करेला उष्णकटिबंधीय और उन क्षेत्रों में पैदा होता है जहां कम बारिश होती है.

यह कुकरबिटासीने फैमिली की सब्जी है. आमतौर पर करेला एशिया, अफ्रीका और कैरेबियाई देशों में पैदा किया जाता है. सभी सब्जियों में करेला सबसे कसैला होता है.

इसमें फास्फोरस पाया जाता है. इस वजह से करेला खाने वाले को कफ की शिकायत नहीं होने पाती. इसमें प्रोटीन तो भरपूर पाया जाता है. इसके अलावा करेले में कैल्शियम, काबरेहाइड्रेट और विटामिन पाये जाते हैं. करेले की छोटी और बड़ी दो प्रकार की प्रजाति होती है, जिससे इनके कसैलेपन में भी अंतर आता है.

अनेक किस्में


करेला विभिन्न आकार-प्रकार में पाया जाता है. इसकी चाइनीज वेरायटी 20 से 30 सेंटीमीटर लंबी होती है. वहां पैदा होने वाला करेला हरे के ऊपर हल्का पीला रंग लिए होता है जो किनारों की ओर मुड़ा हुआ नुकीला और खुरदुरा होता है. इसका रंग हरे के साथ सफेद लिए भी देखा गया है.

फायदे

जिन लोगों को कफ की शिकायत रहती है उन्हें करेले का नियमित सेवन करना चाहिए.

करेला हमारी पाचन शक्ति को बढ़ाता है, जिससे भूख खुलकर लगती है. यह ठंडा होता है. इसलिए यह गर्मी के कारण पैदा होने वाली बीमारियों को दूर करता है. जिन लोगों को दमे की शिकायत रहती है, उन्हें करेले की सब्जी अवश्य खानी चाहिए.
लकवे के रोगियों को करेला जबरदस्त फायदा पहुंचाता है. दस्त और उल्टी की शिकायत की सूरत में करेले का रस निकालकर उसमें काला नमक और थोड़ा पानी मिलाकर पीने से फायदा देखा गया है.

डायबिटीज का रामबाण

करेला खून साफ करता है. एक चौथाई करेले के रस में बराबर मात्रा में गाजर का रस मिलाकर पीना फायदेमंद है. डायबिटीज से पीड़ित लोगों को करेले का रस और सब्जी, दोनों का सेवन करना मुफीद रहता है.

15 ग्राम करेले का रस 100 ग्राम पानी में मिलाकर रोज चार बार पीने से एक महीने के भीतर डायबिटीज में लाभ होता है. 50 ग्राम करेले को 100 ग्राम पानी में उबालकर गटकने से डायबिटीज में फायदा होता है.

रोजाना 5 ग्राम करेले का रस पीते रहने वाले लोगों को डायबिटीज में फायदा दिखने लगता है. करेला अन्य औषधियों के समान शरीर के केवल एक अंग या टिशू को ही टाग्रेट नहीं बनाता बल्कि पूरे शरीर के ग्लूकोज मैटाबॉलिज्म पर असर करता है.

सूखे करेले को पीस कर उसके 6 ग्राम चूर्ण को दिन में सिर्फ एक बार लेने से मूत्र में चीनी आना थम जाता है. बच्चे को डायबिटीज होने पर उन्हें प्रतिदिन करेले की सब्जी खिलाते रहने से काफी लाभ होता है.



  
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गुरुवार

आइये जानते हैं करेंसी वार के बारें में

at 04:27
मनोज जैसवाल : इस वक्त विश्व के सभी देश या तो अपनी इकोनॉमी को बचाने में या गिरती इकोनॉमी को उबारने में लगे हैं। इस प्रक्रिया में अब इंटरनैशनल इकोनॉमी में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। यह ट्रेंड है अपनी करेंसी यानी मुद्रा को गिराने, उठाने या एक स्तर पर कायम रखने की जद्दोजहद। अमेरिका ने 2008 में यह ट्रेंड शुरू किया था, जब उसकी इकोनॉमी बुरी तरह मंदी की चपेट में थी। उसके बाद यूरोपीय देशों ने इसे अपनाया, फिर चीन ने। अब जापान भी अपनी इकोनॉमी को स्लोडाउन से उबारने के लिए करेंसी में उतार-चढ़ाव करने का सहारा ले रहा है। इसे करेंसी वार का नाम दिया गया है। भारत अब तक इंटरनैशनल करेंसी मार्केट में सामान्य कारोबार का पक्षधर रहा है। मगर मौजूदा परिस्थितियां खुल कह रही है कि जल्द ही हमें भी करेंसी वार का सामना करना पड़ेगा। बेहतर होगा कि भारत अभी से इसके लिये खुद को तैयार करे। उसे भी इसमें शामिल हो जाना चाहिए। इसे राजनीतिक चश्मे से देखने की कोई जरूरत नहीं है। इस राह में विशुद्ध आर्थिक सोच के जरिये बढ़ना ही भारत के लिये फ़ायदेमंद रहेगा। 

 क्या है करेंसी वार? 

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में उसकी करेंसी की प्रमुख भूमिका होती है। घरेलू मार्केट से लेकर इंटरनैशनल मार्केट तक दामों में उतार-चढ़ाव करेंसी की वैल्यू ही तय करती है। भारत और बाकी देशों का आपसी कारोबार डॉलर पर ही निर्भर करता है। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपये की जितनी वैल्यू होगी, उसी के आधार पर उसका इंपोर्ट या एक्सपोर्ट मूल्य तय होता है। साल 2008 में जब अमेरिका में स्लोडाउन आया तो उसने डॉलर को मजबूत करने और बाकी मुद्राओं को कमजोर करना आरंभ कर दिया। एक डॉलर की वैल्यू हो गई 55 रुपये। इसका मतलब यह हुआ कि अब भारत जब भी अमेरिका से कोई वस्तु डॉलर में खरीदेगा तो उसे एक डॉलर की तुलना में ज्यादा रुपये देने होंगे। इसके दो फायदे होंगे। एक तो अमेरिका में ज्यादा मनी फ्लो होगा। दूसरे भारत को इंपोर्ट पर ज्यादा पैसा खर्च करना होगा। इससे उसकी इकोनॉमी कमजोर होगी और ज्यादा विदेशी मुद्रा की जरूरत होगी। इसके चलते डॉलर की डिमांड बढ़ेगी और वह ज्यादा कीमत पर बिकेगा। 
 अमेरिका, चीन, जापान 

इसकी देखादेखी चीन ने अलग प्रयोग किया। उसने अपनी इकोनॉमी को देखते हुए अपनी करेंसी का एक तर्कसंगत लेवल तय किया ताकि उसका विदेशी कारोबार स्थिर रहे, महंगाई पर नियंत्रण बना रहे और विकास की गति को तेज किया जा सके। इस बारे में चीन की आलोचना भी हुई। चीन ने तब कहा था कि आने वाले समय सभी को इसकी जरूरत पड़ेगी। अब जापान भी इस दौड़ में शामिल हो गया है। उसने अपनी करेंसी येन को डॉलर के मुकाबले गिराना शुरू कर दिया। अभी एक डॉलर की कीमत 100 येन से भी ऊपर चली गई है। जापान को इस वक्त चाहत ज्यादा विदेशी निवेश की है। वह अपने यहां मनी फ्लो बढ़ाना चाहता है। उसने साफ कह दिया है कि जब स्थिति ठीक हो जाएगी, वह अपनी करेंसी का लेवल ठीक कर लेगा। इंटरनैशनल इकोनॉमी में शुरू हुये इस करेंसी वार का दबाव भारत पर यह आना शुरू हो गया है कि वह एक लेवल से ज्यादा अपनी करेंसी को गिरने न दे। यह बात भी दबी जुबान से होने लगी है कि भारत को अपनी इकोनॉमी, वित्तीय घाटे, महंगाई और विदेशीव्यापार को देखते हुये अपनी करेंसी का सही और तर्कसंगत लेवल तय करना पड़ेगा। डॉलर के मुकाबले रुपये का कौन सा लेवल भारत की इकोनॉमी के लिये ठीक रहेगा, इस पर भारत के दिग्गज अर्थशास्त्री अभी खुले तौर परकुछ बोल नहीं रहे है। उनके सामने सबसे बड़ा खतरा अमेरिका या चीन नहीं, देश की विपक्षी पार्टियां हैं, जोचुनावी मंच पर इस मुद्दे को भुना सकती है। लेकिन यह वक्त की दरकार है। करेंसी वार में भारत को शामिल होनाही पड़ेगा। इस काम में भारत जितनी देर करेगा, उतना नुकसान उसे उठाना पड़ सकता है। ऐसे में बेहतर है कि भारत की सभी राजनीतिक पार्टियां देश की वित्तीय सेहत की भलाई के लिये इस पर राजनीति न करें। संभव है,ऐसी राजनीति से उनको कुछ फायदा हो जाए, मगर आर्थिक रूप से देश को बड़ा नुकसान होना तय है। 

 मुद्रा और राजनीति 

आम आदमी फिलहाल करेंसी वार की तकनीकी को नहीं जानता है। ऐसे में राजनीतिक पार्टियां रुपये की कीमत में आए बदलाव को सियासी मुद्दा बना सकती हैं। करेंसी वार को नेगेटिव पैकेजिंग देकर कहा जा सकता है कि यहदेश और आम आदमी के लिये ठीक नहीं है। हमारे देश में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि हमें किसी भी नई बात को अपनाने में काफी वक्त लगता है। सत्ता में बैठी पार्टी को इस बात का डर हमेशा लगा रहता है कि पता नहीं आमलोग या वोटर इस नीति को लेकर क्या प्रतिक्रिया देगा। इसका राजनीतिक लाभ उसको मिलेगा या विपक्षी दलों के खाते में चला जाएगा। यही कारण है कि कई अहम फैसले लेने के बाद उन्हें लागू करने में काफी समय लगजाता है। मगर करेंसी वार जिस तरह से आगे बढ़ रहा है, उसको देखते हुए इसे टालते रहना ठीक नहीं होगा। यहअर्थशास्त्रियों और नीति निर्धारकों पर निर्भर है कि वे इस मामले को कैसे लेते हैं और किस तरह से आम आदमी केबीच इसे ले जाते हैं। यह बात तो तय है कि अगर करेंसी वार पर राजनीति हुई, नीति बनाने के साथ फैसला लेने में देरी हुई तो इसका खामियाजा भारतीय अर्थव्यवस्था को तो भुगतना ही होगा, साथ में इसकी गाज सीधे तौर पर आम आदमी पर गिरेगी। 
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शुक्रवार

क्रोध में इन बातों का रखें ख्याल

at 01:26
 क्रोध में इन बातों का रखें ख्याल,क्रोध को नकारात्मक भाव समझा जाता है। क्रोध के समय नकारात्मक भावनाएं उत्पन्न होकर कई बार महत्वपूर्ण रिश्तों में भी जीवन भर के लिए दरार डाल देती हैं।  क्रोध मूर्खता से शुरू होता है और पश्चाताप पर खत्म होता है। फिर भी कई लोग क्रोध से खुद को दूर नहीं रख पाते। यदि वे क्रोध को नियंत्रित नहीं कर सकते, तो उसे रचनात्मक बनाकर इससे होने वाली बीमारियों और नुकसान से अवश्य बच सकते हैं। जब किसी व्यक्ति पर क्रोध आने लगे, तो उसी क्षण अपनी आंखें बंद करके उस व्यक्ति की हास्यास्पद तस्वीर मन में बना लें या किसी चुटकुले का पात्र उस व्यक्ति को बना दें। इसी तरह अपने साथ हास्य-व्यंग्य, प्रेरणा देने वाले व्यक्तियों की पुस्तकें और डायरी हमेशा साथ रखें। जब क्रोध से भुजाएं फड़कने लगें, तो तुरंत डायरी और पेन लेकर कुछ भी लिखने बैठ जाएं।  ‘क्रोध वह प्रक्रिया है, जिसमें आपका मुंह आपके दिमाग के मुकाबले काफी तेजी से काम करने लगता है। इस मुंह को बंद करने के लिए रचनात्मक कार्यो में अपना ध्यान लगाएं। क्रोध के कारण विचार मन में उत्पन्न न हो, तो आड़ी-टेढ़ी रेखाएं ही पेपर पर खींचें। कई बार अनायास ही आड़ी-टेढ़ी रेखाओं की आकृति में अत्यंत कलात्मकता के दर्शन होते हैं। यदि कुछ लिख सकते हैं, तो क्रोध के समय विचारों को लेख और कविता में ढालने का प्रयत्न करें। क्रोध धीरे-धीरे आपके नकारात्मक भावों को उभारने की बजाय आपकी प्रतिभा और रचनात्मकता को तराशने का केंद्र बन जाएगा। जीवन में निराशा, भाग-दौड़, दुख-दर्द, नुकसान आदि लगे रहते हैं, इनको जड़ से मिटाना मुश्किल है। हां, क्रोध को रचनात्मक बनाकर और क्रोध के समय चुप्पी साधते हुए स्वयं को अन्य कामों में लगाकर आप अपने जीवन की लंबी दौड़ में ज्यादा सुखी और स्वस्थ अवश्य रह सकते हैं।

manoj jaiswal
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मंगलवार

मसूड़ों की सूजन ( एक गंभीर समस्या )

at 13:34
मसूड़ों की सूजन एक बहुत ही आम सी समस्या है। इस का सब से आम कारण है ---मसूड़ों की सूजन । इस मसूड़ों की सूजन का सब से आम कारण है –दांतों पर टारटर का जम जाना ---जिसे अंग्रेज़ी में हम लोग डैंटल कैलकुलस कह देते हैं।

इस तस्वीर में आप देख रहे हैं कि इस लगभग 50 वर्ष की महिला में कितनी बुरी तरह से नीचे के आगे वाले दांतों को मसूड़े ने छोड़ दिया है  और यह सब हुआ इस टारटर ( दांत पर जमा मैल का पत्थर ) की वजह से ---जैसे जैसे यह बढ़ता वैसे वैसे यह मसूड़े में सूजन के साथ साथ उसे दांत से अलग भी करता है है गया।अब इस का इलाज क्या है ? यह तो तय है कि इस सारी प्रक्रिया में दांत की नीवं कमज़ोर पड़ जाती है और अकसर यह हिलना भी शुरू कर देता है। इस का इलाज इस बात पर निर्भर है कि दांत से मसूड़ा किस कद्र अलग हो चुका है ---हां, दांतों से मसूड़े के अलग होने की अवस्था को मैडीकल भाषा में कहते हैं ----जिंजिवल रिशैशन ( gingival recession).

वैसे छोटी उम्र में अगर किसी एक-दो दांतों में ही यह समस्या है तो इस टारटर को हटाने के साथ साथ एक सर्जरी जिसे जिंजिवल ग्राफ्टिंग ( gingival graft) कहते हैं इस से इस समस्या का हल निकाला जाता है। लेकिन इस तरह के इलाज को केवल प्रशिक्षित पैरियोडोंटिस्ट ( मसूड़ों के रोग के विशेषज्ञ ---जिन्होंने इस विषय में एमडीएस की होती है) से ही करवाना बेहतर होता है।

कुछ और भी कारण हैं जिस की वजह से मसूड़े दांत से पीछे हट जाते हैं –इन में से एक दो की और चर्चा करते हैं। एक और महत्वपूर्ण कारण है ---- दांतों पर गलत तरीके से ब्रुश अथवा दातुन का इस्तेमाल करना ----और इस साफ़-सफाई को इतने जोशो-खरोश से करते रहना कि आस पास का मसूड़े दांत से पीछे हट जाने में ही अपनी सलामती समझने लगते हैं।
 manoj jaiswal

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गुरुवार

अब पाइये गूगल स्मार्टफोन 2700 रुपये में

at 18:14
सबसे बड़ा सर्च इंजन गूगल जल्द ही अपना स्मार्टफोन पेश करने वाला है। इस बारे में गूगल के एक्जक्यूटिव चेयरमैन ने बताया कि गूगल फोन सस्ता और कई आकर्षक फीचर्स वाला होगा।

गूगल के एक्जक्यूटिव चेयरमैन एरिक श्मिट ने बताया कि गूगल ने स्मार्टफोन 'एक्स फोन' को मोटोरोला के साथ मिलकर तैयार किया है। एक्स फोन देखने में आकर्षक और कई फीचर्स वाला है।

पिछले कुछ महीनों से गूगल फोन के बारे में तेजी से चर्चा चल रही है, मोबाइल कांफ्रेंस में दिए अपने इस बयान के बाद श्मिट ने अटकलों से विराम लगा दिया है।

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शनिवार

प्राण एक सशक्‍क्त अभिनेता ( एक परिचय )

at 11:23
पर्दे पर खलनायक का किरदार निभाने वाले विलेन प्राण को दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिला है। शुक्रवार की शाम इस अवॉर्ड की घोषणा की गयी है। प्राण पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे हैं। 

पर्दे पर बुरे व्यक्ति का किरदार निभाने वाले प्राण को फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा जाएगा। प्राण ने लगभग चार दशकों तक अलग-अलग किरदारों से दर्शकों का मनोरंजन किया। 

40 साल में कीं 350 फिल्‍में

चार दशक तक लगभग 350 फिल्मों करने वाले अभिनेता प्राण ने हर किस्म का किरदार निभाया है। खलनायक के अलावा वह एक सशक्‍क्त चरित्र अभिनेता रहे हैं। प्राण और विलेन एक दूसरे के मायने हैं। 

यदि कहीं पर विलेन मतलब प्राण लिखा मिल जाए तो कोई ताज्जुब नहीं। प्राण ने एंटी हीरो की ऐसी परिभाषा गढ़ी है जिसका प्रभाव हीरो जितना ही था।

विभाजन के पहले लाहौर फिल्म गतिविधियों का बड़ा केंद्र था। प्राण साहब ने अपने कॅरियर की शुरुआत लाहौर से बननी वाली पंजाबी फिल्मों से की। फिर वह मुंबई आए। फिल्मकारों पर अच्छा प्रभाव पड़े इसलिए वह मुंबई में पहले-पहल होटल ताज में ठहरे। 

उन दिनों ताज का एक दिन का किराया 55 रूपए हुआ करता था। कई दिन रहने के बाद भी प्राण को किसी भी फिल्मकार ने अपनी फिल्म के लिए साइन नहीं किया।

पैसे तेजी से कम होते देख प्राण फिर एक छोटे होटल में शिफ्ट हुए। कई दिनों तक यहां-वहां प्रयास करने के बाद भी प्राण को काम नहीं मिला। एक दिन अचानक प्राण की मुलाकात कहानीकार सहादत हसन मंटो से हुई। वह प्राण से प्रभावित हुए। मंटो उन्हें बांबे टाकीज लेकर गए। 

बांबे टाकीज में प्राण का ऑडीशन लिया गया। ऑडीशन पसंद आया और प्राण को उनकी पहली हिंदी फिल्म 'जिद्दी' मिल गयी। ‌इस फिल्म के साथ दिलचस्प बात यह है कि यह देवआनंद की भी पहली फिल्म थी।

लोगों को याद हैं प्राण के धुएं के छल्ले

लोगों ने प्राण को पहली बार 'बड़ी बहन' फिल्म में नोटिस किया था। प्राण के सिगरेट पीने की स्टाईल निर्देशक को भायी थी। वह सिगरेट के धुएं से एक तरह के छल्ले बनाते थे।

इस फिल्म में प्राण के इंट्रोडक्‍शन के पहले धुए यह छल्ले दिखाये जाते हैं। किरदार में एक तरह का प्रयोग और नयापन प्राण ने अपनी लगभग हर फिल्म में किया।

प्राण को एक रोमांटिक बिलेन माना जाता है। उस दौर की कई ऐसी फिल्में रही हैं जिसमें प्राण नायिका से एकतरफा प्यार करते दिखे।

प्राण का डील-डौल ऐसा था जिसे देखकर लगता था नायिका इससे प्यार करे न करे पर वह नायिका से प्यार करने की हसरत तो मन में पाल ही सकता है। 

उस दौर के बाकी के खलनायकों को इस तरह की भूमिकाएं ऑफर नहीं हुयीं। यह एक तरह से हीरो के बराबर का किरदार था।

'अफसाना', 'चोरी चोरी', 'मधुमती', 'मुनीम जी', 'जब प्यार किसी से होता है', 'ब्रहमचारी' जैसी कई ऐसी फिल्में हैं जिसमें प्राण हीरोईन से प्रेम करते दिखाए गए। 

यह प्राण का रुतबा ही था कि दर्शक सोचते थे कि पता नहीं फिल्म का हीरो नायिका को पा भी पाएगा या नहीं। यह उनकी अदाकारी का जादू था कि दर्शक उनसे बेइंतहा नफरत करते और अंदर-अंदर घबराते भी।

हर बार नए तरीके से खुद को पेश करते रहे हैं प्राण

प्राण ने अपने किरदारों में अपने दोहराव नहीं आने दिया। चूंकि भूमिकाएं तो उन्हें नकारात्मक ही मिलतीं पर वह अपनी अदा से वह उसमें नयापन लाने का प्रयास करते। 

यह नयापन कभी कोई ‌तकिया कलाम होता तो कभी कोई स्टाईल। प्राण की हर फिल्म उनकी यूनिक स्टाईल से पहचानी गयी है। 

नकारात्मक भूमिका के अलावा प्राण एक सशक्कत चरित्र भूमिका भी कर सकते हैं इसे दर्शकों ने मनोज कुमार के बैनर की फिल्म 'शहीद' में देखा।

'शहीद' के बाद मनोज कुमार की ही फिल्‍म 'उपकार' में प्राण मंगल चाचा की यादगार भूमिका में दिखे। इसके बाद प्राण के दूसरे तरह के रोल के दरवाजे खुल गए। 

'जंजीर' फिल्म का शेर खान का किरदार हो या बॉबी फिल्म में ऋषि कपूर के पिता का रोल, प्राण हर तरह के किरदार में प्रभावी नजर आए। 

इसके बाद प्राण, 'डॉन', 'अमर अकबर एंथोनी', 'दोस्ताना', 'कर्ज', 'कालिया', 'नसीब' और 'अंधा कानून' जैसी बड़ी फिल्मों में अलग-अलग किरदारों में दिखें। 1997 में रिलीज हुई फिल्म मृत्युदाता प्राण की आखिरी फिल्म थी। 
 Manoj jaiswal


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मंगलवार

आइये जानते है इंटरनेट के एक मिनट के बारे में

at 19:46
मनोज जैसवाल : आज इंटरनेट हर किसी की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। कुछ ढूंढना हो तो इंटरनेट, मनोरंजन करना हो तो इंटरनेट, दूर बैठे चहेतों या दोस्तों से गपशप करनी हो तो इंटरनेट। आपने भी घंटों इंटरनेट पर वक्‍त गुजारा होगा लेकिन शायद ही कभी आपके मन में यह सवाल आया हो कि इंटरनेट का एक मिनट कैसा होता होगा।

एक मिनट के दौरान इंटरनेट पर क्या-क्या होता होगा। हाल ही में प्रोसेसर बनाने वाली कंपनी इंटेल ने इंटरनेट के इस पहलू पर से पर्दा उठाया है। इंटेल ने बताया कि हर दिन इंटरनेट पर एक मिनट में क्या-क्या होता है।
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सोमवार

ऐसी महंगाई में कैसे मनाएँ होली का त्योहार

at 20:33
मनोज जैसवाल : सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार।इतनी महंगाई में कैसे मनाएँ होली  का त्योहार ? होली रंगों का त्योहार है  रंगों और पिचकारी की कीमतों में बीते साल का मुकाबले इस बार 10 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में त्योहार के लिए खरी बेहद करीब है। लेकिन इस बार होली पर लोगों को महंगाई का झटका लग रहा है। मिठाई के साथ-खरीद दारी करते हुए लोगों की जेब और ज्यादा ढीली हो रही है। मौका रंगों के त्योहार होली का हो तो बाजारों में रौनक बढ़ना लाजमी है। रंग बिरंगे गुलाल, पक्के रंग, एक से बढ़कर एक खूबसूरत पिचकारियां। बच्चों को लुभाने के लिए स्पाइडरमैन और बंदूक से लेकर खरगोश समेत तमाम आकर्षक रूप वाली ढेरों पिचकारियां मौजूद हैं। फिल्मों के शौकीनों के लिए पिचकारी पर उनके पसंदीदा एक्टर भी मिल जाएंगे। इतना ही नहीं, गुलाल और रंगों को भी खास पैंकिंग में बेचा जा रहा है। लेकिन इन सबके के लिए इस बार आपको अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। वजह साफ है, पिछले साल के मुकाबले थौक बाजार में ही रंगों और पिचकारियों की कीमतों में 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। महंगाई का असर रंगों और पिचकारियों पर ही नहीं, मिठाईयों पर भी देखने को मिल रहा है। बढ़ती महंगाई के कारण होली पर मिलने वाली खास गुजिया का स्वाद भी 10 फीसदी तक महंगा हो गया है।ऐसे में गरीब तबका होली का त्योहार कैसे मनायेगा ? यह एक बेहद विचारनीय सवाल है।क्या हमारी सरकार इस बारे में सोचती है,या क्या हमें ही इस बारे कुछ करना होगा ? जिससे सभी लोगों को होली मनाने की ख़ुशी मिले।   

 Manoj jaiswal

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